जयपुर। राजस्थान के न्यायिक इतिहास में 31 जनवरी एक अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि के रूप में दर्ज है। इसी दिन वर्ष 1977 में राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ की विधिवत स्थापना हुई थी।
31 जनवरी 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ और हाईकोर्ट बार जयपुर अपनी स्थापना के 49 वर्ष पूर्ण कर 50 वें स्थापना वर्ष में प्रवेश कर रही है।
इस ऐतिहासिक अवसर पर राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ और राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर द्वारा भव्य स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया जा रहा है। समारोह को लेकर न्यायिक, प्रशासनिक और अधिवक्ता स्तर पर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
सूत्रों के अनुसार प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी इस गरिमामयी आयोजन में शिरकत कर सकते हैं।
डायमंड जुबली वर्ष में प्रवेश
यह वर्ष इसलिए भी विशेष है क्योंकि राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर दोनों ही अपने डायमंड जुबली वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं।
स्थापना दिवस समारोह के साथ-साथ बार एसोसिएशन की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी का शपथग्रहण समारोह भी इसी अवसर पर आयोजित किया जाएगा, जिससे कार्यक्रम का महत्व और बढ़ जाता है।
राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ का यह समारोह हाईकोर्ट परिसर फ्रंट लॉन में आयोजित होगा.

बार एसोसिएशन का शपथग्रहण समारोह
12 दिसंबर को संपन्न हुए राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर के चुनावों में अधिवक्ताओं ने नई कार्यकारिणी को चुना। इस चुनाव में वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव सोगरवाल अध्यक्ष और दीपेश शर्मा महासचिव निर्वाचित हुए। यह दोनों पदाधिकारी क्रमशः बार एसोसिएशन के 42वें अध्यक्ष और महासचिव बने हैं।
नई कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष: अनुराग कलवाटिया, सुनील शर्मा, कोषाध्यक्ष: प्रीति शर्मा, पुस्तकालय सचिव: बॉबी दत्ता, संयुक्त सचिव: हिमांशी मीणा, सोशल सचिव: उपासना आर्य साथ ही कार्यकारिणी सदस्य के रूप में कुलदीप शर्मा, अनुश्री अग्रवाल, शुभम जैन, सौरभ तिवारी, अजयसिंह राजावत, नरेंद्र पारीक, दुष्यंत सिंह नरूका और देवेंद्र शर्मा शपथ लेंगे।
जयपुर पीठ का गठन: आज़ादी के बाद की न्यायिक पुनर्रचना
भारत की आज़ादी के बाद देश के प्रशासनिक और न्यायिक ढांचे के पुनर्गठन की आवश्यकता पड़ी। वर्ष 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम लागू हुआ, जिसके तहत राजस्थान का वर्तमान स्वरूप अस्तित्व में आया। इसी अधिनियम की धारा 50 के अंतर्गत राजस्थान के लिए एक स्वतंत्र हाईकोर्ट की स्थापना का प्रावधान किया गया।
इस प्रक्रिया में जोधपुर को न्यायिक राजधानी के रूप में स्वीकार किया गया और वहीं राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्य पीठ की स्थापना की गई। इसके परिणामस्वरूप 22 मई 1950 को उदयपुर में कार्यरत हाईकोर्ट पीठ, 14 जुलाई 1958 को जयपुर में कार्यरत हाईकोर्ट पीठ को समाप्त कर दिया गया।
जयपुर में अस्थायी पीठ और फिर समाप्ति
हालांकि 1 नवंबर 1956 से भारत सरकार ने जयपुर में एक अस्थायी पीठ स्थापित करने के आदेश जारी किए थे, लेकिन यह व्यवस्था स्थायी नहीं रही।
10–11 जुलाई 1957 को केंद्र सरकार द्वारा गठित एक समिति ने जयपुर की अस्थायी पीठ को समाप्त करने की सिफारिश की। इस सिफारिश के आधार पर वर्ष 1958 में जयपुर पीठ को समाप्त कर दिया गया।
यह निर्णय जयपुर और आसपास के क्षेत्रों में गहरे असंतोष का कारण बना।
संघर्ष का दौर: जब न्याय के लिए आंदोलन हुआ
जयपुर में हाईकोर्ट पीठ की समाप्ति के बाद अधिवक्ता समुदाय, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक नेतृत्व ने मिलकर पुनः पीठ की स्थापना की मांग को लेकर संघर्ष शुरू किया।
उदयपुर और कोटा में भी पीठ की मांग उठी, लेकिन समय के साथ वे आंदोलन कमजोर पड़ गए। वहीं जयपुर में यह मांग जन आंदोलन का रूप ले चुकी थी।
अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार किया, धरना-प्रदर्शन किए, जुलूस निकाले, कई बार उग्र आंदोलन भी हुए, इस दौरान अनेक अधिवक्ताओं को जेल भी जाना पड़ा।
1976: संघर्ष का निर्णय
लगभग दो दशकों तक चले आंदोलन के बाद 8 दिसंबर 1976 को एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। भारत के राष्ट्रपति ने राजस्थान के राज्यपाल और तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद राज्य पुनर्गठन अधिनियम की धारा 51 के तहत जयपुर पीठ की स्थापना की घोषणा की।
राष्ट्रपति के आदेश के बाद राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पीठ स्थापित करने का अधिकार दिया गया।
31 जनवरी 1977: ऐतिहासिक दिन
लगभग एक माह की प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद 31 जनवरी 1977 को आपातकाल के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने विधिवत रूप से कार्य करना शुरू किया।
शुरुआती दौर में केवल 6 न्यायाधीश 356 अधिवक्ता कार्यरत थे। संसाधनों की भारी कमी थी
न्यायाधीशों के पास वाहन तक उपलब्ध नहीं थे आधारभूत सुविधाएं सीमित थीं इसके बावजूद न्यायिक कार्य पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ किया गया।
इसी दिन गठित हुई बार एसोसिएशन
31 जनवरी 1977 को ही अधिवक्ताओं के संगठन के रूप में राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर का गठन किया गया। यह संगठन आगे चलकर न केवल अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा बल्कि न्यायिक सुधारों और लोकतांत्रिक आंदोलनों का भी केंद्र बना।
देश को मिले कई दिग्गज
जयपुर हाईकोर्ट बार और पीठ ने देश को अनेक न्यायिक और राजनीतिक हस्तियां दी हैं। राजधानी में होने वाले अधिकांश राजनीतिक और संवैधानिक आंदोलनों के कारण जयपुर पीठ के अधिवक्ताओं की सक्रिय भूमिका रही।
इसी बार से निकले प्रमुख नाम
जगदीप धनखड़ (भारत के उपराष्ट्रपति, वर्ष 1987 में बार अध्यक्ष)
जस्टिस अजय रस्तोगी (सेवानिवृत्त, सुप्रीम कोर्ट)
जस्टिस मोहम्मद रफीक (पूर्व मुख्य न्यायाधीश, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट)
जस्टिस आर.एस. चौहान (पूर्व मुख्य न्यायाधीश, तेलंगाना हाईकोर्ट)
जस्टिस मनीष भंडारी (चेयरमैन, SAFEMA)
इसके अतिरिक्त अनेक न्यायाधीश राजस्थान, विभिन्न हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सेवाएं दे चुके हैं।
जयपुर बार की उपस्थिति
वर्तमान में राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में कार्यरत कई न्यायाधीश जयपुर बार के सदस्य रह चुके हैं, जिनमें—
जस्टिस इन्द्रजीत सिंह, जस्टिस महेन्द्र गोयल, जस्टिस सुदेश बंसल, जस्टिस समीर जैन, जस्टिस अनूप ढंड, जस्टिस गणेश मीणा और जस्टिस अनिल उपमन प्रमुख हैं।
50वें वर्ष में प्रवेश: अतीत, वर्तमान और भविष्य
जयपुर पीठ केवल एक न्यायिक संस्थान नहीं, बल्कि लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ बन चुकी है। ई-कोर्ट, डिजिटल फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई और त्वरित न्याय की दिशा में जयपुर पीठ ने उल्लेखनीय प्रगति की है।
50वें स्थापना वर्ष में प्रवेश का यह अवसर संघर्षों को स्मरण करने संस्थान की उपलब्धियों को सम्मान देने और भविष्य की न्यायिक चुनौतियों के लिए संकल्प लेने का प्रतीक है।