राजस्थान हाईकोर्ट में शनिवार को न्यायिक कार्य बहिष्कार, 5 हाईकोर्ट में लागू हुआ निर्णय
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में वर्ष 2026 के पहले शनिवार कार्यदिवस पर कल अधिवक्ता न्यायिक कार्य बहिष्कार करेंगे वही हाईकोर्ट जज मामलों की सुनवाई करेंगे.
एक तरफ हाईकोर्ट की तीनों बार एसोसिएशन ने न्यायिक कार्य बहिष्कार का ऐलान किया हैं वही दूसरी तरफ हाईकोर्ट प्रशासन ने मुकदमों की सुनवाई के लिए काउजलिस्ट जारी की है.
जोधपुर हाईकोर्ट में जहां सप्लीमेंट्री लिस्ट में बेंचो द्वारा वॉलिटरी आधार पर पुराने मुकदमों की सुनवाई का नोट भी डाला गया हैं दूसरी और जयपुर हाईकोर्ट लिस्ट में ऐसा नोट सामने नहीं आया.
देर रात तक अधिवक्ताओं के सोशलमीडिया ग्रुप में राज्य के विधि विभाग का एक आदेश भी बहुत तेजी से वायरल हुआ जिसमें सरकारी अधिवक्ताओं को शनिवार को मुकदमों की पैरवी के लिए पाबंद किया गया.
न्यायिक कार्य बहिष्कार
राजस्थान हाईकोर्ट की फुल कोर्ट द्वारा प्रत्येक माह के दो शनिवार को कार्यदिवस घोषित किए जाने के फैसले के विरोध में प्रदेश की तीनों प्रमुख बार एसोसिएशनों ने शनिवार 24 जनवरी को न्यायिक कार्य बहिष्कार का ऐलान किया है। इस निर्णय को लेकर अधिवक्ताओं में गहरा असंतोष है और आंदोलन के और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
इस मुद्दे पर शुक्रवार को राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन, जोधपुर, राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन, जोधपुर तथा राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर की संयुक्त बैठक आयोजित हुई, जिसमें आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत जोशी ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शनिवार कार्यदिवस का फैसला वापस नहीं लिया गया, तो गणतंत्र दिवस के बाद आंदोलन और तेज किया जा सकता है।
RANJEET JOSHI, PRESIDENT ADVOCATE ASSOCIATION RHC JODHPUR
वहीं राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर ने भी अध्यक्ष राजीव सोगरवाल और महासचिव दीपेश शर्मा ने बैठक में पदाधिकारियों से चर्चा करने के बादशनिवार 24 जनवरी को न्यायिक कार्य बहिष्कार की घोषणा की है।
बार के महासचिव दीपेश शर्मा ने कहा कि “बार की ओर से हर संभव प्रयास किया गया कि प्रशासन को अधिवक्ताओं की बात समझाई जा सके, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।”
DEEPESH SHARMA, G.S. RHC JAIPUR
फुल कोर्ट के फैसले से शुरू हुआ विवाद
राजस्थान हाईकोर्ट की फुल कोर्ट ने 12 दिसंबर को जैसलमेर में आयोजित बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए प्रत्येक माह के दो शनिवार को कार्यदिवस घोषित किया था। यह निर्णय उस समय लिया गया जब देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत जैसलमेर में आयोजित राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे।
फैसले के तुरंत बाद अधिवक्ताओं ने विरोध नहीं किया और राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के समाप्त होने का इंतजार किया। कॉन्फ्रेंस समाप्त होने के दो दिन बाद ही इस फैसले के खिलाफ विरोध तेज हो गया।
फैसले से अधिवक्ता क्यों हुए नाराज़
अधिवक्ताओं की नाराजगी की मुख्य वजह यह रही कि इस महत्वपूर्ण फैसले से पहले बार एसोसिएशनों या अधिवक्ता प्रतिनिधियों से कोई परामर्श नहीं किया गया। अधिवक्ताओं से सीधे जुड़े इस निर्णय को बिना चर्चा लागू करना बार पदाधिकारियों और वकीलों दोनों को स्वीकार्य नहीं हुआ।
फुल कोर्ट की बैठक में लिए गए निर्णय की जानकारी अधिवक्ताओं को उसी दिन मिल गई थी, लेकिन जैसे-जैसे इसके प्रभाव स्पष्ट हुए, विरोध तेज होता चला गया।

जोधपुर से विरोध की शुरुआत
इस विवाद की शुरुआत जोधपुर हाईकोर्ट से हुई, जहां बार एसोसिएशनों ने न केवल राष्ट्रीय लोक अदालत का बहिष्कार किया, बल्कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन भी किया।

राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन के तत्कालीन अध्यक्ष आनंद पुरोहित खुलकर इस फैसले के विरोध में सामने आए। उनके साथ-साथ एडवोकेट्स एसोसिएशन ने भी इस निर्णय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
बार की एसीजे से मुलाकात
दूसरी ओर जयपुर हाईकोर्ट में नवनिर्वाचित राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर के पदाधिकारियों ने पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की।
वर्ष 2025 के अंतिम कार्यदिवस पर हुई इस मुलाकात में बार पदाधिकारियों ने शनिवार कार्यदिवस के फैसले को वापस लेने का अनुरोध किया। हालांकि बार सूत्रों के अनुसार कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि यह फैसला देश के मुख्य न्यायाधीश की मौजूदगी में लिया गया है, इसलिए इसे वापस लेना उनके लिए संभव नहीं है।

शीतकालीन अवकाश के बाद
20 दिसंबर से 4 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश के कारण यह मुद्दा अस्थायी रूप से शांत रहा, लेकिन वर्ष 2026 के पहले ही कार्यदिवस 5 जनवरी को विरोध फिर तेज हो गया।
5 जनवरी को जोधपुर और जयपुर दोनों ही पीठों पर अधिवक्ताओं ने शनिवार कार्यदिवस के विरोध में न्यायिक कार्य बहिष्कार किया।
5 जजों की कमेटी और अनिश्चितता
बढ़ते विरोध को देखते हुए 6 जनवरी की शाम जयपुर हाईकोर्ट में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और तीनों बार एसोसिएशनों के पदाधिकारियों के बीच करीब डेढ़ घंटे तक बैठक हुई।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 5 न्यायाधीशों की एक समिति गठित की जाएगी, जो 21 जनवरी को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इसके बाद 22 जनवरी को रिपोर्ट पर चर्चा और 23 जनवरी को संभावित रूप से फुल कोर्ट बुलाने का सुझाव भी मौखिक रूप से दिया गया।
हालांकि 21 और 22 जनवरी को न तो समिति की रिपोर्ट को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी दी गई और न ही 24 जनवरी को लेकर स्थिति साफ हुई।
काउज लिस्ट जारी होते ही
अधिवक्ताओं का आक्रोश उस समय और बढ़ गया जब 24 जनवरी, शनिवार के लिए हाईकोर्ट की काउज लिस्ट जारी कर दी गई। इसे अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों की अनदेखी के रूप में देखा।
अधिवक्ताओं का पत्र और चुनावी दबाव
22 जनवरी को जयपुर हाईकोर्ट में सैकड़ों अधिवक्ताओं ने बार अध्यक्ष राजीव सोगरवाल और महासचिव को पत्र लिखकर शनिवार कार्यदिवस का कड़ा विरोध दर्ज कराया। पत्र पर सैकड़ों अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर थे और बार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की गई।
आगामी राजस्थान बार काउंसिल चुनावों को देखते हुए यह मुद्दा और भी संवेदनशील हो गया है। युवा अधिवक्ताओं में इस फैसले को लेकर विशेष चिंता है, जिसके चलते चुनाव लड़ने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता भी खुलकर विरोध में सामने आ रहे हैं।
बार काउंसिल चुनाव और बढ़ती राजनीति
करीब 8 वर्षों बाद होने जा रहे राजस्थान बार काउंसिल के चुनाव से ठीक पहले फुल कोर्ट के इस फैसले ने चुनावी माहौल को गर्म कर दिया है। प्रत्याशियों को जगह-जगह अधिवक्ताओं के सवालों का सामना करना पड़ रहा है कि आखिर इतने बड़े फैसले से पहले बार से सलाह क्यों नहीं ली गई।
5 अन्य हाईकोर्ट में भी लागू हुआ फैसला
राजस्थान हाईकोर्ट के बाद देश के 5 अन्य हाईकोर्ट में भी शनिवार कार्यदिवस लागू करने के निर्णय लिए गए हैं। हालांकि राजस्थान में हो रहे तीव्र विरोध को देखते हुए अन्य हाईकोर्ट में भी असंतोष बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या बढ़ते दबाव और आंदोलन के बीच राजस्थान हाईकोर्ट इस फैसले को वापस लेगा या अधिवक्ताओं का संघर्ष और तेज होगा।