1.65 लाख निवेशकों की उम्मीदें सुप्रीम कोर्ट पर टिकीं; ईडी द्वारा अटैच हजारों करोड़ की संपत्तियों को नीलाम कर पीड़ितों को राहत देने का प्रस्ताव
नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े सहकारी निवेश घोटालों में से एक माने जा रहे आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी (ACCSL) घोटाले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार ने अपना सख्त रुख दोहराया है।
राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में आरोपियो को जमानत नहीं देने का अनुरोध करते हुए निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए ईडी द्वारा जब्त संपत्तियों की नीलामी कराने और पीड़ितों को उनकी जमा पूंजी वापस दिलाने का अनुरोध किया हैं. सके।
घोटाले के आरोपी राहुल मोदी एवं अन्य की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए याचिकाए दायर हैं इन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सरकार ने अपना पक्ष रखा हैं.
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ के समक्ष बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार ने कई दलीले पेश कर संपंतियों की निलामी की मांग की हैं.
1.65 लाख निवेशकों ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। लगभग 1 लाख 65 हजार निवेशकों ने अपने संगठन के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दायर कर मामले में पक्षकार बनने की मांग की।
राजस्थान सहित देश के सात राज्यों से जुड़े इन निवेशकों ने अपने संगठन के जरिए सुप्रीम कोर्ट में पक्षकार बनने के लिए आवेदन किया हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने इन आवेदनों को स्वीकार कर लिया है, जिससे अब पीड़ित निवेशक भी अदालत के सामने अपनी बात रख सकेंगे।
राजस्थान सरकार ने किया जमानत का विरोध
सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.डी. संजय, अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा तथा अतिरिक्त महाधिवक्ता संस्कृती पाठक ने पक्ष रखा।
राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि यह मामला लाखों निवेशकों की जीवनभर की जमा पूंजी से जुड़ा हुआ है। ऐसे में आरोपियों को जमानत देने से न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
राजस्थान सरकार ने अदालत को बताया कि इस घोटाले में निवेशकों के हजारों करोड़ रुपये कथित रूप से हेराफेरी के जरिए विभिन्न शेल कंपनियों और संस्थाओं में ट्रांसफर किए गए हैं। इसलिए आरोपियों को राहत देने से पहले पीड़ितों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
ईडी ने भी बताई जांच की स्थिति
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच जारी है।
वहीं, आधिकारिक परिसमापक (Official Liquidator) की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा।
ईडी ने बताया कि जांच के दौरान बड़ी संख्या में ऐसी संपत्तियां सामने आई हैं जिन्हें अपराध से अर्जित धन से खरीदा गया माना जा रहा है। इन संपत्तियों की कुल कीमत हजारों करोड़ रुपये आंकी जा रही है और इन्हें मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत अटैच किया गया है।
संपत्तियों की नीलामी का प्रस्ताव
राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सुझाव दिया कि निवेशकों को राहत देने के लिए ईडी द्वारा अटैच की गई संपत्तियों को सरकारी निगरानी में सार्वजनिक नीलामी (Public Auction) के जरिए बेचा जा सकता है।
सरकार ने कहा कि यदि इन संपत्तियों की पारदर्शी तरीके से नीलामी कराई जाए तो इससे बेहतर कीमत मिल सकती है और उसी राशि से निवेशकों को उनका पैसा लौटाया जा सकता है।
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक आधिकारिक परिसमापक ने ईडी की अनुमति के बिना किसी भी संपत्ति की बिक्री नहीं की है।
राजस्थान सरकार ने हजारों करोड़ रुपये के घोटाले और लंबे समय से चल रही जांच को देखते हुए आरोपियों की डिफॉल्ट बेल की मांग को खारिज करने का अनुरोध किया हैं.
2018 में दर्ज हुई थी FIR
यह पूरा मामला एफआईआर नंबर 24/2018 से जुड़ा है, जो 28 दिसंबर 2018 को राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने जयपुर में दर्ज की थी।
इस एफआईआर में आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी के संस्थापक मुकेश मोदी और मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल मोदी सहित कई पदाधिकारियों को आरोपी बनाया गया था।
जांच के दौरान सामने आया कि निवेशकों से बड़ी मात्रा में धन एकत्रित कर उसे कथित रूप से शेल कंपनियों के जरिए दूसरी जगह ट्रांसफर किया गया।
कई चरणों में दाखिल हुई चार्जशीट
इस मामले में जांच एजेंसियों ने समय-समय पर कई चार्जशीट दाखिल की हैं—
20 जुलाई 2019 को पहली चार्जशीट दाखिल हुई जिसमें 14 आरोपियों को नामजद किया गया।
10 फरवरी 2020 को पूर्ण चार्जशीट अदालत में पेश की गई।
8 जुलाई 2022 को एक पूरक चार्जशीट दाखिल की गई।
28 अगस्त 2023 को अंतिम चार्जशीट में घोटाले की विस्तृत जानकारी दी गई।
अंतिम चार्जशीट के अनुसार आदर्श क्रेडिट सोसाइटी से जुड़े 56 कंपनियों और 23 फर्मों का नेटवर्क सामने आया। कुल मिलाकर 79 शेल कंपनियां और संस्थाएं बनाई गईं जिनका इस्तेमाल निवेशकों के धन को डायवर्ट करने के लिए किया गया।
वर्तमान में राजस्थान में दर्ज इस एफआईआर के तहत 16 आरोपी मुकदमें का सामना कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट में दर्ज हुआ था सरकार का बयान
मामले की पहली सुनवाई 13 जनवरी 2026 को हुई थी। उस समय राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने आरोपियों की जमानत याचिका का विरोध किया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में दर्ज बयान के अनुसार राज्य सरकार ने कहा था कि वह निवेशकों के हितों की रक्षा करना चाहती है और अदालत को मामले की वर्तमान स्थिति से अवगत कराने के लिए समय चाहती है।
सरकार ने यह भी कहा था कि ऐसे उपाय खोजे जाने चाहिए जिससे निवेशकों की खोई हुई रकम वापस दिलाई जा सके।