जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा संस्थानों में विद्या संबल योजना के तहत कार्यरत गेस्ट फैकल्टी के अधिकारों और उनकी सेवाओं की निरंतरता को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी की एकलपीठ ने इस मामले में दायर याचिका का निस्तारण करते हुए कहा कि जब तक संबंधित पदों पर नियमित नियुक्तियां नहीं हो जातीं या आरपीएससी के माध्यम से चयनित उम्मीदवार नियुक्त नहीं हो जाते, तब तक वर्तमान में कार्यरत गेस्ट फैकल्टी को उनके पदों पर जारी रखा जा सकता है।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी जब तक कि इस मुद्दे पर बड़ी पीठ द्वारा अंतिम निर्णय नहीं दिया जाता।
सेवाओं की निरंतरता का मुद्दा
डॉ. सुनील खटी सहित छह याचिकाकर्ता जो विभिन्न सरकारी कॉलेजों में जूलॉजी, बॉटनी, इंग्लिश, फिजिक्स और केमिस्ट्री—में सहायक प्राध्यापक/गेस्ट फैकल्टी के रूप में कार्यरत हैं।
इनमें से कुछ शिक्षक नागौर के कुचेरा सरकारी कॉलेज में तथा कुछ शिक्षक ब्यावर जिले के जैतारण सरकारी कॉलेज में पढ़ा रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता निखिल डूंगावत ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों की भारी कमी को देखते हुए वर्ष 2021 में विद्या संबल योजना लागू की थी।
इस योजना के तहत उन कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति की जाती है, जहां 60 प्रतिशत से अधिक स्वीकृत पद रिक्त हैं, ताकि छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो।
हर शैक्षणिक सत्र में नई नियुक्ति
मामले में मुख्य विवाद यह था कि क्या गेस्ट फैकल्टी को हर नए शैक्षणिक सत्र में हटाकर नई नियुक्तियां की जाएं या फिर पहले से कार्यरत गेस्ट फैकल्टी को ही कार्य जारी रखने दिया जाए।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यदि हर वर्ष नए सिरे से चयन प्रक्रिया शुरू की जाएगी, तो इससे न केवल शिक्षकों की नौकरी पर अस्थिरता बनी रहेगी बल्कि छात्रों की पढ़ाई पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि उन्हें तब तक कार्य करने दिया जाए जब तक नियमित भर्ती नहीं हो जाती।
राज्य सरकार का पक्ष
मामले में राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता की ओर से यह तर्क दिया गया कि इस मुद्दे पर पहले भी हाईकोर्ट की खंडपीठ विचार कर चुकी है।
सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि इस विषय से जुड़े कई मामलों को बड़ी पीठ के समक्ष विचार के लिए भेजा गया है।
सरकार ने अदालत को बताया कि जयपुर पीठ की खंडपीठ ने स्टेट ऑफ राजस्थान बनाम राम चतुर्वेदी मामले में यह स्पष्ट किया था कि गेस्ट फैकल्टी को स्थायी अधिकार नहीं दिया जा सकता, लेकिन उन्हें तब तक जारी रखा जा सकता है जब तक नियमित चयनित उम्मीदवार उपलब्ध न हो जाएं।
हाईकोर्ट ने पूर्व के फैसले को माना आधार
जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि इस मुद्दे पर पहले ही जयपुर पीठ की खंडपीठ ने विस्तृत विचार करते हुए निर्णय दिया है।
उस निर्णय में यह कहा गया था कि गेस्ट फैकल्टी को उनके पदों पर तब तक जारी रखा जा सकता है जब तक कि उन्हें नियमित चयनित उम्मीदवारों द्वारा प्रतिस्थापित नहीं कर दिया जाता।
अदालत ने यह भी कहा कि गेस्ट फैकल्टी की सेवाएं जारी रखने की शर्त यह होगी कि संबंधित पाठ्यक्रम में पर्याप्त संख्या में छात्र उपलब्ध हों। यदि छात्रों की संख्या पर्याप्त नहीं है तो संबंधित विषय के लिए गेस्ट फैकल्टी की आवश्यकता नहीं मानी जाएगी।
मानदेय को लेकर भी स्पष्टता
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि गेस्ट फैकल्टी को वर्तमान में जो मानदेय दिया जा रहा है, वह जारी रहेगा। खंडपीठ के पूर्व आदेश के अनुसार गेस्ट फैकल्टी को प्रति घंटा 800 रुपये तक का मानदेय दिया जाता है, जिसे राज्य सरकार समय-समय पर संशोधित भी कर सकती है।
बड़ी पीठ के निर्णय पर निर्भर रहेगा अंतिम परिणाम
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले में अंतिम स्थिति बड़ी पीठ के निर्णय पर निर्भर करेगी। चूंकि इस मुद्दे को बड़ी पीठ के समक्ष विचारार्थ भेजा गया है, इसलिए फिलहाल पूर्व के निर्णय प्रभावी रहेंगे और उसी के आधार पर वर्तमान याचिका का निस्तारण किया गया है।