जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है।
हाईकोर्ट ने रोडवेज में पदस्थापित आरएएस अधिकारी ज्योति चौहान को प्रक्रिया एवं कानूनी सिद्धांतों का समुचित प्रशिक्षण दिलाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट कहा कि प्रशिक्षण पूर्ण होने तक उन्हें कर्मचारियों (मानव संसाधन प्रबंधन) से जुड़े किसी भी कार्य से दूर रखा जाए।
जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता रोडवेज कर्मचारी प्रदीप गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया हैं.
बिना कारण निलंबन
याचिकाकर्ता प्रदीप गुप्ता, जो धौलपुर डिपो में कंडक्टर के पद पर कार्यरत थे, को 28 अक्टूबर 2025 को निलंबित कर दिया गया था।
RAS अधिकारी ज्योति चौहान ने याचिकाकर्ता प्रदीप गुप्ता को निलंबित किया था।
निलंबन आदेश में कोई ठोस कारण नहीं बताया गया, जिसके खिलाफ कर्मचारी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
मामले की प्रारंभिक सुनवाई में हाईकोर्ट ने 27 नवंबर 2025 को निर्देश दिए थे कि कार्यकारी निदेशक यातायात (EDT) के समक्ष याचिकाकर्ता अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत करे, और कार्यकारी निदेशक यातायात को 30 दिनों के भीतर उस पर निर्णय लेना होगा।
बिना कारण खारिज किया गया अभ्यावेदन
हाईकोर्ट के आदेशो की पालना में याचिकाकर्ता ने अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत किया।
हालांकि, कार्यकारी निदेशक यातायात ज्योति चौहान ने 16 जनवरी 2026 को निलंबन को सही ठहराते हुए अभ्यावेदन को खारिज कर दिया, लेकिन इस निर्णय के पीछे कोई कारण दर्ज नहीं किया।
हाईकोर्ट ने इसे गंभीर त्रुटि मानते हुए कहा कि बिना कारण बताए लिया गया निर्णय न केवल प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी: “प्रतिभा का पलायन”
सुनवाई के दौरान अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस प्रकार के निर्णय रोडवेज जैसे संस्थानों में “प्रतिभा के पलायन” को बढ़ावा देते हैं।
हाईकोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि प्रशासनिक अधिकारियों को अपने निर्णयों में विधिक प्रक्रिया और तर्कसंगतता का पालन करना अनिवार्य है।
हाईकोर्ट का आदेश
हाईकोर्ट ने कार्यकारी निदेशक यातायात ज्योति चौहान द्वारा 16 जनवरी 2026 को जारी किए गए आदेश को निरस्त करने का आदेश दिया.
हाईकोर्ट ने रोडवेज के प्रबंध निदेशक (MD) को निर्देश दिया गया कि वे कर्मचारी के अभ्यावेदन पर नए सिरे से, विधिसम्मत तरीके से निर्णय लें।
साथ ही हाईकोर्ट ने कार्मिक विभाग के प्रमुख शासन सचिव को निर्देश दिए गए कि RAS अधिकारी ज्योति चौहान को प्रक्रिया और कानूनी सिद्धांतों का प्रशिक्षण दिया जाए।
प्रशिक्षण पूरा होने तक अधिकारी को मानव संसाधन (HR) से जुड़े कार्यों से दूर रखा जाए।