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Rajasthan Highcourt का अहम फैसला : 7 वर्ष से कम सजा के मामलो में किशोर आरोपियों पर नहीं चलेगी ‘एडल्ट’ ट्रायल, छात्राओं से ब्लैकमेलिंग के आरोपियों का मामला भेजा किशोर न्यायालय को

Justice Anoop Kumar Dhand

जयपुर, 30 अक्टूबर 2025

Rajasthan Highcourt की जयपुर पीठ ने एक महत्वपूर्ण आदेश में यह स्पष्ट किया है कि जब किसी अपराध के लिए न्यूनतम सज़ा सात वर्ष से कम निर्धारित है, तो उसे “हेनियस अपराध” (Heinous Offence) की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

Rajasthan Highcourt ने कहा कि इसलिए, ऐसे मामलों में किशोर आरोपियों को वयस्क की तरह ट्रायल के लिए नहीं भेजा जा सकता।

Justice Anoop Kumar Dhand की एकलपीठ ने अजमेर की पॉक्सो अदालत संख्या-2 के आदेश को निरस्त करते हुए यह फैसला सुनाया।

यह मामला अजमेर में दो स्कूली छात्रों द्वारा एक छात्रा को न्यूड वीडियो से ब्लैकमेल करने से जुड़ा है, जिसके चलते छात्रा ने आत्महत्या कर ली थी।

Rajasthan Highcourt ने अपने रिपोर्टेबल जजमेंट में कहा —

“न्याय का अर्थ केवल सज़ा देना नहीं है, बल्कि सुधार और पुनर्वास के रास्ते को भी खोलना है। विशेषकर जब बात किशोरों की हो, तो न्यायालय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके साथ कानून के अनुरूप ही व्यवहार किया जाए।”

याचिकाकर्ताओं का पक्ष

याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि पॉक्सो एक्ट और आईपीसी की जिन धाराओं में आरोप लगाए गए हैं, उनमें कहीं भी सात वर्ष की न्यूनतम सज़ा निर्धारित नहीं है। इसलिए, यह मामला ‘हेनियस अपराध’ की श्रेणी में नहीं आता।

अधिवक्ता दुष्यंत सिंह नारुका और विनय पाल यादव ने कहा कि जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन) एक्ट, 2015 के तहत किसी नाबालिग को वयस्क की तरह ट्रायल करने की अनुमति तभी दी जा सकती है, जब अपराध की न्यूनतम सज़ा सात वर्ष या उससे अधिक हो।

इसके अलावा, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के “शिल्पा मित्तल बनाम एनसीटी दिल्ली (AIR 2020 SC 405)” मामले का हवाला देते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी स्पष्ट किया था कि यदि किसी अपराध में न्यूनतम सज़ा सात वर्ष से कम है या निर्धारित नहीं है, तो वह अपराध ‘हेनियस’ नहीं माना जा सकता।

राज्य सरकार का जवाब

राज्य सरकार की ओर से पीपी अमित पूनिया पीड़ित की ओर से अधिवक्ता फतेहराम मीणा ने यह तर्क दिया कि मामला गंभीर है और पीड़िता पर गहरा मानसिक प्रभाव पड़ा है। इसलिए अपराध को गंभीर श्रेणी में रखकर किशोरों का ट्रायल वयस्क की तरह किया जाना चाहिए।

गंभीर अपराध नहीं…

Rajasthan Highcourt ने अपने फैसले में कहा कि इन सभी धाराओं में न्यूनतम सात वर्ष की सज़ा का प्रावधान नहीं है। इसलिए, ये अपराध ‘हेनियस’ नहीं माने जाएंगे।

Rajasthan Highcourt ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के “शिल्पा मित्तल बनाम एनसीटी दिल्ली” (AIR 2020 SC 405) केस का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी अपराध में न्यूनतम सज़ा सात वर्ष से कम है या निर्धारित नहीं है, तो उसे ‘हेनियस’ नहीं माना जा सकता।

Rajasthan Highcourt ने कहा —

“जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2015 के तहत केवल उन्हीं अपराधों में किशोरों का ट्रायल वयस्क की तरह किया जा सकता है, जिनमें न्यूनतम सज़ा सात वर्ष या उससे अधिक हो, या जिन्हें ‘सीरियस ऑफेंस’ यानी गंभीर अपराध की श्रेणी में माना जाएगा।”

हाईकोर्ट ने स्पेशल जज, पॉक्सो कोर्ट, अजमेर द्वारा 16 जून 2025 को दिए गए आदेश को रद्द कर दिया और मामला जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड, अजमेर को वापस भेजने के निर्देश दिए, ताकि वहां किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा सके।

मामले की पृष्ठभूमि

अजमेर जिले के एक क्षेत्र में दो स्कूली छात्राओं के वीडियो और फोटो नग्न अवस्था में वायरल किए गए थे. पीड़ित दो छात्राओं में से एक ने शर्मिंदगी और मानसिक आघात के चलते आत्महत्या कर ली थी.

छात्रा की आत्महत्या के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर चार आरोपियों को नामजद किया.

चारों पर आईपीसी की धाराएँ — 376/511 (बलात्कार का प्रयास), 354A (महिला की मर्यादा का अपमान), 354D (स्टॉकिंग), 384 (ब्लैकमेलिंग), 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 120B (षड्यंत्र), साथ ही पॉक्सो एक्ट की धाराएँ 7/8, 11/12 और आईटी एक्ट की धारा 67A के तहत केस दर्ज किया गया था.

इन आरोपियों में से दो के नाबालिग होने के बावजूद, पीड़िता की आपत्तियों के आधार पर पॉक्सो कोर्ट, अजमेर ने उन्हें वयस्क मानते हुए ट्रायल के आदेश दिए थे।

इस आदेश को किशोरों की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

पीड़िता के अधिवक्ता की प्रतिक्रिया

पीड़िता की ओर से अधिवक्ता फतेहराम मीणा ने राजस्थान हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।
उन्होंने कहा —

“इस मामले में एक पीड़िता को आत्महत्या तक करनी पड़ी। यदि ऐसे मामलों में आरोपी किशोरों को वयस्क ट्रायल से छूट मिलती है, तो यह पीड़ित पक्ष के साथ अन्याय होगा।”

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