रामगढ़ बांध क्षेत्र में अतिक्रमण पर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त, कहा- मीडिया निभाए निगरानी की जिम्मेदारी, अतिक्रमियों की सूची अब अखबारों में होगी प्रकाशित
जयपुर। रामगढ़ बांध के जलग्रहण क्षेत्र में बढ़ते अतिक्रमण को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने अतिक्रमियों की सूची राज्य के अखबारों में प्रकाशित करने के आदेश दिए हैं।
इसके साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट ने मीडिया के सहयोग को लेकर भी बड़ी बात की हैं।
मीडिया और पत्रकारों को भी निभानी होगी भूमिका
राजस्थान हाईकोर्ट ने अतिक्रमण के मामलों में मीडिया और पत्रकारों की अहम भूमिका बताते हुए कहा कि मीडिया और पत्रकारों को भी सार्वजनिक हित में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि मीडिया और पत्रकार जनता की “आंख और कान” हैं।
इसलिए यह सुनिश्चित करने में उनकी भी भूमिका है कि जलग्रहण क्षेत्र में दोबारा अतिक्रमण न हो। यदि मीडिया या पत्रकारों को कहीं अतिक्रमण दिखाई देता है तो वे इसकी सूचना जयपुर कलेक्टर को दे सकते हैं।
हाईकोर्ट ने प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों और मीडिया को भी रामगढ़ बांध के जलग्रहण क्षेत्र को अतिक्रमण-मुक्त रखने की जिम्मेदारी से जोड़ा है।
हाईकोर्ट ने मीडिया और पत्रकारों को भी सार्वजनिक हित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला बताया है।
हाईकोर्ट ने प्रशासन को भी आदेश दिया हैं कि मीडिया से मिली सूचना का सत्यापन कर सही पाए जाने पर तत्काल कानूनी कार्रवाई करनी होगी।
यह आदेश खंडपीठ ने स्वप्रेरणा से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने दिया हैं।
सुनवाई के दौरान न्यायमित्र डॉ अभिनव शर्मा, डॉ गणेश परिहार, मुस्कान वर्मा सहित कई अधिवक्ताओं ने पैरवी की.
रामगढ़ बांध की ओर बहने वाले जलप्रवाह क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण
कोर्ट ने 30 जुलाई 2026 को दिए अपने पूर्व निर्देशों की पालना में जिला कलेक्टर की ओर से पेश किए गए शपथपत्र और दस्तावेजों का अवलोकन किया।
इसमें रामगढ़ बांध की ओर पानी के प्रवाह वाले नदी-नालों के जलग्रहण क्षेत्र में मौजूद अतिक्रमणों की सूची पेश की गई थी। सूची में अतिक्रमण करने वाले लोगों के नाम भी शामिल हैं।
कोर्ट ने पाया कि अंधी, जमवारामगढ़, आमेर, शाहपुरा और विराटनगर तहसीलों में बड़ी संख्या में अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं।
खंडपीठ ने यह भी दर्ज किया कि कई स्थानों पर अतिक्रमियों ने सरकारी जमीन और नदी के बहाव क्षेत्र में खेती शुरू कर दी है, जबकि कई जगह नालों को भरकर उनके प्राकृतिक जलप्रवाह का रास्ता ही बदल दिया गया है। कोर्ट ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया।
कब्जा करने वालों को दो टूक
हाईकोर्ट ने कहा कि जिन जमीनों की प्रकृति गैर मुमकिन नाला, गैर मुमकिन पहाड़, चारागाह, नदी या इसी प्रकार की है और जो संबंधित नदियों के प्रत्यक्ष जलग्रहण क्षेत्र अथवा रामगढ़ बांध की ओर पानी के बहाव में आती हैं, उन पर अतिक्रमण करने वालों के पास कब्जा बनाए रखने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
कोर्ट ने ऐसे लोगों को सरकारी भूमि पर अतिक्रमणकारी माना और स्पष्ट किया कि चिन्हित अतिक्रमणों को हटाना आवश्यक है।
अतिक्रमियों की सूची अब अखबारों में होगी प्रकाशित
अतिक्रमियों की संख्या अधिक होने के कारण प्रत्येक व्यक्ति को अलग-अलग नोटिस देने में लगने वाले समय को देखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण रास्ता निकाला है।
कोर्ट ने आदेश दिया कि जिला कलेक्टर के शपथपत्र के साथ संलग्न अतिक्रमियों की सूची को संबंधित राजस्व गांवों और तहसीलों के संबंध में ‘राजस्थान पत्रिका’ और ‘दैनिक भास्कर’ में सामान्य प्रकाशन के जरिए प्रकाशित किया जाए।
कोर्ट ने माना कि इससे अतिक्रमियों को कार्रवाई की जानकारी मिल जाएगी और बाद में यह बहाना नहीं बनाया जा सकेगा कि उन्हें कार्रवाई या सुनवाई का अवसर नहीं मिला।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार अतिक्रमियों को कम से कम 15 दिन का समय दिया जाना आवश्यक है, ताकि वे अपने स्तर पर अतिक्रमण हटा सकें।
कब्जा नहीं हटाया तो सरकार खुद हटाएगी, खर्च भी अतिक्रमी देगा
हाईकोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी कि सार्वजनिक सूचना के बावजूद यदि अतिक्रमण नहीं हटाया जाता है तो राज्य सरकार और उसके अधिकारी तुरंत अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करेंगे।
अतिक्रमण हटाने में सरकार और उसके अधिकारियों को जो भी खर्च आएगा, वह संबंधित अतिक्रमी से वसूल किया जाएगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कहीं बड़े पैमाने पर अतिक्रमण पाया जाता है या कार्रवाई का विरोध किया जाता है तो राज्य और उसके अधिकारी पुलिस सहायता लेने तथा सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण के लिए आपराधिक मामला दर्ज करने सहित उचित कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं।
कोर्ट ने दो टूक कहा कि कानून का शासन कायम रहना चाहिए और सूची में दर्ज सभी अतिक्रमण हटाने होंगे।
पहले नोटिस वाले मामलों में कार्रवाई जारी
सुनवाई के दौरान राज्य के महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कोर्ट को बताया कि जिन अतिक्रमियों को पहले ही नोटिस दिए जा चुके हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई जारी है।
इन मामलों में राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 91 और जयपुर विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1982 की धारा 72 के तहत कार्रवाई की जा रही है।
जिला कलेक्टर के शपथपत्र में उन स्थानों की रिपोर्ट भी शामिल की गई है जहां संबंधित तहसीलदारों और राजस्व अधिकारियों ने अतिक्रमण हटाया है।
आम नागरिक भी दे सकेंगे अतिक्रमण की जानकारी
सुनवाई के दौरान न्याय मित्र ने सुझाव दिया कि स्थानीय नागरिकों को भी अपने क्षेत्रों में मौजूद अतिक्रमण की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाने की अनुमति दी जानी चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि यदि जिला कलेक्टर को किसी अतिक्रमण की जानकारी मिलती है, तो उस सूचना का सत्यापन कराया जाएगा। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित अतिक्रमण के खिलाफ भी इसी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई शुरू की जाएगी।
15 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 15 सितंबर 2026 को सूचीबद्ध किया है। तब तक प्रशासन को कोर्ट के निर्देशों के अनुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई आगे बढ़ानी होगी।
रामगढ़ बांध के जलग्रहण क्षेत्र को लेकर हाईकोर्ट का यह आदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कोर्ट ने एक साथ अतिक्रमियों की सूची सार्वजनिक करने, 15 दिन का अवसर देने, कब्जा नहीं हटाने पर तत्काल कार्रवाई करने, कार्रवाई का खर्च अतिक्रमी से वसूलने, जरूरत पड़ने पर पुलिस सहायता और आपराधिक कार्रवाई करने तथा नागरिकों और मीडिया से अतिक्रमण की सूचना प्राप्त करने की व्यवस्था स्पष्ट की है।