जयपुर/जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के उपभोक्ता आयोगों में कार्यरत अध्यक्षों और सदस्यों को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य में जब तक नए नियमों के तहत भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक वर्तमान में कार्यरत सभी अध्यक्ष एवं सदस्य अपने पदों पर बने रहेंगे।
यह आदेश जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चन्द्र शेखर शर्मा की खंडपीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया हैं.
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वर्तमान में राज्य उपभोक्ता आयोग और जिला उपभोक्ता आयोग में कई पदों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है या होने वाला है, लेकिन अब तक नई नियुक्तियां नहीं की गई हैं। ऐसे में न्यायालय ने प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों में बाधा न आए, इसके लिए यह अंतरिम व्यवस्था आवश्यक मानते हुए आदेश दिया हैं.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता अनिल भंडारी ने अदालत में सुप्रीम कोर्ट के उर्मिला वर्मा बनाम राज्य सरकार फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले में स्पष्ट किया हैं कि जब तक नई भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक वर्तमान पदाधिकारियों को सेवा में बनाए रखा जाए।
इसके अलावा, गणेश कुमार राजेश्वरराव सेलुकर बनाम महेंद्र भास्कर लिमये मामले का भी उल्लेख किया गया, जिसमें नियुक्ति प्रक्रिया और सेवा निरंतरता को लेकर व्यापक दिशा-निर्देश दिए गए थे। हाईकोर्ट ने इन आदेशों को ध्यान में रखते हुए कहा कि समान परिस्थितियों में राज्य में भी यही सिद्धांत लागू किया जाना उचित है।
जो पदमुक्त हो चुके, उनकी पुन: नियुक्ति
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि किसी अधिकारी का कार्यकाल समाप्त हो चुका है या वह समाप्त होने की कगार पर है, तो उसे हटाया नहीं जाएगा, बल्कि नए नियमों के तहत भर्ती पूरी होने तक उसे पद पर बनाए रखा जाएगा।
साथ ही जिन अधिकारियों को पहले ही पद से मुक्त कर दिया गया है, उन्हें तत्काल प्रभाव से पुनः नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जो अधिकारी अभी रिलीव होने की प्रक्रिया में हैं, उन्हें भी अगले आदेश तक रिलीव नहीं किया जाए। इस प्रकार अदालत ने सभी संबंधित अधिकारियों को निरंतर सेवा में बनाए रखने का आदेश दिया है।