जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन, जोधपुर ने सीनियर अधिवक्ता एवं नोटरी पब्लिक मोहनसिंह रतनू की कथित असंवैधानिक गिरफ्तारी के विरोध में सोमवार को दोपहर बाद स्वैच्छिक कार्य बहिष्कार किया।
इस कारण राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ सहित अधीनस्थ न्यायालयों में दोपहर बाद न्यायिक कार्य ठप रहा।
एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत जोशी की अध्यक्षता में सोमवार सुबह हुई बैठक के बाद सर्वसम्मति से दोपहर बाद न्यायिक कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया गया.
जिसके चलते दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर तथा अधीनस्थ अदालतों में अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्यवाही में भाग नहीं लिया।
कार्य बहिष्कार के दौरान अधिवक्ताओं ने न्यायालय परिसर में शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया।
पुलिस पर ज्यादती के आरोप
अध्यक्ष रणजीत जोशी ने स्पष्ट किया कि अधिवक्ताओं का उद्देश्य न्यायिक व्यवस्था को बाधित करना नहीं है, बल्कि संवैधानिक मूल्यों, अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा के लिए अपनी आवाज बुलंद करना है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में भी अधिवक्ताओं के अधिकारों का हनन किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

एसोसिएशन के महासचिव डॉ. विजय चौधरी ने बताया कि सीनियर अधिवक्ता मोहनसिंह रतनू को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने से पूर्व एसोसिएशन को किसी प्रकार की सूचना नहीं दी गई, जो कि स्थापित प्रक्रिया और परंपरा के विपरीत है।
डॉ. विजय चौधरी ने कहा कि अधिवक्ता को नोटरी पब्लिक के रूप में कार्य करने के दौरान एक सम्मानित सदस्य के रूप में देखा जाना चाहिए, लेकिन जिस प्रकार से गिरफ्तारी की गई, वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और विधि व्यवसाय की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली है
एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं अपनाई गई तथा संबंधित पुलिस अधिकारियों द्वारा आवश्यक सावधानियां नहीं बरती गईं।

पुलिस आयुक्त को सौपा ज्ञापन
दोपहर बाद एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस आयुक्त से मिलकर घटना के संबंध में ज्ञापन सौंपा और दोषी पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध निष्पक्ष एवं प्रभावी विभागीय जांच की मांग की।
एसोसिएशन के उपाध्यक्ष बुधाराम चौधरी, सहसचिव तक्षेंद्र शर्मा, पुस्तकालय सचिव शिवानी वैष्णव, कोषाध्यक्ष विजय शर्मा ने पुलिस कमिश्नर से मांग की कि भविष्य में अधिवक्ताओं के संबंध में किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पूर्व एसोसिएशन को विश्वास में लिया जाए।