जयपुर। अदालत के आदेशों की पालना नहीं करने के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने RSRTC के प्रबंध निदेशक और जयपुर डिपो के चीफ मैनेजर को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।
राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर पीठ में जस्टिस सुदेश बंसल और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (RSRTC) के अधिकारियों के रवैये पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि निगम ने पूर्व में पारित अदालत के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना की है।
यह मामला फूलचंद गुर्जर व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर दिया गया है। याचिका में याचिकाकर्ताओं ने नियमितीकरण से संबंधित हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना का आरोप लगाया है।
हाईकोर्ट ने दिया था नियमितीकरण का आदेश
वर्ष 2018 में राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने RSRTC को यह आदेश दिया था कि वह याचिकाकर्ताओं के मामलों पर 31 मार्च 1995 की योजना के तहत नियमितीकरण पर विचार करे।
इस आदेश को बाद में राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ और फिर सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट ने RSRTC द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका को भी 7 अप्रैल 2021 को खारिज कर दिया था।
इसके बावजूद RSRTC ने 19 जनवरी 2024 को एक आदेश पारित कर याचिकाकर्ताओं का नियमितीकरण यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उन्होंने पुनः सेवा ग्रहण नहीं की।
कोर्ट आदेश की अवहेलना
हाईकोर्ट ने इस निर्णय को गंभीर त्रुटिपूर्ण मानते हुए कहा कि निगम ने यह विचार ही नहीं किया कि लेबर कोर्ट के 20 फरवरी 1996 के पुरस्कार के अनुसार याचिकाकर्ताओं को सेवा में माना जाना था।
हाईकोर्ट ने कहा कि 2018 के आदेश में यह निर्देश था कि याचिकाकर्ताओं को सेवा में मानते हुए 1995 की योजना के तहत नियमितीकरण पर विचार किया जाए।
इसके विपरीत RSRTC का आदेश अदालत के निर्देशों के दायरे से बाहर है और यह स्पष्ट रूप से आदेश की अवहेलना है।
जानबूझकर की गई अवहेलना
हाईकोर्ट ने कहा कि नियमितीकरण से इनकार करने वाला आदेश यह दर्शाता है कि RSRTC ने जानबूझकर हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना की है।
हाईकोर्ट ने इसे अदालत की अवमानना मानते हुए कहा कि संबंधित अधिकारी प्रथम दृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं।
हाईकोर्ट ने इस मामले में RSRTC के वर्तमान प्रबंध निदेशक और जयपुर डिपो के चीफ मैनेजर को जिम्मेदार ठहराते हुए आदेश दिया कि वे स्वयं उपस्थित होकर यह स्पष्ट करें कि हाईकोर्ट के आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता की ओर से अदालत से समय की मांग की गई, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने अगली सुनवाई की तिथि 3 फरवरी 2026 निर्धारित की है।