जयपुर। ऑनलाइन कैब सेवाओं ओला, उबर और रैपिडो के संचालन को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर बड़ा फैसला सामने आया है।
जयपुर महानगर तिपहिया वाहन चालक यूनियन की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा नए एग्रीगेटर नियम लागू किए जाने के बाद यह याचिका अब अप्रासंगिक (Infructuous) हो चुकी है।
राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर में जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जब सरकार इस विषय पर नया कानूनी ढांचा तैयार कर चुकी है, तब इस मामले में आगे सुनवाई करने की आवश्यकता नहीं रह जाती।
ऑटो चालकों की आजीविका का मुद्दा
यह जनहित याचिका जयपुर महानगर तिपहिया वाहन चालक यूनियन द्वारा दायर की गई थी।
यूनियन के अध्यक्ष कुलदीप सिंह के माध्यम से दायर इस याचिका में राज्य सरकार, परिवहन विभाग और ऑनलाइन कैब सेवा प्रदाता कंपनियों—उबर, ओला और रैपिडो—को पक्षकार बनाया गया था।
याचिका में कहा गया था कि ऑनलाइन एग्रीगेटर कंपनियों के तेजी से विस्तार के कारण पारंपरिक ऑटो और तिपहिया वाहन चालकों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
यूनियन का तर्क था कि बिना स्पष्ट और सख्त नियामक व्यवस्था के इन कंपनियों के संचालन से स्थानीय परिवहन व्यवस्था में असंतुलन पैदा हो रहा है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की थी कि ऑनलाइन कैब कंपनियों के संचालन और लाइसेंस व्यवस्था को स्पष्ट नियमों के तहत नियंत्रित किया जाए, ताकि पारंपरिक वाहन चालकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सरकार ने दी अहम जानकारी
मामले की सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष और राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस विषय पर राज्य सरकार पहले ही महत्वपूर्ण कदम उठा चुकी है।
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि “राजस्थान मोटर व्हीकल एग्रीगेटर स्कीम रूल्स, 2025” लागू कर दिए गए हैं। इन नियमों के तहत ऐप आधारित टैक्सी और अन्य एग्रीगेटर सेवाओं के संचालन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश और नियामक व्यवस्था तय कर दी गई है।
सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि नए नियम लागू होने के बाद याचिका में उठाए गए अधिकांश मुद्दों का समाधान स्वतः हो गया है। इसलिए इस याचिका पर आगे सुनवाई जारी रखने का कोई औचित्य नहीं रह गया है।
हाईकोर्ट ने कहा-अब याचिका अप्रासंगिक
सरकार और प्रतिवादी पक्ष की दलीलों पर विचार करने के बाद खंडपीठ ने कहा कि जब राज्य सरकार ने इस विषय पर नया कानूनी ढांचा लागू कर दिया है, तब इस याचिका पर विचार करने का आधार समाप्त हो जाता है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि नए एग्रीगेटर नियमों के लागू होने के कारण यह याचिका अब अप्रासंगिक (Infructuous) हो गई है और इसे खारिज किया जाता है।
इस आदेश के साथ ही इस मामले में लंबित न्यायिक कार्यवाही समाप्त हो गई।
क्या हैं नए एग्रीगेटर नियम
राजस्थान सरकार द्वारा लागू किए गए मोटर व्हीकल एग्रीगेटर स्कीम रूल्स, 2025 का उद्देश्य राज्य में ऐप आधारित परिवहन सेवाओं को स्पष्ट और पारदर्शी नियमों के तहत संचालित करना है।
इन नियमों के जरिए एग्रीगेटर कंपनियों के लाइसेंस, संचालन प्रक्रिया, यात्रियों की सुरक्षा, किराया निर्धारण, ड्राइवरों के अधिकार और सेवा मानकों को लेकर विस्तृत प्रावधान किए गए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित परिवहन सेवाओं के तेजी से विस्तार के कारण कई राज्यों में इस तरह के नियामक ढांचे की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
परिवहन क्षेत्र में बदलता परिदृश्य
पिछले कुछ वर्षों में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। इससे यात्रियों को सुविधाजनक और तकनीक आधारित परिवहन विकल्प मिले हैं, लेकिन साथ ही पारंपरिक ऑटो और टैक्सी चालकों के बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है।
कई शहरों में ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने इन सेवाओं के खिलाफ विरोध भी दर्ज कराया है और सरकार से स्पष्ट नियम बनाने की मांग की है।
राजस्थान में लागू किए गए नए एग्रीगेटर नियम इसी बदलते परिवहन परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए हैं, ताकि यात्रियों को बेहतर सेवा मिले और ड्राइवरों के अधिकारों की भी रक्षा हो सके।