प्रसूता महिला अभ्यर्थी को राजस्थान हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, फिजिकल टेस्ट का दोबारा मौका और एक पद रिक्त रखने के आदेश
जोधपुर। Rajasthan HighCourt ने पुलिस भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक अहम फैसले में प्रसूता महिला अभ्यर्थियों के अधिकारों और स्वास्थ्य संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए महत्वपूर्ण फैसला दिया है।
जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की एकलपीठ ने महिला कांस्टेबल भर्ती में शारीरिक दक्षता परीक्षा में असफल घोषित की गई एक प्रसूता महिला अभ्यर्थी को पुनः फिजिकल टेस्ट का अवसर देने के आदेश दिए हैं।
प्रसव के दो सप्ताह बाद दक्षता परीक्षा
बाड़मेर निवासी 26 वर्षीय सुशीला ने महिला कांस्टेबल पद के लिए आवेदन किया था।
याचिकाकर्ता सुशीला लिखित परीक्षा में सफल रही थीं और उनकी शारीरिक दक्षता परीक्षा 14 दिसंबर 2025 को निर्धारित की गई थी।
इससे पूर्व 29 नवंबर 2025 को उन्होंने एक शिशु को जन्म दिया था।
प्रसव के चलते शारीरिक परीक्षा में भाग लेना उनके लिए चिकित्सकीय रूप से चुनौतीपूर्ण था।
इस स्थिति को देखते हुए उन्होंने 29 नवंबर को ही संबंधित भर्ती अधिकारियों को प्रतिवेदन पेश कर भर्ती विज्ञापन की शर्तों के अनुसार अस्थायी छूट देने का अनुरोध किया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शांभवी मर्डिया ने अदालत को बताया कि अधिकारियों ने उनके प्रतिवेदन पर कोई निर्णय नहीं लिया, जिसके चलते याचिकाकर्ता को प्रसव के मात्र दो सप्ताह बाद ही शारीरिक दक्षता परीक्षा में भाग लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।
स्वाभाविक रूप से वह दौड़ परीक्षा में सफल नहीं हो सकीं और उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया।
विज्ञापन की शर्त का पालन नहीं
बहस सुनने के बाद Rajasthan HighCourt ने कहा कि भर्ती विज्ञापन की शर्त संख्या 10 का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया गया है कि गर्भवती महिलाओं को शारीरिक दक्षता परीक्षा में भाग न लेने की सलाह दी गई है।
साथ ही यह भी प्रावधान है कि प्रसव के बाद महिला अभ्यर्थी छह माह की अवधि के भीतर राज्य चिकित्सा अधिकारी से फिटनेस प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर शारीरिक परीक्षा में शामिल हो सकती हैं।
कोर्ट ने माना कि हाल ही में प्रसव कर चुकी महिला से शारीरिक परीक्षा में तत्काल सफलता की अपेक्षा करना न केवल अव्यावहारिक बल्कि अन्यायपूर्ण भी है।
मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण
Rajasthan HighCourt ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि भर्ती नियम और शर्तें महिला अभ्यर्थियों के स्वास्थ्य, गरिमा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं।
ऐसे में इनका मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण से पालन किया जाना आवश्यक है।
एक पद रिक्त रखा जाए
Rajasthan HighCourt ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता को प्रसव की तिथि से अधिकतम छह माह की अवधि के भीतर, फिटनेस प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने पर शारीरिक दक्षता परीक्षा में पुनः भाग लेने का अवसर दिया जाए।
Rajasthan HighCourt ने इसके साथ ही यह भी आदेश दिया कि जब तक सुशीला को यह अवसर नहीं दिया जाता, तब तक बाड़मेर जिले में महिला कांस्टेबल का एक पद रिक्त रखा जाए।