कोर्ट की कड़ी टिप्पणी-भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट से निजता और प्रतिष्ठा को नुकसान, यह संविधान के अनुच्छेद 21 के अधिकारों का उल्लंघन है।
REPORTABLE JUDGEMENT, जयपुर। सोशल मीडिया पर झूठी और भ्रामक जानकारी पोस्ट करना किसी व्यक्ति की गरिमा और निजता पर सीधा हमला है और यह संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा।
राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने एक महत्वपूर्ण और सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति के बारे में झूठी जानकारी फैलाई जाती है, जिससे उसकी प्रतिष्ठा या निजी जीवन प्रभावित होता है, तो यह गंभीर कानूनी उल्लंघन है।
जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने एक नाबालिग बच्ची की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अहम आदेश दिया।
कोर्ट ने फेसबुक की मूल कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म इंक. को आदेश दिया कि वह सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई उस भ्रामक पोस्ट और तस्वीरों को तुरंत हटाए, जिसमें बच्ची को लापता बताया गया था और उसे ढूंढने पर एक लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की गई थी।
क्या है पूरा मामला
यह मामला जयपुर की रहने वाली सात वर्षीय बच्ची से जुड़ा है। नाबालिग बच्ची ने अपनी मां के माध्यम से राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सुरक्षा और राहत की मांग की थी।
याचिका में बताया गया कि बच्ची की मां की शादी वर्ष 2010 में हुई थी और वर्ष 2013 में बेटी का जन्म हुआ। इसके बाद वर्ष 2015 में पिता का निधन हो गया और तब से बच्ची अपनी मां के साथ जयपुर में रह रही है।
याचिका के अनुसार, बच्ची के दादा-दादी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक पोस्ट डाल दी, जिसमें यह दावा किया गया कि उनकी पोती अहमदाबाद से लापता हो गई है और जो कोई भी उसे ढूंढेगा, उसे एक लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा।
इस पोस्ट के वायरल होते ही कई अज्ञात और अनजान लोग बच्ची के घर पहुंचने लगे और उसके बारे में पूछताछ करने लगे। इससे बच्ची और उसकी मां की सुरक्षा तथा निजी जीवन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया।
इसी वजह से बच्ची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और सोशल मीडिया पर डाली गई इस पोस्ट को हटाने और सुरक्षा देने की मांग की।
दादा-दादी ने क्या कहा
मामले की सुनवाई के दौरान दादा-दादी की ओर से कोर्ट में यह दलील दी गई कि उन्होंने ऐसी कोई पोस्ट फेसबुक पर नहीं डाली है।
उनके वकील ने कहा कि बच्ची की दादी का निधन हो चुका है और दादा की उम्र लगभग 70 वर्ष है। इसलिए उन्होंने न तो फेसबुक पर ऐसी कोई पोस्ट डाली और न ही किसी को इनाम देने की घोषणा की।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि याचिका केवल उन्हें परेशान करने के लिए दाखिल की गई है और इसमें अदालत को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
कोर्ट ने क्या पाया
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
हाईकोर्ट ने पाया कि बच्ची अपनी मां के साथ जयपुर में रह रही है और वह कहीं भी लापता नहीं है। इतना ही नहीं, इस संबंध में किसी भी पुलिस थाने में मिसिंग पर्सन रिपोर्ट (MPR) भी दर्ज नहीं कराई गई थी।
इसके बावजूद फेसबुक पर यह पोस्ट मौजूद थी कि बच्ची लापता है और उसे ढूंढने वाले को इनाम दिया जाएगा।
कोर्ट ने कहा कि इस तरह की पोस्ट किसी व्यक्ति की निजता, गरिमा और प्रतिष्ठा पर सीधा हमला करती है। यह संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत मिलने वाले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
सोशल मीडिया पर सख्त टिप्पणी
इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी पर भी गंभीर टिप्पणी की।
कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों के प्लेटफॉर्म पर कई बार ऐसी सामग्री पोस्ट हो जाती है जो किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और निजता को नुकसान पहुंचाती है।
हाईकोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और किसी व्यक्ति की गरिमा के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए मजबूत कानूनी ढांचा, तकनीकी उपाय और डिजिटल जागरूकता बेहद जरूरी है, ताकि गलत सूचना और भ्रामक पोस्ट को रोका जा सके और एक सुरक्षित ऑनलाइन वातावरण बनाया जा सके।
आईटी नियमों का भी किया उल्लेख
फैसले में अदालत ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और आईटी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 का भी विस्तृत उल्लेख किया।
कोर्ट ने कहा कि इन नियमों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होता है कि उनके प्लेटफॉर्म पर ऐसी कोई सामग्री पोस्ट न हो जो झूठी या भ्रामक हो और किसी की निजता का उल्लंघन करती हो या मानहानि या उत्पीड़न का कारण बनती हो।
इसके अलावा यदि किसी कोर्ट या सरकारी एजेंसी द्वारा आदेश दिया जाता है तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ऐसी सामग्री को निर्धारित समय के भीतर हटाना भी जरूरी है।
फेसबुक की मूल कंपनी मेटा को आदेश
सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि फेसबुक की मूल कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म इंक. इस मामले में तत्काल कार्रवाई करे।
कोर्ट ने आदेश दिया कि फेसबुक पर मौजूद वह पोस्ट और तस्वीरें, जिनमें बच्ची को लापता बताया गया है, तुरंत ब्लॉक या हटाई जाएं।
इसके साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि इस आदेश की प्रति मेटा कंपनी के भारत स्थित पंजीकृत कार्यालय को भी भेजी जाए ताकि इस मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा सके।