उच्च स्तर की पारदर्शिता के लिए आर्मी हॉस्पिटल का विशेष मेडिकल बोर्ड करेगा मेडिकल परीक्षण
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने SSC SI भर्ती-2019 से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में अभ्यर्थियों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन याचिकाकर्ताओं को पूर्व में डिटेल्ड मेडिकल एग्जामिनेशन (DME) एवं रिव्यू मेडिकल एग्जामिनेशन (RME) में अनफिट घोषित किया गया था, उनका पुनः मेडिकल परीक्षण किया जाए।
हाईकोर्ट ने अपने ये आदेश उस स्थिति में दिया जब रिकॉर्ड पर यह सामने आया कि मेडिकल बोर्डों द्वारा दी गई रिपोर्टों में गंभीर विसंगतियां और परस्पर विरोधाभास मौजूद थे।
हाईकोर्ट ने माना कि एक ही अभ्यर्थी को DME और RME में अलग-अलग कारणों से अनफिट घोषित किया जाना प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़ा करता है।
जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश Saurabh Singh Sanket व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए हैं।
क्या है मामला
यह पूरा मामला SSC द्वारा आयोजित सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा-2019 से संबंधित है, जिसमें अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा और शारीरिक दक्षता परीक्षण सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर लिए थे, लेकिन मेडिकल चरण में उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया।
अधिवक्ता Tribhuvan Narayan Singh ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें DME में जिन कारणों से अनफिट बताया गया, वही कारण RME में बदल गए, जिससे उनकी उम्मीदवारी प्रभावित हुई।
अदालत के समक्ष यह भी तर्क रखा गया कि कई अभ्यर्थियों ने सरकारी अस्पतालों से जांच करवाई, जहां उन्हें फिट घोषित किया गया, जबकि भर्ती बोर्ड ने उन्हें अनफिट बताया।
इससे मेडिकल प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न हुआ। न्यायालय ने भी अपने आदेश में माना कि मेडिकल रिपोर्टों के बीच स्पष्ट अंतर और विरोधाभास मौजूद हैं, जिससे संपूर्ण प्रक्रिया पर प्रश्न उठता है।
हाईकोर्ट ने क्यों किया हस्तक्षेप
जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि सामान्यतः न्यायालय विशेषज्ञ मेडिकल राय में हस्तक्षेप नहीं करता, लेकिन इस मामले में परिस्थितियां असाधारण हैं। मेडिकल रिपोर्टों में असंगति और अभ्यर्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अदालत ने निष्पक्ष समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि सभी याचिकाकर्ताओं का पुनः विस्तृत मेडिकल परीक्षण कराया जाए। यह परीक्षण उच्च स्तर की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आर्मी हॉस्पिटल में गठित विशेष मेडिकल बोर्ड द्वारा किया जाएगा।
इस बोर्ड में संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ चिकित्सकों को शामिल किया जाएगा, जो प्रत्येक अभ्यर्थी की गहन जांच करेंगे।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस नए मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट अंतिम और बाध्यकारी होगी। यदि किसी अभ्यर्थी को इस परीक्षण में फिट पाया जाता है, तो उसे भर्ती प्रक्रिया के अगले चरणों में शामिल किया जाएगा और पात्रता होने पर नियुक्ति भी दी जाएगी।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि सभी अभ्यर्थियों को मेडिकल परीक्षण की सूचना कम से कम 7 दिन पूर्व दी जाए और पूरी प्रक्रिया 45 दिनों के भीतर पूरी की जाए।