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राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर पहचान से जुड़े ऐतिहासिफ फैसले से विवादित टिप्पणी हटाई, मुख्य फैसला बरकरार

Rajasthan High Court Removes Controversial Epilogue on Transgender Identity, Upholds Core Judgment

जोधपुर, 2 अप्रैल 2026। राजस्थान हाईकोर्ट ने गंगा कुमारी मामले में अपने 30 मार्च 2026 के ऐतिहासिक फैसले से जुड़ी एक अहम स्पष्टता देते हुए एपिलॉग (अंतिम टिप्पणी) का विवादित हिस्सा हटा दिया है।

कोर्ट ने साफ कहा है कि मुख्य निर्णय और उसमें दिए गए दिशा-निर्देश पूरी तरह लागू रहेंगे और उन्हें उसी समय की कानूनी स्थिति के अनुसार लागू किया जाएगा।

क्या था पूरा मामला?

30 मार्च 2026 को दिए गए अपने महत्वपूर्ण फैसले में हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर/थर्ड जेंडर समुदाय के अधिकारों को मजबूती से स्वीकार करते हुए कहा था कि:

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पहचान, गरिमा और स्वायत्तता संविधान के तहत संरक्षित अधिकार हैं, उन्हें शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का अधिकार मिलना चाहिए

देशभर में इस फैसले को ट्रांसजेंडर अधिकारों के लिए एक बड़ा कदम माना गया हैं.

एपिलॉग में क्या था विवाद?

फैसले के अंत में जो एपिलॉग जोड़ा गया था, उसमें यह उल्लेख किया गया था कि:

2019 के ट्रांसजेंडर कानून में प्रस्तावित संशोधन के चलते ट्रांसजेंडर पहचान को सर्टिफिकेट या प्रशासनिक प्रक्रिया से जोड़ा जा सकता है

इस टिप्पणी को लेकर यह आशंका जताई जा रही थी कि इससे ट्रांसजेंडर की स्व-परिभाषित पहचान (self-identification) के अधिकार पर असर पड़ सकता है।

2 अप्रैल के आदेश में क्या बदला?

हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल 2026 को अपने फैसले में स्पष्ट किया कि एपिलॉग में शामिल उक्त टेक्स्ट गलती से जोड़ा गया था

कोर्ट ने कहा कि वह न तो आवश्यक था और न ही फैसले का हिस्सा माना जाना चाहिए, इसलिए उस हिस्से को हटाने (delete करने) का आदेश दिया गया

साथ ही कोर्ट ने नया स्पष्टीकरण जोड़ते हुए कहा कि

“मुख्य फैसले के सभी निर्देश उसी समय की प्रचलित कानूनी स्थिति के अनुसार लागू होंगे और उनका पालन किया जाएगा।

क्या है इसका कानूनी महत्व?

कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया कि ट्रांसजेंडर अधिकारों पर दिया गया मूल फैसला कमजोर न पड़े स्व-पहचान (self-identity) के अधिकार को लेकर कोई भ्रम न रहे और राज्य सरकार को दिए गए निर्देश पहले की तरह पूरी तरह प्रभावी रहें

राजस्थान हाईकोर्ट के इस संशोधन से साफ हो गया है कि ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों पर हाईकोर्ट का 30 मार्च का फैसला अडिग और प्रभावी है

यह आदेश ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए राहत और स्पष्टता दोनों लेकर आया है।

यहां पढ़िए राजस्थान हाईकोर्ट का पुरा फैसला :-

ट्रांसजेंडर पहचान ‘राज्य की अनुमति’ पर निर्भर नहीं हो सकती, उनकी पहचान और गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता- राजस्थान हाईकोर्ट

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