जोधपुर की दवा फर्म को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत, ड्रग लाइसेंस रद्द करने का आदेश किया निरस्त
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी भी दवा विक्रेता का लाइसेंस रद्द करने जैसी कठोर कार्रवाई करने से पहले संबंधित प्राधिकारी को नया कारण बताओ नोटिस जारी करना अनिवार्य है।
बिना ऐसा अवसर दिए सीधे लाइसेंस रद्द करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
जस्टिस कुलदीप माथुर की एकलपीठ ने यह विशेष व्यवस्था झंवर मेडिकल एजेंसिज की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दी है।
हाईकोर्ट ने विभाग के लाइसेंस निरस्तीकरण से जुड़े आदेश को रद्द करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई से पहले प्रभावित पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए।
क्या है पूरा मामला
जोधपुर स्थित झंवर मेडिकल एजेंसिज को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत दवाओं के थोक और खुदरा व्यापार के लिए लाइसेंस जारी किया गया था।
आरोप था कि फर्म ने राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के तहत दवाओं की आपूर्ति और स्टॉक रिकॉर्ड के रखरखाव में अनियमितताएं कीं, जिससे सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ।
इन आरोपों के आधार पर 20 सितंबर 2023 को पुलिस थाना बासनी में फर्म के खिलाफ धोखाधड़ी सहित कई धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई।
जांच के दौरान पुलिस ने स्टॉक रिकॉर्ड, बिल, कंप्यूटर और अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए।
इसके बाद सहायक औषधि नियंत्रक ने 19 मार्च 2024 को फर्म को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
पहले लाइसेंस निलंबित, फिर किया रद्द
फर्म की ओर से जवाब देने के बाद प्राधिकारी ने 13 जून 2024 को आदेश जारी कर लाइसेंस को 60 दिनों के लिए निलंबित कर दिया।
बाद में फर्म ने इस आदेश के खिलाफ अपील की, लेकिन अपीलीय प्राधिकारी ने इसे खारिज कर दिया और निलंबन अवधि में कुछ बदलाव किया।
निलंबन अवधि पूरी होने के बाद 23 सितंबर 2024 को प्राधिकरण ने एक नया आदेश जारी कर फर्म का ड्रग लाइसेंस पूरी तरह रद्द कर दिया, जबकि यह लाइसेंस 1 मई 2027 तक वैध था।
इसके खिलाफ भी फर्म ने अपील की, लेकिन 3 जनवरी 2025 को अपीलीय प्राधिकारी ने इसे भी खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट में दी गई चुनौती
इसके बाद फर्म ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए तर्क दिया कि लाइसेंस रद्द करने से पहले कोई नया कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया और न ही व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि निलंबन और निरस्तीकरण दोनों अलग-अलग दंडात्मक कार्रवाइयां हैं।
उन्होंने अदालत को बताया कि निलंबन अस्थायी होता है, जबकि लाइसेंस रद्द करना स्थायी प्रभाव डालता है और इससे व्यवसाय तथा आजीविका पर गंभीर असर पड़ता है। ऐसे में बिना नया नोटिस दिए लाइसेंस रद्द करना कानून के खिलाफ है।
हाईकोर्ट का फैसला
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स नियम, 1945 के नियम 66(1) का उल्लेख करते हुए कहा कि लाइसेंस को निलंबित या रद्द करने की शक्ति प्राधिकारी के पास है, लेकिन ऐसा करने से पहले लाइसेंसधारी को कारण बताने का अवसर देना अनिवार्य है।
हाईकोर्ट ने कहा कि निलंबन और निरस्तीकरण दो अलग-अलग प्रकार की शक्तियां हैं और इनके परिणाम भी अलग होते हैं। निलंबन अस्थायी होता है, जबकि लाइसेंस रद्द करने से व्यापारी का कारोबार पूरी तरह समाप्त हो सकता है। इसलिए इतनी कठोर कार्रवाई से पहले नया नोटिस देकर स्पष्ट रूप से कारण बताना जरूरी है।
आदेश रद्द, लेकिन विभाग को नई कार्रवाई की छूट
हाईकोर्ट ने पाया कि लाइसेंस रद्द करते समय फर्म को नया कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया और न ही सुनवाई का अवसर दिया गया। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने 23 सितंबर 2024 को जारी लाइसेंस निरस्तीकरण आदेश और 3 जनवरी 2025 को पारित अपीलीय आदेश दोनों को रद्द कर दिया।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विभाग यदि चाहे तो कानून के अनुसार नया नोटिस जारी कर ताजा कार्रवाई शुरू कर सकता है।