Big Breaking : राजस्थान देश का पहला राज्य, जहां बच्चों से जुड़ी अदालतों में जज, वकील, पीपी और पुलिस बिना यूनिफॉर्म-आयेंगे अब सामान्य ड्रेस में
CJI सूर्यकांत की प्रेरणा पर राजस्थान के ACJ का ऐतिहासिक फैसला-POCSO व जेजेबी की 100+ अदालतों में बदलेगा माहौल, बच्चों के अनुकूल बनेगा न्यायिक तंत्र
जयपुर। देश के न्यायिक इतिहास और न्यायिक व्यवस्था में एक क्रांतिकारी और देशभर के लिए मिसाल बन जाने वाला फैसला सामने आया है।
राजस्थान अब भारत का पहला राज्य बन गया है, जहां बच्चों से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली अदालतों में जज, वकील, पब्लिक प्रोसिक्यूटर (PP) और पुलिस अधिकारी वर्दी में नहीं बल्कि सामान्य (सिविल) ड्रेस में पेश होंगे।
यह फैसला केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि “बाल-अनुकूल न्याय व्यवस्था (Child-Friendly Justice System)” की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
इस फैसले के जरिए देश की न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक और संवेदनशील बदलाव करते हुए राजस्थान ने एक नई मिसाल कायम कर दी है।
CJI ने किया था आह्वान
गौरतलब है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने 16 मार्च को दिल्ली के रोहिणी में नए परिवार न्यायालय परिसर के शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए फैमिली कोर्ट की कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव का सुझाव दिया था।
उन्होंने कहा था कि बच्चों के मन से ‘डर’ के माहौल को खत्म करने के लिए यह जरूरी है कि जज और वकील पारंपरिक काला कोट और गाउन पहनकर अदालती कार्यवाही में शामिल न हों।
CJI ने कहा था कि जब हम पारिवारिक विवादों को सुलझाने की बात करते हैं, तो हमें पारंपरिक अदालती माहौल से बाहर निकलकर सोचना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि पुलिस अधिकारियों को भी इन अदालतों में वर्दी में नहीं आना चाहिए।
यह बड़ा फैसला देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के आह्वान और राजस्थान के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा की पहल पर लिया गया है।
इस कदम का उद्देश्य अदालत के माहौल को बच्चों के लिए कम भयभीत और अधिक सहज बनाना है।
CJI से प्रेरणा, एसीजे ने की पहल
राजस्थान के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने सीजेआई के इस आह्वान से प्रेरणा लेते हुए राजस्थान में इसकी पहल कर दी है।
एसीजे की इस पहल के बाद हाईकोर्ट प्रशासन ने राजस्थान की सभी पॉक्सो अदालतों और जेजेबी अदालतों को इस मामले में निर्देश भी जारी कर दिए हैं।
अब राज्य की बच्चों से जुड़ी अदालतों में जज, वकील, पब्लिक प्रोसिक्यूटर (PP) और पुलिस अधिकारी पारंपरिक वर्दी में नहीं, बल्कि सामान्य (सिविल) ड्रेस में नजर आएंगे।
क्या है पूरा मामला?
राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने राज्यभर की सभी POCSO (पॉक्सो) अदालतों और जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) की अदालतों में यह व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल चंचल मिश्रा ने 27 मार्च को जारी एक आधिकारिक पत्र के जरिए सभी पीठासीन अधिकारियों को निर्देशित किया है कि अब इन अदालतों में आने वाले सभी संबंधित अधिकारी —
जज, अधिवक्ता, पब्लिक प्रोसिक्यूटर, पुलिस अधिकारी,
यूनिफॉर्म (वर्दी) में नहीं, बल्कि सामान्य कपड़ों में उपस्थित होंगे।
बच्चों के हित में बड़ा कदम
यह निर्णय बच्चों के मानसिक और भावनात्मक हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
अदालतों में वर्दीधारी अधिकारियों की उपस्थिति कई बार बच्चों में डर और तनाव पैदा करती है, जिससे वे खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते।
अब सामान्य ड्रेस में अधिकारी होने से बच्चों को कम डर लगेगा, वे अधिक खुलकर बयान दे सकेंगे, न्यायिक प्रक्रिया ज्यादा संवेदनशील और प्रभावी बनेगी
डीजीपी को भी भेजा गया पत्र
राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने इस फैसले के संबंध में राज्य के डीजीपी को भी पत्र लिखा है।
पत्र में पुलिस अधिकारियों को भी अदालतों में पेशी के दौरान वर्दी के बजाय सामान्य ड्रेस में आने के लिए कहा गया है, ताकि बच्चों के अनुकूल माहौल सुनिश्चित किया जा सके।
100 से अधिक अदालतों में लागू होगा नियम
राज्य में बच्चों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए करीब 65 से अधिक POCSO अदालतें और 40 से अधिक JJB अदालतों में फिलहाल इसे लागू किया जाएगा।
हाल ही में बनाए गए नए जिलों में भी इन अदालतों का संचालन शुरू हो चुका है। इस निर्णय के लागू होते ही राज्य की 100 से अधिक अदालतों में यह नई व्यवस्था प्रभावी हो जाएगी।
भविष्य में यह राज्य की सभी पारिवारिक अदालतों में भी लागू किया जा सकता है।
क्यों खास है यह फैसला?
राजस्थान देश का पहला राज्य बना है जिसने ऐसा कदम उठाया है और अपनी न्यायिक प्रणाली को Child-Friendly बनाने जा रहा है।
अदालतों में मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता देते हुए यह अन्य राज्यों के लिए रोल मॉडल बनने जा रहा है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
यह निर्णय न्याय प्रक्रिया में एक सकारात्मक और प्रगतिशील बदलाव है। इससे बच्चों के बयान अधिक स्पष्ट और निष्पक्ष रूप से सामने आ सकेंगे, जिससे मामलों के निपटारे में भी मदद मिलेगी।
प्रतिक कासलीवाल, अधिवक्ता राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान का यह कदम केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था को संवेदनशील और मानवीय बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव है। अब अदालतें केवल कानून का मंच नहीं, बल्कि बच्चों के लिए सुरक्षित और सहज संवाद का स्थान भी बनेंगी।