जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर शहर में तय समय के बाद भी शराब बिक्री जारी रहने और कथित “इमरजेंसी विंडो” के जरिए नियमों की अनदेखी किए जाने पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया है।
डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और डॉ. जस्टिस नुपुर भाटी की खंडपीठ ने कहा कि यदि लाइसेंस शर्तों और आबकारी नियमों के बावजूद देर रात तक शराब बिक्री जारी रहती है, तो यह केवल नियम उल्लंघन नहीं बल्कि प्रशासनिक विफलता और सार्वजनिक हित से जुड़ा गंभीर मामला है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस, आबकारी विभाग और जिला प्रशासन को संयुक्त कार्रवाई के निर्देश देते हुए स्पेशल एन्फोर्समेंट टीम गठित करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि नियमों का पालन सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है और इसे केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
यह मामला एक मीडिया रिपोर्ट में प्रकाशित एक स्टिंग रिपोर्ट के बाद सामने आया, जिसमें दावा किया गया था कि जोधपुर में कई शराब दुकानों पर रात 8 बजे के बाद भी गुप्त तरीके से शराब बेची जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट के बाद हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि शहर की कई शराब दुकानों पर निर्धारित समय के बाद भी बिक्री जारी रहती है।
रिपोर्ट के मुताबिक दुकानों के मुख्य शटर बंद कर दिए जाते थे, लेकिन अंदर से छोटे रास्तों या कथित “इमरजेंसी विंडो” के जरिए ग्राहकों को शराब दी जाती थी और देर रात तक बिक्री का सिलसिला चलता रहता था।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई जगह ग्राहकों को तय समय के बाद अधिक कीमत पर शराब बेची जा रही थी।
हाईकोर्ट ने इन आरोपों को गंभीर मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया और कहा कि यदि ऐसी गतिविधियां वास्तव में हो रही हैं, तो यह आबकारी नियमों और लाइसेंस शर्तों का खुला उल्लंघन है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि शराब दुकानों के संचालन समय तय करने के पीछे स्पष्ट सार्वजनिक उद्देश्य होता है।
अदालत ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना, देर रात होने वाली अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना और सार्वजनिक शांति बनाए रखना इन नियमों का मुख्य उद्देश्य है। कोर्ट ने कहा कि यदि दुकानों के शटर बंद होने के बाद भी शराब बिक्री जारी रहती है, तो यह प्रशासनिक नियंत्रण पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
खंडपीठ ने यह भी कहा कि शराब कारोबार से जुड़े लाइसेंस धारकों को यह समझना होगा कि लाइसेंस एक अधिकार नहीं बल्कि शर्तों के साथ दी गई अनुमति है।
स्पेशल एन्फोर्समेंट टीम बनाने के आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पेशल एन्फोर्समेंट टीम गठित करने के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि पुलिस, आबकारी विभाग, नगर प्रशासन और अन्य संबंधित एजेंसियां मिलकर निगरानी और कार्रवाई करें।
कोर्ट ने माना कि अलग-अलग विभागों की बिखरी हुई कार्रवाई से इस तरह की गतिविधियों पर प्रभावी रोक नहीं लगाई जा सकती।
कोर्ट ने यह भी कहा कि संयुक्त टीम नियमित निरीक्षण करे और यह सुनिश्चित करे कि निर्धारित समय के बाद कोई बिक्री न हो।
पुलिस और आबकारी विभाग से जवाब तलब
हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नर, जिला प्रशासन और आबकारी अधिकारियों से जवाब मांगा कि यदि नियम पहले से मौजूद हैं तो उनका पालन क्यों नहीं हो रहा और देर रात शराब बिक्री की शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई।
कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या संबंधित अधिकारियों ने नियमित निरीक्षण किए, लाइसेंस धारकों पर कार्रवाई की या नियम उल्लंघन के मामलों में कोई दंडात्मक कदम उठाया।
कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि नियमों के बावजूद खुलेआम उल्लंघन हो रहा है, तो जवाबदेही तय करना जरूरी होगा।
“कानून का पालन केवल आम लोगों के लिए नहीं“
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा कि कानून का पालन केवल आम नागरिकों के लिए नहीं बल्कि लाइसेंस धारकों और कारोबारियों के लिए भी समान रूप से जरूरी है।
कोर्ट ने कहा कि यदि किसी कारोबारी को लाइसेंस दिया गया है, तो उसे शर्तों का पूरी तरह पालन करना होगा, अन्यथा प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि यदि देर रात तक शराब बिक्री जारी रहती है, तो इससे अपराध, सार्वजनिक अव्यवस्था, सड़क हादसे और सामाजिक समस्याएं बढ़ सकती हैं।
“नियमों का पालन सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी“
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी केवल शराब लाइसेंस जारी करने तक सीमित नहीं है।
अदालत ने कहा कि लाइसेंस शर्तों का पालन सुनिश्चित करना, तय समय सीमा का पालन कराना और अवैध बिक्री रोकना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
कोर्ट ने कहा कि यदि निर्धारित समय के बाद भी खुलेआम शराब बिक रही है, तो यह निगरानी तंत्र की कमजोरी को दर्शाता है।
अदालत ने यह भी कहा कि कानून का पालन केवल आम नागरिकों के लिए नहीं बल्कि लाइसेंस धारकों के लिए भी समान रूप से जरूरी है।
तकनीकी निगरानी और नियमित जांच पर जोर
राजस्थान हाईकोर्ट ने तकनीकी निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि सीसीटीवी निगरानी, नियमित निरीक्षण, संयुक्त जांच अभियान और रिकॉर्ड आधारित मॉनिटरिंग के जरिए नियमों का बेहतर पालन सुनिश्चित किया जा सकता है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि शराब दुकानों के संचालन समय और बिक्री गतिविधियों की नियमित समीक्षा की जानी चाहिए।
अदालत ने संकेत दिया कि यदि तकनीकी निगरानी मजबूत की जाए तो इस तरह के उल्लंघनों को शुरुआती स्तर पर ही पकड़ा जा सकता है।
क्यों अहम है हाईकोर्ट का फैसला?
राजस्थान हाईकोर्ट का यह स्वतः संज्ञान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अदालत ने शराब बिक्री नियमों को केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं बल्कि सार्वजनिक हित और कानून व्यवस्था से जोड़कर देखा है।
यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही, आबकारी निगरानी और लाइसेंस नियमों के पालन से जुड़े बड़े सवाल उठाता है।
राजस्थान में पहले भी शराब दुकानों के समय और अवैध बिक्री को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। लेकिन इस बार हाईकोर्ट का सीधे हस्तक्षेप करना प्रशासन पर अतिरिक्त दबाव डालने वाला कदम माना जा रहा है।
कोर्ट ने इस मामले के जरिए साफ संदेश दिया है कि नियमों की अनदेखी कर कारोबार नहीं चलाया जा सकता। यदि निर्धारित समय और लाइसेंस शर्तों का पालन नहीं कराया गया, तो इसका असर सीधे कानून व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा पर पड़ता है।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब राज्य सरकार, पुलिस और आबकारी विभाग को हाईकोर्ट के सामने विस्तृत जवाब और कार्रवाई रिपोर्ट पेश करनी होगी।