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मृतका के डाइंग डिक्लेरेशन में लगाए गंभीर आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता,

Rajasthan High Court Rejects Sentence Suspension Plea in Dowry Death and Murder Case

दहेज हत्या केस में दोषियों को कोई राहत नहीं, सजा निलंबन याचिका खारिज

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने दहेज उत्पीड़न और हत्या के एक बेहद गंभीर मामले में दोषियों को बड़ा झटका देते हुए उनकी सजा निलंबन (Suspension of Sentence) याचिका खारिज कर दी है।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ शब्दों में कहा कि मृतका के डाइंग डिक्लेरेशन में लगाए गए गंभीर आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, इसलिए अपील लंबित होने के बावजूद दोषियों को राहत नहीं दी जा सकती।

जस्टिस महेन्द्र कुमार गोयल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने यह फैसला सत्यपालसिंह की ओर से दायर याचिका पर से दिया हैं.

क्या है पूरा मामला?

भरतपुर जिले से जुड़े इस गंभीर आपराधिक मामले में एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में जलने से मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद दहेज उत्पीड़न और हत्या का मामला दर्ज हुआ।

अभियोजन के अनुसार मृतका का विवाह घटना से लगभग दो वर्ष पहले हुआ था और विवाह के कुछ समय बाद से ही उसे दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा था

परिजनों और अभियोजन के आरोपों के अनुसार विवाह के बाद आरोपियों द्वारा समय-समय पर अतिरिक्त दहेज की मांग की जाती थी। मांग पूरी नहीं होने पर मृतका को मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जाता था।

बचाव पक्ष की दलीलें

बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि एक डाइंग डिक्लेरेशन में आरोप नहीं हैं और आरोपी ट्रायल के दौरान जमानत पर थे, लेकिन हाईकोर्ट ने कहा जब रिकॉर्ड पर मजबूत साक्ष्य मौजूद हों, तो केवल अपील लंबित होने के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती।

ट्रायल कोर्ट का निष्कर्ष

अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और डाइंग डिक्लेरेशन का मूल्यांकन करने के बाद आरोपियों को दहेज उत्पीड़न और हत्या का दोषी माना और उन्हें कारावास की सजा सुनाई।

भरतपुर की महिला उत्पीड़न अदालत ने सत्यपाल सिंह उर्फ सतपाल और भूरीदेवी को भारतीय दंड संहिता की धारा 498-A और 302 के तहत दोषी ठहराते हुए 498-A IPC में 3 वर्ष का कठोर कारावास और 302 IPC में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

दोषियों ने हाईकोर्ट में अपील के साथ सजा निलंबन की मांग की, लेकिन कोर्ट ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया।

अपील और हाईकोर्ट की कार्यवाही

दोष सिद्ध होने के बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की और सजा निलंबन की मांग की, लेकिन हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का परीक्षण करते हुए पाया कि डाइंग डिक्लेरेशन में लगाए गए आरोप गंभीर और स्पष्ट हैं। इसी आधार पर अदालत ने सजा निलंबन की याचिका खारिज कर दी।

हाईकोर्ट की दो टूक टिप्पणी

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि मृतका की मौत शादी के दो साल के भीतर अस्वाभाविक परिस्थितियों में हुई, जो मामले को और गंभीर बनाती है।

ट्रायल कोर्ट द्वारा भरोसा किए गए डाइंग डिक्लेरेशन में दहेज मांगने, उत्पीड़न और आग लगाकर हत्या करने के स्पष्ट आरोप हैं।

कोर्ट ने यह भी साफ किया कि जिन बयानों को ट्रायल कोर्ट ने खारिज किया, उसके पीछे ठोस और तार्किक कारण थे और इसमें कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।

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