जयपुर। भरतपुर के आरबीएम अस्पताल से जुड़ी बहुचर्चित 25,000 वर्गमीटर भूमि अब अस्पताल के लिए ही उपयोग में ली जाएगी।
राजस्थान सरकार ने हाईकोर्ट में इस विवादित भूमि को लेकर तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश की है।
जिसमें सरकार ने कहा है कि अस्पताल के लिए आरक्षित भूमि को अस्पताल के लिए ही उपयोग में लिया जाएगा।
सरकार की तथ्यात्मक रिपोर्ट के आधार पर राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में दायर जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया है।
जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने माधो सिंह मदेरणा और जोगेंद्र सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है।
क्या था पूरा मामला?
भरतपुर के मुख्य शहर में स्थित करीब 50 हजार वर्गमीटर जमीन को सरकार ने RBM अस्पताल के लिए आरक्षित किया था।
बाद में इसमें से 25,000 वर्गमीटर जमीन पर स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए कॉटेज और कैंसर वार्ड बनाए जाने के लिए जमीन आरक्षित की गई।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया कि भरतपुर विकास प्राधिकरण (BDA) द्वारा आरबीएम अस्पताल के लिए आरक्षित लगभग 25,000 वर्गमीटर जमीन का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है या करने की तैयारी है।
निलामी का आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रखर गुप्ता और संजय शर्मा ने पैरवी करते हुए अदालत से कहा कि इस जमीन को व्यावसायिक कार्य के लिए उपयोग में लिया जा रहा है और अब इस जमीन पर कॉमर्शियल/रेजिडेंशियल प्लॉट काटने के लिए प्राधिकरण द्वारा नीलामी की जा रही है।
याचिका में दावा किया गया कि सार्वजनिक हित की जमीन को बदलकर प्लॉटिंग करना उचित नहीं है, खासतौर से कैंसर जैसे गंभीर रोग के लिए प्रस्तावित सुविधा क्यों रोकी गई?
याचिका में मांग की गई कि इस जमीन की नीलामी/व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाई जाए और अस्पताल विस्तार (ट्रॉमा सेंटर, सुपर स्पेशलिटी, नर्सिंग कॉलेज) के लिए भूमि सुरक्षित रखी जाए।
सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से 2026 की तथ्यात्मक रिपोर्ट में बताया गया कि योजना संख्या 10 में 25,000 वर्गमीटर भूमि अस्पताल विस्तार के लिए आरक्षित है। इसके अलावा मेडिकल सुविधाओं के लिए अलग से जमीन भी आवंटित की जा चुकी है।
सरकार ने कहा कि अस्पताल विस्तार, पार्किंग, मरीजों और परिजनों की सुविधाओं के लिए यह भूमि सुरक्षित रहेगी और किसी भी तरह से इस भूमि को खत्म नहीं किया जाएगा।
हाईकोर्ट का फैसला
सरकार की रिपोर्ट में स्थिति साफ होने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने जनहित याचिका का निस्तारण किया, साथ ही याचिकाकर्ता को छूट दी कि यदि भविष्य में कोई विवाद या समस्या बनी रहती है, तो याचिकाकर्ता फिर से कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।