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नोटिस की वैध सेवा पर हाईकोर्ट सख्त, कुल रिकवरी राशि का 10% जमा कराने की शर्त पर बैंक खाते डिफ्रीज करने के आदेश

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  • April 1, 2026
  • 7:55 pm

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया है कि केवल सरकारी पोर्टल पर नोटिस अपलोड कर देना, बिना ई-मेल, एसएमएस या डाक के माध्यम से उचित सूचना दिए, “वैध सेवा (Valid Service)” नहीं माना जा सकता।

राजस्थान हाईकोर्ट ने इस सिद्धांत को दोहराते हुए आधा दर्जन याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए बैंक खातों के डीफ्रीज (Defreeze) करने की सशर्त अनुमति दी है।

जस्टिस महेन्द्र कुमार गोयल और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने यह आदेश राकेश कुमार जैन व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए हैं।

मामला क्या है?

मामले के अनुसार, राज्य कर विभाग द्वारा याचिकाकर्ताओं के खिलाफ रिकवरी (वसूली) की कार्यवाही शुरू की गई थी।

याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि उन्हें किसी प्रकार का विधिवत नोटिस नहीं दिया गया।

विभाग ने नोटिस को केवल पोर्टल पर अपलोड कर दिया, लेकिन इसकी सूचना न तो ई-मेल के माध्यम से दी गई, न एसएमएस और न ही पंजीकृत डाक के जरिए।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि बिना उचित सेवा के उनके खिलाफ की गई कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है, क्योंकि उन्हें सुनवाई का अवसर ही नहीं दिया गया।

कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं?

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रियांशा गुप्ता ने दलील देते हुए कहा कि विभाग ने केवल पोर्टल पर नोटिस अपलोड किया।

याचिका में कहा गया कि किसी प्रकार की व्यक्तिगत सूचना (ईमेल/एसएमएस/डाक) नहीं दी गई। इस कारण उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिला। यह प्रक्रिया कानून के अनुरूप नहीं है।

अधिवक्ता ने पूर्व में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले M/s Lakshya Bricks & Another vs State of Rajasthan (2025) का हवाला भी दिया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि केवल पोर्टल पर नोटिस डालना पर्याप्त सेवा नहीं है।

दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) ने जवाब देने के लिए समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि—

“सिर्फ पोर्टल पर नोटिस अपलोड करना पर्याप्त सेवा नहीं है। प्रभावित पक्ष को वास्तविक और प्रभावी तरीके से सूचना मिलनी चाहिए, ताकि वह अपनी बात रख सके।”

कोर्ट ने यह भी माना कि यदि नोटिस की विधिवत सेवा नहीं हुई है, तो आगे की कार्यवाही पर सवाल उठता है और ऐसे मामलों में पुनः सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए।

पूर्व निर्णय का प्रभाव

कोर्ट ने अपने आदेश में 21 अगस्त 2025 को दिए गए Lakshya Bricks केस का उल्लेख करते हुए कहा कि उस फैसले में भी यही सिद्धांत स्थापित किया गया था कि पोर्टल पर नोटिस डालना मात्र औपचारिकता है, वास्तविक सेवा तभी मानी जाएगी जब प्रभावित व्यक्ति तक सूचना पहुंचे।

बैंक खातों पर रोक और राहत

मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी था कि विभाग ने याचिकाकर्ताओं के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया था। इससे उनके व्यावसायिक कार्य प्रभावित हो रहे थे।

कोर्ट ने इस पर याचिकाकर्ताओं के बैंक खाते सशर्त डीफ्रीज करने के आदेश दिए।

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को कुल रिकवरी राशि का 10% जमा कराने की शर्त पर बैंक खाते डिफ्रीज करने के आदेश दिए हैं।

REPORTABLE JUDGEMENT
M/s Rakesh Kumar Jain Versus State Of Rajasthan

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