जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में चार वर्षों के लंबे अंतराल के बाद सीनियर एडवोकेट पदनाम (Designation) की बहुप्रतीक्षित प्रक्रिया फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है।
शुक्रवार को राजस्थान हाईकोर्ट में दोपहर 12 आयोजित हुई फुल कोर्ट बैठक में इस मुद्दे पर न्यायाधीशों के बीच आम सहमति नहीं बन पाने के कारण पदनाम से जुड़ा पूरा मामला फिलहाल डेफर कर दिया गया।
इसके साथ ही 40 से अधिक अधिवक्ताओं को सीनियर एडवोकेट बनाए जाने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।
सूत्रों के अनुसार, जिस दिन भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) राजस्थान दौरे पर थे, उसी दिन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में राजस्थान हाईकोर्ट की फुल कोर्ट बैठक आयोजित की गई।
बैठक में जयपुर और जोधपुर पीठ के सभी न्यायाधीश मौजूद थे।
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा करीब चार महीने से चल रही सीनियर एडवोकेट पदनाम प्रक्रिया पर अंतिम निर्णय लेना था।
हालांकि, चर्चा शुरू होते ही सूची में शामिल कुछ नामों को लेकर न्यायाधीशों के बीच गंभीर मतभेद सामने आ गए।
सूत्रों के अनुसार विशेष रूप से अपेक्षाकृत कम वरिष्ठता वाले कुछ युवा अधिवक्ताओं के नामों पर कई न्यायाधीशों ने आपत्ति जताई।
इन नामों पर व्यापक सहमति नहीं बन सकी और बड़ी संख्या में न्यायाधीश इस चरण में पदनाम देने के पक्ष में नहीं थे।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान मतदान कराने का सुझाव भी सामने आया, लेकिन लगभग 24 से 25 न्यायाधीशों की राय थी कि मौजूदा परिस्थितियों में निर्णय लेने के बजाय पूरे मामले को फिलहाल स्थगित कर दिया जाए।
बहुमत की इसी राय के बाद सीनियर एडवोकेट पदनाम की प्रक्रिया को डेफर करने का निर्णय लिया गया।
इस फैसले के बाद अब राजस्थान हाईकोर्ट में सीनियर एडवोकेट पदनाम का इंतजार और लंबा हो सकता है।
चार वर्षों से लंबित इस प्रक्रिया से जुड़े अधिवक्ताओं की उम्मीदों को फिलहाल झटका लगा है, जबकि यह भी माना जा रहा है कि भविष्य में सूची और पात्रता को लेकर दोबारा व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
(नोट: यह समाचार विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।)