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पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव जोगाराम, जिला कलेक्टर टोंक सहित 6 अधिकारियों को हाईकोर्ट का अवमानना नोटिस

Rajasthan High Court Issues Contempt Notice to Panchayati Raj Principal Secretary, Tonk Collector and Others

हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद नटवाड़ा ग्राम पंचायत प्रशासक नीता कंवर को कार्यभार नहीं देने का आरोप

जयपुर। राजस्थान के टोंक जिले की नटवाड़ा ग्राम पंचायत की निवर्तमान प्रशासक नीता कंवर को राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा प्रशासक पद से हटाने पर लगाई रोक और पुनः पद पर कार्य जारी रखने के आदेश की पालना नहीं करने पर हाईकोर्ट ने अवमानना के नोटिस जारी किए हैं।

निवर्तमान प्रशासक नीता कंवर द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव जोगाराम, टोंक जिला कलेक्टर कल्पना अग्रवाल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद टोंक परशुराम धानका और आरएएस अधिकारी त्रिलोक मीणा को अवमानना नोटिस जारी किए हैं।

हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों नहीं उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए।

जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश नीता कंवर की अवमानना याचिका पर दिया है।

क्या है मामला

पंचायती राज विभाग ने दिनांक 19.02.2026 को आदेश जारी कर नीता कंवर को ग्राम पंचायत नटवाड़ा, पंचायत समिति निवाई, जिला टोंक के प्रशासक पद से हटा दिया था।

इस आदेश को चुनौती देते हुए नीता कंवर ने अधिवक्ता बलराम जाखड़ और राजीव सोगरवाल के जरिए राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी।

याचिका में यह तर्क दिया गया कि हटाने का आदेश राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 38 तथा राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 22 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना पारित किया गया है।

हाईकोर्ट ने 27 जनवरी को याचिका पर सुनवाई करते हुए पंचायत राज विभाग द्वारा 19 फरवरी 2026 को जारी किए गए उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके तहत उन्हें प्रशासक पद से हटाया गया था।

इसके साथ ही राज्य सरकार को आदेश दिया कि याचिकाकर्ता को पुनः प्रशासक पद पर कार्य जारी रखने दिया जाए।

कोर्ट आदेश की पालना नहीं होने पर नीता कंवर की ओर से अवमानना याचिका दायर की गई।

याचिका में दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता बलराम जाखड़ ने न्यायालय में पक्ष रखते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने पूर्व में इस मामले में स्पष्ट निर्देश जारी किए थे, लेकिन इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने आदेशों की अनदेखी की।

अधिवक्ता ने दलील दी कि कोर्ट के आदेशों का पालन न करना सीधे-सीधे न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है और यह न्याय व्यवस्था की गंभीरता को भी प्रभावित करता है।

अधिवक्ता ने यह भी कहा कि जब किसी मामले में हाईकोर्ट आदेश जारी करता है तो उसका पालन करना प्रशासनिक अधिकारियों की संवैधानिक जिम्मेदारी होती है। यदि अधिकारी न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करते हैं तो इससे आम नागरिकों का न्यायपालिका पर भरोसा प्रभावित होता है।

हाईकोर्ट ने जारी किए नोटिस

बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए सरकार को भी नोटिस जारी किया है और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जवाब मांगा है।

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