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धमकियों से पिता-पुत्र ने की आत्महत्या: हाईकोर्ट ने आरोपी की दूसरी जमानत याचिका भी की खारिज

Rajasthan High Court Rejects Second Bail Plea in Double Suicide Case Linked to Threats

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले में सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी की दूसरी जमानत याचिका खारिज कर दी है।

मामला हनुमानगढ़ जिले का है, जहां एक ही परिवार के दो सदस्य, जिसमें एक पिता और उसका पुत्र शामिल हैं, ने आरोपी की धमकियों से परेशान होकर आत्महत्या की।

आरोपी की दूसरी जमानत याचिका भी खारिज करते हुए जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली की एकलपीठ ने साफ कहा कि ऐसे गंभीर मामलों में आरोपी को राहत देना न्याय के हित में नहीं है।

हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला केवल एक आपराधिक केस नहीं, बल्कि एक ऐसे परिवार की त्रासदी है, जो कथित रूप से लगातार मिल रही धमकियों और मानसिक दबाव के चलते टूट गया।

आरोपी याचिकाकर्ता विनोद कुमार और उसके साथियों ने पीड़ित परिवार के घर में जबरन घुसकर न केवल गाली-गलौज की, बल्कि मारपीट कर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी।

हाईकोर्ट के समक्ष पेश किए गए तथ्यों के अनुसार, इस घटना के बाद परिवार गहरे मानसिक तनाव में आ गया। इसी दबाव के चलते परिवार के मुखिया ने ट्रेन के आगे आकर आत्महत्या कर ली, जबकि उनके बेटे ने जहर खाकर अपनी जान दे दी।

सरकार ने किया जमानत का विरोध

जमानत का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि यह कोई साधारण विवाद नहीं, बल्कि लगातार दी जा रही धमकियों और उत्पीड़न का नतीजा है।

जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण ऑडियो-वीडियो साक्ष्य भी सामने आया, जिसे मृतक ने अपनी मौत से ठीक पहले रिकॉर्ड किया था। लगभग दो मिनट की इस रिकॉर्डिंग में मृतक ने अपनी मौत के लिए आरोपी को जिम्मेदार ठहराया है। यह साक्ष्य मामले की गंभीरता को और अधिक बढ़ाता है।

जांच एजेंसी को मोबाइल कॉल डिटेल्स से भी यह संकेत मिला कि आरोपी घटना के समय घटनास्थल के आसपास मौजूद था। इसके अलावा, एक पेन ड्राइव भी बरामद की गई है, जिसमें कथित रूप से आरोपी द्वारा दी गई धमकियों के प्रमाण मौजूद हैं। ये सभी साक्ष्य अदालत के सामने पेश किए गए, जिनके आधार पर कोर्ट ने मामले को बेहद गंभीर माना।

बचाव पक्ष की दलील

बचाव पक्ष ने अपनी दलील में कहा कि आरोपी निर्दोष है और उसे झूठा फंसाया गया है। यह भी तर्क दिया गया कि मामले में अभी कई गवाहों के बयान दर्ज होना बाकी हैं और ट्रायल में समय लगेगा, इसलिए आरोपी को जमानत दी जानी चाहिए। साथ ही यह भी बताया गया कि आरोपी पिछले कई महीनों से जेल में है।

हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल इस आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती कि ट्रायल लंबा चलेगा।

यदि आरोप गंभीर हैं और प्रथम दृष्टया साक्ष्य आरोपी के खिलाफ जाते हैं, तो जमानत देना न्याय के साथ समझौता होगा।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि आरोपी की पहली जमानत याचिका पहले ही खारिज की जा चुकी है और वर्तमान परिस्थितियों में कोई ऐसा नया आधार सामने नहीं आया है, जिससे दूसरी बार जमानत दी जा सके।

हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में अभी महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज होना बाकी हैं, इसलिए इस स्तर पर आरोपी को रिहा करना उचित नहीं होगा।

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