जयपुर। राजस्थान ने स्टेनोग्राफर और पर्सनल असिस्टेंट ग्रेड-II भर्ती को लेकर बड़ा फैसला सुनाया हैं.
राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भर्ती प्रक्रिया में दी गई 5% अतिरिक्त छूट को अवैध घोषित कर दिया है।
साथ ही कोर्ट ने प्रोविजनल और फाइनल दोनों मेरिट लिस्ट को रद्द करते हुए नई मेरिट सूची तैयार करने के आदेश दिए हैं।
यह मामला उन अभ्यर्थियों द्वारा दायर याचिकाओं से जुड़ा है, जिन्होंने भर्ती प्रक्रिया के दूसरे चरण (स्किल टेस्ट) में दी गई अतिरिक्त छूट को चुनौती दी थी। कोर्ट ने सभी याचिकाओं को एक साथ सुनते हुए विस्तृत निर्णय सुनाया।
जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश दिनेश शर्मा व अन्य सैकड़ो अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिकाओं पर दिया हैं.
क्या था पूरा मामला
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने 26 फरवरी 2024 को 444 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। चयन प्रक्रिया दो चरणों में थी जिसमें लिखित परीक्षा, स्किल टेस्ट (स्टेनोग्राफी) शामिल थी.
जिसमें नियमों के अनुसार सामान्य वर्ग के लिए अधिकतम 20% गलतियां और SC/ST वर्ग के लिए अधिकतम 25% गलतियां छूट थी लेकिन बोर्ड ने बाद में सभी श्रेणियों में 5% अतिरिक्त छूट दे दी।
विवाद कैसे बढ़ा
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता संदीप पाठक, जया पाठक,अक्षयसिंह ने पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि बिना अतिरिक्त छूट के ही पर्याप्त उम्मीदवार उपलब्ध थे फिर भी 5% छूट देकर कम अंक वाले उम्मीदवारों को भी मौका दिया गया. इससे मेरिट लिस्ट प्रभावित हुई
कोर्ट में यह भी बताया गया कि 444 पदों के मुकाबले 643 उम्मीदवार पहले ही योग्य थे, फिर भी 904 उम्मीदवारों को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया।
याचिकाकर्ता की दलीलें
इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने भर्ती प्रक्रिया में 5% अतिरिक्त छूट को पूरी तरह अवैध और मनमाना बताया।
अधिवक्ताओं का तर्क था कि भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट रूप से अधिकतम गलतियों की सीमा तय की गई थी—सामान्य वर्ग के लिए 20% और SC/ST वर्ग के लिए 25%।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि अतिरिक्त 5% छूट केवल उसी स्थिति में दी जा सकती है, जब किसी श्रेणी में पर्याप्त उम्मीदवार उपलब्ध न हों। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं था।
उन्होंने कोर्ट के सामने आंकड़ों के साथ बताया कि 444 पदों के मुकाबले 643 उम्मीदवार पहले ही बिना किसी अतिरिक्त छूट के योग्य थे, यानी पर्याप्त उम्मीदवार पहले से मौजूद थे
इसके बावजूद 5% अतिरिक्त छूट देना नियमों का दुरुपयोग है.
याचिकाकर्ताओं का यह भी कहना था कि इस अतिरिक्त छूट के कारण कम योग्य उम्मीदवार भी चयन प्रक्रिया में शामिल हो गए जिससे मेरिट लिस्ट की गुणवत्ता प्रभावित हुई और योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन हुआ
इसके अलावा, उन्होंने “डबल लाभ” का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि SC/ST वर्ग को पहले से 5% अतिरिक्त छूट मिलती है, ऐसे में उन्हें फिर से अतिरिक्त छूट देना अनुचित है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सामान्य श्रेणी की सीटों पर भी जगह दी गई, जबकि उन्होंने छूट का लाभ लिया था, जो नियमों के खिलाफ है.
याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि भर्ती प्रक्रिया के बीच में नियम बदलना “रूल्स ऑफ गेम” के सिद्धांत के खिलाफ है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।
राज्य सरकार व चयन बोर्ड का पक्ष
राज्य सरकार और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि उनका निर्णय पूरी तरह नियमों के तहत लिया गया था।
उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया वैधानिक नियमों (Rules of 1970) के तहत संचालित होती है इन नियमों में बोर्ड को 5% तक अतिरिक्त छूट देने का अधिकार है.
प्रतिवादियों का मुख्य तर्क था कि “पर्याप्त उम्मीदवार” की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है। इसलिए बोर्ड को यह तय करने का अधिकार है कि कितने उम्मीदवार पर्याप्त माने जाएंगे।
उन्होंने Department of Personnel (DoP) के 18.10.2021 के सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा कि दस्तावेज सत्यापन और वेटिंग लिस्ट के लिए कम से कम दोगुने उम्मीदवार आवश्यक होते हैं.
उन्होंने कोर्ट के सामने डेटा प्रस्तुत किया जिसमें बताया गया कि कई श्रेणियों में उम्मीदवारों की संख्या दोगुनी नहीं थी, कुछ श्रेणियों में तो रिक्तियों से भी कम उम्मीदवार थे
सरकार ने कहा कि इस आधार पर बोर्ड ने 5% अतिरिक्त छूट देकर उम्मीदवारों की संख्या बढ़ाई। बोर्ड और सरकार ने यह भी कहा कि यह छूट सभी श्रेणियों में समान रूप से दी गई और इससे किसी भी उम्मीदवार के साथ अन्याय नहीं हुआ
बोर्ड ने कहा कि अंतिम चयन मेरिट के आधार पर ही होगा.
उन्होंने यह भी दलील दी कि अतिरिक्त छूट देने से कोई कम मेरिट वाला उम्मीदवार चयनित नहीं होगा, क्योंकि अंतिम मेरिट सूची दोनों चरणों के कुल अंकों के आधार पर बनती है.
हाईकोर्ट ने क्या कहा
राजस्थान हाईकोर्ट ने साफ कहा कि भर्ती नियम और विज्ञापन की शर्तें बाध्यकारी होती हैं चयन प्रक्रिया के बीच में नियम नहीं बदले जा सकते और बिना जरूरत सभी श्रेणियों में छूट देना गलत है
कोर्ट ने माना कि अधिकतम गलतियों की सीमा एक गुणवत्ता मानक है, जिसे बनाए रखना जरूरी है।
कोर्ट का बड़ा फैसला
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा 5% अतिरिक्त छूट देना गैरकानूनी और नियमों के खिलाफ है.
हाईकोर्ट ने 25 सितंबर 2025 की प्रोविजनल मेरिट लिस्ट और 21 अक्टूबर 2025 को जारी कि गयी फाइनल मेरिट लिस्ट को रद्द कर दिया हैं.
45 दिन में नई मेरिट
हाईकोर्ट ने अब इस मामले में नई मूल नियम लागू करते हुए नई मेरिट लिस्ट बनाने के आदेश दिए हैं जिसमें सामान्य वर्ग: 20% गलतियां और SC/ST वर्ग: 25% गलतियां स्वीकार होगी.
साथ ही 5% अतिरिक्त छूट केवल उन्हीं श्रेणियों में दी जाएगी जहां बिना छूट के पर्याप्त उम्मीदवार उपलब्ध नहीं हों
हाईकोर्ट ने बोर्ड को यह सभी प्रक्रिया आगामी 45 में पूरी करने का आदेश दिया हैं.