जयपुर। राजस्थान विधानसभा में 11 फरवरी यानी कल पेश होने जा रहे वर्ष 2026-27 के राज्य बजट पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।
वित्त मंत्री दीया कुमारी द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले इस बजट से जहां प्रदेश की 8 करोड़ से अधिक आबादी को विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी बड़ी घोषणाओं की उम्मीद है, वहीं न्यायपालिका और अधिवक्ता समुदाय भी इस बार बजट से विशेष उम्मीद लगाए हुए है।
राज्य के न्यायिक ढांचे को मजबूत बनाने, अधिवक्ताओं के सामाजिक सुरक्षा प्रावधानों और अदालतों में लंबित मामलों के तेजी से निस्तारण के लिए इस बार बजट में ठोस कदम उठाए जाने की मांग लगातार उठ रही है।
पिछले एक वर्ष के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट की अलग अलग अदालतों ने राज्य में न्यायिक इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ कई बार सख्त टिप्पणियां की हैं।
अदालतों ने यह स्पष्ट किया है कि न्याय वितरण प्रणाली की गुणवत्ता सीधे तौर पर न्यायालयों की आधारभूत सुविधाओं, न्यायाधीशों की उपलब्धता और तकनीकी संसाधनों पर निर्भर करती है। यही कारण है कि इस बार का बजट न्यायपालिका के लिए निर्णायक माना जा रहा है।
RAJEEV SOGARWAL, PRESIDENT, RHBAC JAIPUR
1 न्यायालयों के लिए मजबूत आधारभूत ढांचा सबसे बड़ी प्राथमिकता
प्रदेश में अदालतों की संख्या के मुकाबले मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
जिला और तहसील स्तर की कई अदालतें अभी भी सीमित भवनों और अपर्याप्त कोर्ट रूम के साथ काम कर रही हैं। कई स्थानों पर न्यायाधीशों के चैंबर, रिकॉर्ड रूम और वकीलों के बैठने की पर्याप्त व्यवस्था तक उपलब्ध नहीं है।
ऐसे में न्यायपालिका की पहली और सबसे बड़ी अपेक्षा अदालतों के लिए नई इमारतों के निर्माण, अतिरिक्त कोर्ट रूम, आधुनिक रिकॉर्ड प्रबंधन कक्ष और न्यायिक अधिकारियों के लिए बेहतर कार्यस्थल सुविधाओं के लिए पर्याप्त बजट आवंटन की है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि न्यायालयों का भौतिक ढांचा मजबूत नहीं होगा तो लंबित मामलों की संख्या कम करना कठिन होगा। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि सरकार इस बार न्यायिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए विशेष पैकेज की घोषणा कर सकती है।
Sushil Sharma, Advocate, Rajasthan Highcourt
2 ई-कोर्ट और डिजिटल न्याय प्रणाली को मिले नई गति
डिजिटल इंडिया अभियान के तहत अदालतों में ई-फाइलिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ऑनलाइन केस मैनेजमेंट सिस्टम को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन कई जिलों में अभी भी तकनीकी संसाधनों की कमी महसूस की जा रही है।
अधिवक्ता संगठनों और न्यायिक अधिकारियों की मांग है कि अदालतों में हाई-स्पीड इंटरनेट, डिजिटल रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन, वर्चुअल सुनवाई की स्थायी व्यवस्था और आधुनिक सॉफ्टवेयर सिस्टम के लिए अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराया जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल न्याय प्रणाली को मजबूत करने से मामलों के निस्तारण की गति बढ़ेगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और आम नागरिकों को भी न्यायालयों की प्रक्रिया अधिक सुलभ हो सकेगी। ग्रामीण क्षेत्रों के वादियों को भी इससे विशेष लाभ मिलेगा क्योंकि उन्हें हर सुनवाई के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी।
3 युवा अधिवक्ताओं के लिए स्टाइपेंड और सामाजिक सुरक्षा की उम्मीद
राजस्थान में हजारों युवा अधिवक्ता हर वर्ष वकालत पेशे में प्रवेश करते हैं, लेकिन शुरुआती वर्षों में आय का स्थायी स्रोत न होने के कारण उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
प्रदेश की विभिन्न बार एसोसिएशनों ने लंबे समय से सरकार से मांग की है कि युवा अधिवक्ताओं के लिए स्टाइपेंड योजना, स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को बजट में शामिल किया जाए।
बार प्रतिनिधियों का कहना है कि शुरुआती आर्थिक अस्थिरता के कारण कई प्रतिभाशाली युवा अधिवक्ता पेशा छोड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं, जिससे न्यायिक व्यवस्था को दीर्घकाल में नुकसान होता है।
यदि सरकार इस बार बजट में युवा अधिवक्ताओं के लिए ठोस योजनाएं लागू करती है तो इससे न्यायिक व्यवस्था को प्रशिक्षित और समर्पित कानूनी पेशेवर मिल सकेंगे।
4 बार एसोसिएशन भवनों और अधिवक्ता सुविधाओं का विकास
जिला और तहसील स्तर पर कई बार एसोसिएशन भवन आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में संचालित हो रहे हैं।
अधिवक्ताओं के लिए पर्याप्त बैठने की व्यवस्था, पुस्तकालय, डिजिटल रिसर्च सेंटर, स्वच्छ पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी लंबे समय से प्रमुख मुद्दा बनी हुई है।
अधिवक्ता संगठनों को उम्मीद है कि इस बार के बजट में बार भवनों के निर्माण और आधुनिकीकरण के लिए विशेष अनुदान की घोषणा की जाएगी।
PRAHLAD SHARMA, ADVOCATE, RAJASTHAN HIGHCOURT
5 लंबित मामलों के निस्तारण के लिए फास्ट-ट्रैक व्यवस्था
राजस्थान की अदालतों में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे आम नागरिकों को न्याय मिलने में लंबा समय लग रहा है।
न्यायपालिका की ओर से लगातार यह मांग उठती रही है कि अतिरिक्त न्यायिक पदों का सृजन, फास्ट-ट्रैक कोर्ट की स्थापना और सहायक न्यायिक स्टाफ की भर्ती की जाए।
बजट में यदि इन क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान किया जाता है तो न्याय वितरण प्रणाली अधिक प्रभावी और तेज हो सकती है।
6 न्यायिक कर्मचारियों और विधि विभाग के संसाधनों में वृद्धि
न्यायिक व्यवस्था केवल न्यायाधीशों तक सीमित नहीं होती बल्कि इसमें न्यायिक कर्मचारी, लोक अभियोजक, विधि अधिकारी और प्रशासनिक स्टाफ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अधिवक्ताओं का मानना है कि इनके प्रशिक्षण, तकनीकी संसाधनों और वेतन संरचना में सुधार के बिना न्यायिक प्रणाली पूरी तरह सक्षम नहीं हो सकती।
इसलिए उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार इस बार विधि विभाग और न्यायिक कर्मचारियों के लिए भी अतिरिक्त संसाधनों की घोषणा कर सकती है।
7 विधिक सेवा योजनाओं के लिए विशेष बजट की आवश्यकता
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रम देशभर में सराहे जाते रहे हैं।
गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता, कानूनी जागरूकता अभियान और लोक अदालतों के माध्यम से विवाद निस्तारण जैसी योजनाओं ने राज्य को अलग पहचान दिलाई है।
वर्तमान में कई नई विधिक सेवा योजनाएं शुरू की गई हैं जिनके प्रभावी संचालन के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता है। इस बार के बजट में विधिक सेवा कार्यक्रमों के विस्तार के लिए विशेष प्रावधान किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
8 हाईकोर्ट की टिप्पणियों के बाद बढ़ी सरकार की जिम्मेदारी
पिछले वर्ष न्यायिक इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से अदालतों की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी और कई अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना पड़ा था।
कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद अब सरकार पर यह दबाव भी है कि बजट में न्यायपालिका से जुड़े क्षेत्रों के लिए पर्याप्त संसाधन सुनिश्चित किए जाएं।
आम जनता के लिए न्यायिक सुधार क्यों जरूरी
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि न्यायपालिका में निवेश केवल अदालतों के लिए नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए महत्वपूर्ण होता है।
मजबूत न्यायिक ढांचा निवेश और उद्योगों के लिए भी सकारात्मक संकेत देता है क्योंकि इससे कानून व्यवस्था और अनुबंधों के पालन की विश्वसनीयता बढ़ती है।
इसके अलावा तेज न्यायिक प्रक्रिया आम नागरिकों के जीवन से जुड़े विवादों को जल्दी सुलझाने में मदद करती है।
बजट पर टिकी न्यायपालिका और अधिवक्ताओं की निगाहें
कुल मिलाकर वर्ष 2026-27 का राजस्थान बजट न्यायपालिका और अधिवक्ता समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालतों के आधारभूत ढांचे, डिजिटल सिस्टम, अधिवक्ताओं की सामाजिक सुरक्षा और लंबित मामलों के निस्तारण से जुड़े ठोस प्रावधान इस बजट को न्यायिक सुधारों की दिशा में ऐतिहासिक बना सकते हैं।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वित्त मंत्री दीया कुमारी अपने बजट भाषण में न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कितनी व्यापक और प्रभावी घोषणाएं करती हैं।