जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ से न्यायिक व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर मामला सामने आया है।
राजस्थान हाईकोर्ट की कोर्ट संख्या-25 में 5 अगस्त 2026 को सुनवाई के लिए तय पांच आपराधिक याचिकाओं की मूल पत्रावलियां गायब मिलीं और इन्हीं मामलों को हाईकोर्ट के Cause List Programme से भी डिलीट कर दिया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रिकॉर्ड के अनुसार पांचों मामलों को 31 जुलाई को शाम 5:36 बजे सिस्टम में दर्ज किया गया और महज 48 मिनट बाद शाम 6:24 बजे दूसरी यूजर आईडी से डिलीट कर दिया गया।
अब इस पूरे घटनाक्रम में राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने जोधपुर के कुड़ी भगतासनी पुलिस थाने में FIR दर्ज कराई है।
पहले कोर्ट ने सुनवाई के लिए तय किया, फिर सिस्टम से गायब कर दिए गए केस
यह पूरा मामला जयपुर के एसओजी थाने से जुड़ी 5 याचिकाओं का है। इन मामलों में याचिकाकर्ता आरोपियों को पूर्व में कोर्ट से राहत मिली थी और उनकी गिरफ्तारी पर भी रोक लगी हुई है।
अलग-अलग याचिकाएं होने के चलते राजस्थान हाईकोर्ट में इन सभी को एक साथ सुनवाई के लिए अनुरोध के साथ 5 अगस्त को सूचीबद्ध की गई थी।
इनमें से याचिका संख्या 1511/2025, 326/2025 और 2684/2025 पहले 27 जुलाई 2026 को कोर्ट के सामने सूचीबद्ध हुई थीं।
कोर्ट ने इन तीनों को 10276/2025 और 10486/2025 के साथ 5 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए।
इसके बाद 5 अगस्त की दैनिक वाद-सूची 31 जुलाई को तैयार की गई और संबंधित लिपिक ने पांचों मामलों की Cause List Slip भी वाद-सूची अनुभाग को भेज दी।
यानी पांचों मामले बाकायदा कोर्ट की सुनवाई के लिए तय हो चुके थे। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए।
5:36 बजे एंट्री… 6:24 बजे डिलीट!
राजस्थान हाईकोर्ट के ज्यूडिशियल रजिस्ट्रार की ओर से पुलिस में दी गई रिपोर्ट के अनुसार 31 जुलाई 2026 को शाम 5:36 बजे पांचों याचिकाओं की फाइलों की एंट्री कोर्ट कर्मचारी दीपक बालानी की आईडी से प्रतिदिन की दैनिक वाद-सूची में की गई थी।
इसके महज 48 मिनट बाद शाम 6:24 बजे इन्हीं पांचों पत्रावलियों को किसी अन्य User आईडी से दैनिक वाद-सूची से डिलीट कर दिया गया।
यही टाइमलाइन अब पुलिस जांच का सबसे अहम हिस्सा बन गई है—किसने डिलीट किया? किस अधिकार से डिलीट किया? और पांचों मूल फाइलें उसी दौरान कहां चली गईं?
5 अगस्त को सुनवाई होनी थी, लेकिन कोर्ट में फाइलें ही नहीं पहुंचीं
इन याचिकाओं पर 5 अगस्त को राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन 4 अगस्त की शाम तक जब लिस्ट में सूचीबद्ध नहीं हुईं तो संबंधित अधिवक्ता ने सूचीबद्ध नहीं होने को लेकर वाद-सूची विभाग से जानकारी ली, तब छानबीन शुरू हुई।
जांच में सामने आया कि पांचों मामले पहले ही 5 अगस्त की दैनिक वाद-सूची में शामिल किए जा चुके थे और उसकी प्रिंट कॉपी भी निकाली गई थी।
इसके बाद किसी व्यक्ति द्वारा Cause List Programme के जरिए पांचों याचिकाओं को डिलीट किए जाने की बात सामने आई।
इसके बाद संबंधित कोर्ट रूम में पांचों मूल पत्रावलियों की तलाश की गई, लेकिन एक भी फाइल नहीं मिली। अन्य कोर्ट रूम और अनुभागों में भी तलाश हुई, मगर पत्रावलियां बरामद नहीं हो सकीं।
नतीजा यह रहा कि 5 अगस्त को इन पांचों मामलों में कोई प्रभावी सुनवाई ही नहीं हो सकी।
कौन-कौन से मामले हैं?
गायब हुई पांच पत्रावलियां ये हैं—
S.B. Criminal Misc. Petition No. 1511/2025 — जोगेन्द्र सिंह बनाम राजस्थान राज्य व अन्य
S.B. Criminal Misc. Petition No. 326/2025 — गणपत लाल
S.B. Criminal Misc. Petition No. 2684/2025 — दिनेश कुमार
S.B. Criminal Misc. Petition No. 10276/2025 — संगीता कडवासरा
S.B. Criminal Misc. Petition No. 10486/2025 — सुभाष चन्द्रा
रिपोर्ट के अनुसार इनमें कुछ याचिकाएं SOG जयपुर की FIR से संबंधित हैं और संबंधित मामलों को एक साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था।
यह सिर्फ फाइल गुम होने का मामला नहीं!
राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार न्यायिक की ओर से पुलिस को दी गई रिपोर्ट में इसे महज रिकॉर्ड मिसिंग का मामला नहीं माना गया है।
रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि किसी हितबद्ध पक्षकार ने वाद-सूची अनुभाग अथवा किसी अन्य अनुभाग के कर्मचारी से मिलीभगत कर पांचों मामलों को Cause List Programme से डिलीट कराया और मूल पत्रावलियों को भी न्यायालय कक्ष से अनधिकृत रूप से हटाया।
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि पांचों मूल फाइलें अभी तक नहीं मिली हैं और फाइलों को हटाना तथा Cause List Programme के अनधिकृत उपयोग से डिजिटल वाद-सूची में छेड़छाड़ करना अपराध/साइबर अपराध की श्रेणी में आता है।
हालांकि, मिलीभगत या किसी व्यक्ति की भूमिका के संबंध में रिपोर्ट में व्यक्त आशंका अभी पुलिस जांच का विषय है।
FIR में BNS की गंभीर धाराएं
रजिस्ट्रार न्यायिक की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस थाना कुड़ी भगतासनी, जोधपुर में 12 अगस्त 2026 को FIR दर्ज की गई।
FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 303(2) और 61(2) लगाई गई हैं। जांच उपनिरीक्षक गिरधारी लाल को सौंपी गई है।
सबसे बड़ा सवाल: सिस्टम में किसने की एंट्री और किसने किया डिलीट?
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी डिजिटल लॉग बन गया है।
एक तरफ रिकॉर्ड बताता है कि शाम 5:36 बजे दीपक बालानी की आईडी से पांचों मामलों की एंट्री हुई।
दूसरी तरफ उसी दिन शाम 6:24 बजे किसी अन्य User आईडी से पांचों मामलों को डिलीट किया गया।
क्या होगा अब जांच का केंद्र-
क्या दोनों यूजर आईडी का इस्तेमाल उन्हीं संबंधित व्यक्तियों ने किया था?
User 38 से लॉगिन किसने किया?
पांचों मामलों को एक साथ डिलीट करने की जरूरत क्यों पड़ी?
डिजिटल रिकॉर्ड हटाने और मूल फाइलों के गायब होने के बीच क्या संबंध है?
और सबसे अहम–
क्या किसी को इन पांचों मामलों की सुनवाई टलवाने से कोई फायदा होना था?
यह पहली बार नहीं था-पहले भी दो फाइलें नहीं मिली थीं
मामले को और गंभीर बनाने वाला तथ्य यह है कि राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ में इससे पहले भी याचिका संख्या 1511/2025, 326/2025 और 2684/2025 पहले भी 13 अक्टूबर 2025 को कोर्ट नंबर-14 की दैनिक वाद-सूची में क्रमांक 16 से 18 पर सूचीबद्ध हुई थीं।
बाद में 326/2025 और 2684/2025 की पत्रावलियां संबंधित कोर्ट रूम में नहीं मिली थीं।
इसके चलते दोनों मामलों को वाद-सूची से ड्रॉप करने के लिए पूरक वाद-सूची में नोटिस तक जारी करना पड़ा था और उस दिन उन मामलों में सुनवाई नहीं हो सकी थी।
अब वही दो फाइलें समेत कुल पांच पत्रावलियों के गायब होने और डिजिटल कॉजलिस्ट से एक साथ डिलीट किए जाने ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
हाईकोर्ट की रिकॉर्ड सुरक्षा पर बड़ा सवाल
एक ही दिन पांच मामलों की सिस्टम एंट्री, 48 मिनट बाद पांचों का डिजिटल डिलीट होना, फिर उन्हीं पांच मामलों की मूल पत्रावलियों का कोर्ट में नहीं मिलना और अंततः 5 अगस्त की सुनवाई का प्रभावित होना—घटनाओं की यह कड़ी अब पुलिस जांच के केंद्र में है।
फिलहाल पांचों मूल पत्रावलियां बरामद नहीं हुई हैं। पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अब यह जांच ही तय करेगी कि यह महज प्रशासनिक लापरवाही थी, रिकॉर्ड प्रबंधन की गंभीर चूक थी या इसके पीछे सुनियोजित तरीके से न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोई साजिश थी।