अधिवक्ता का आरोप- न आदेश बदला, न वापस हुआ, फिर भी बिना सूचना सुरक्षा हटाई गई
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश से अधिवक्ता आर.एस. राघव को मिली सुरक्षा कथित तौर पर वापस लिए जाने के मामले में जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल को अवमानना नोटिस जारी किया है।
हाईकोर्ट ने मामले को प्रथमदृष्टया अवमानना का विषय मानते हुए पुलिस कमिश्नर से जवाब तलब किया है। उन्हें 2 सितंबर 2026 को अपना जवाब पेश करना होगा।
मामला वर्ष 2015 में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए सुरक्षा आदेश की कथित अवहेलना से जुड़ा है।
आर.एस. राघव की ओर से दायर अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट के आदेश में सुरक्षा जारी रखने के स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद उनकी सुरक्षा वापस ले ली गई और बाद में अभ्यावेदन देने के बावजूद सुरक्षा बहाल नहीं की गई।
2015 में धमकी के बाद हाईकोर्ट पहुंचा था मामला
अधिवक्ता आर.एस. राघव वर्ष 2014 से मार्च 2019 तक लोक अभियोजक के रूप में कार्यरत रहे।
याचिका के अनुसार उन्होंने 4 अगस्त 2015 को सरकार की ओर से एक जमानत याचिका का विरोध किया था।
जमानत का विरोध करने के दौरान आरोपी पक्ष की ओर से राघव को धमकी दिए जाने का आरोप लगाया गया।
याचिका के अनुसार इस संबंध में शिकायतकर्ता अनिता जैन के माध्यम से जानकारी मिलने के बाद राघव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सुरक्षा मांगी थी।
हाईकोर्ट ने दिया था सुरक्षा का आदेश
20 अगस्त 2015 को हाईकोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए करनी विहार, सोडाला और वैशाली नगर थानों के अधिकारियों को तलब किया और शिकायतकर्ता अनिता जैन का बयान उप रजिस्ट्रार (न्यायिक) के समक्ष दर्ज कराने का आदेश दिया था।
बयान दर्ज होने के बाद हाईकोर्ट ने करनी विहार और सोडाला थाना प्रभारियों को अनिता जैन तथा आर.एस. राघव को आगे के आदेश तक सुरक्षा देने के आदेश दिए थे।
साथ ही जयपुर पुलिस कमिश्नर को आदेश की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए कहा था।
न आदेश बदला, न वापस हुआ
अवमानना याचिका में आर.एस. राघव ने आरोप लगाया है कि 20 अगस्त 2015 का सुरक्षा संबंधी आदेश बाद में न तो संशोधित किया गया और न ही वापस लिया गया।
इसके बावजूद पुलिस कमिश्नर द्वारा उन्हें उपलब्ध कराई जा रही सुरक्षा वापस ले ली गई।
याचिका में इसे हाईकोर्ट के आदेश की कथित अवहेलना बताते हुए कहा गया है कि आदेश की अनुपालना सुनिश्चित करना पुलिस कमिश्नर की जिम्मेदारी थी।
5 जून को अभ्यावेदन, फिर भी सुरक्षा बहाल नहीं होने का आरोप
अधिवक्ता विरेन्द्र गोदारा और राकेश मीणा ने पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि सुरक्षा हटाए जाने के बाद अधिवक्ता राघव ने 5 जून 2026 को जयपुर पुलिस कमिश्नर के समक्ष अभ्यावेदन दिया और हाईकोर्ट के आदेश की अनुपालना बहाल करने की मांग की।
अभ्यावेदन के बावजूद उनकी सुरक्षा बहाल नहीं की गई।
याचिकाकर्ता का कहना है कि जिस खतरे के मद्देनजर हाईकोर्ट ने सुरक्षा उपलब्ध कराने का आदेश दिया था, वह खतरा समाप्त नहीं हुआ है। इसलिए सुरक्षा हटाए जाने को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
6 अगस्त को भेजा गया था अवमानना नोटिस
सुरक्षा बहाल नहीं होने के बाद अधिवक्ता राघव की ओर से 6 अगस्त 2026 को जयपुर पुलिस कमिश्नर को अवमानना नोटिस भेजा गया था।
नोटिस में आरोप लगाया गया कि हाईकोर्ट के 20 अगस्त 2015 के आदेश को समाप्त या संशोधित कराए बिना सुरक्षा वापस लेना अदालत के आदेश की अवहेलना है।
नोटिस में सुरक्षा बहाल करने की मांग करते हुए चेतावनी दी गई थी कि अनुपालना नहीं होने पर कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जानबूझकर आदेश की अवहेलना का आरोप
अवमानना याचिका में पुलिस कमिश्नर पर आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी होने के बावजूद सुरक्षा वापस ली गई।
याचिकाकर्ता ने इसे सिविल अवमानना बताते हुए कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971 की धारा 12 के तहत कार्रवाई की मांग की है।
याचिका में कहा गया है कि अदालत के आदेश का जानबूझकर पालन नहीं करना सिविल अवमानना की श्रेणी में आता है और संबंधित अधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब 2 सितंबर को पेश करना होगा जवाब
हाईकोर्ट द्वारा प्रथमदृष्टया अवमानना का आधार मानते हुए नोटिस जारी किए जाने के बाद अब 2 सितंबर 2026 की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।
इस दिन जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल को अदालत के समक्ष अपना जवाब पेश करना होगा।