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राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला धोखाधड़ी (फर्जी प्रमाण पत्रों) से नौकरी पाने वाले को नहीं मिलेगी कोई राहत, ऐसे कर्मचारियों को हटाने और मुकदमा दर्ज करने के लिए सरकार स्वतंत्र

Rajasthan High Court: No Legal Protection for Government Jobs Obtained Through Fake Certificates

114 पेज के फैसले में हाईकोर्ट ने कहा-फर्जी दिव्यांगता या आरक्षण प्रमाण पत्र से मिली सरकारी नौकरी टिक नहीं सकती, दिव्यांगता प्रमाण पत्र की पुनः जांच कराने का सरकार को अधिकार,

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरियों में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्ति पाने के मामलों को लेकर बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति फर्जी या गलत प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हासिल करता है, तो उसे कानून का कोई संरक्षण नहीं मिलेगा।

हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी नियुक्ति न केवल अवैध है, बल्कि यह संविधान में दिए गए समान अवसर के सिद्धांत का भी उल्लंघन है। इसलिए राज्य सरकार और नियुक्ति प्राधिकारी ऐसे मामलों में आवश्यक कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति गलत या फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र, आरक्षण प्रमाण पत्र या अन्य किसी झूठे दस्तावेज के आधार पर नौकरी प्राप्त करता है, तो वह पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं रखता।

अदालत ने कहा कि सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना राज्य का संवैधानिक दायित्व है और किसी भी तरह की धोखाधड़ी या गलत तरीके से प्राप्त की गई नियुक्ति को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ ने प्रदेश में सरकारी नौकरियों के लिए आयोजित होने वाली भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विवादों के मामले में दायर दर्जनों याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए रिपोर्टेबल जजमेंट के जरिए यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने रामप्रकाश खरलवा व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर 114 पृष्ठों में यह फैसला सुनाया है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और नियमों का पालन अनिवार्य है, क्योंकि यह सीधे तौर पर संविधान में दिए गए समान अवसर के अधिकार से जुड़ा हुआ विषय है।

भर्ती में फर्जी प्रमाण पत्र का बढ़ता खतरा

हाईकोर्ट ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न राज्यों में सरकारी नौकरियों में फर्जी प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल के कई मामले सामने आए हैं।

कई बार उम्मीदवारों द्वारा दिव्यांगता, जाति, आय या अन्य आरक्षण से जुड़े प्रमाण पत्रों में गड़बड़ी कर नौकरी प्राप्त करने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

ऐसे मामलों में दो बड़े सवाल उठते हैं-

  • क्या ऐसे व्यक्ति को नौकरी से तुरंत हटाया जा सकता है?
  • क्या उसे सेवा नियमों के तहत कानूनी संरक्षण मिल सकता है?

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने ताजा फैसले में इन दोनों सवालों का स्पष्ट जवाब देते हुए कहा है कि यदि किसी व्यक्ति ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की है, तो वह नियुक्ति शुरू से ही अवैध मानी जाएगी।

अदालत ने कहा कि ऐसा व्यक्ति उस पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं रखता।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि—

“फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने वाले व्यक्ति को कोई कानूनी संरक्षण नहीं मिल सकता।”

अदालत के अनुसार यह मामला केवल प्रशासनिक त्रुटि का नहीं, बल्कि धोखाधड़ी और कानून के दुरुपयोग का है।

वैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन

हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी नौकरियों में चयन की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 16 से जुड़ी हुई है।

अनुच्छेद 14 सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है।

अनुच्छेद 16 सरकारी नौकरियों में समान अवसर की गारंटी देता है।

यदि कोई व्यक्ति फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हासिल करता है, तो वह न केवल कानून का उल्लंघन करता है, बल्कि उन योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों का भी हनन करता है जो वास्तव में उस पद के हकदार होते हैं।

दिव्यांगता प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों पर भी टिप्पणी

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में दिव्यांगता प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों पर भी विशेष टिप्पणी की।

कोर्ट ने कहा कि दिव्यांगता से जुड़े लाभ केवल उन्हीं व्यक्तियों को मिल सकते हैं जो RPwD Act, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act) के तहत निर्धारित मानकों को पूरा करते हैं।

यदि कोई व्यक्ति गलत तरीके से दिव्यांगता प्रमाण पत्र प्राप्त कर लेता है और उसके आधार पर नौकरी हासिल कर लेता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में राज्य सरकार या संबंधित विभाग के पास यह अधिकार है कि वह दिव्यांगता की पुनः जांच (Re-assessment) करा सकता है।

सरकार को दिया महत्वपूर्ण अधिकार

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार और नियुक्ति प्राधिकारी को यह अधिकार है कि वे—

  • उम्मीदवार के दस्तावेजों की जांच करें
  • प्रमाण पत्र की सत्यता की पुष्टि करें
  • आवश्यकता पड़ने पर मेडिकल बोर्ड या सक्षम प्राधिकरण से पुनः जांच कराएं

यदि जांच में यह साबित हो जाता है कि प्रमाण पत्र गलत या फर्जी है, तो नियुक्ति रद्द की जा सकती है।

विभागीय जांच जरूरी नहीं हर मामले में

अदालत ने यह भी कहा कि हर मामले में लंबी विभागीय जांच करना जरूरी नहीं है।

यदि स्पष्ट रूप से यह साबित हो जाता है कि नौकरी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त की गई है, तो नियुक्ति प्राधिकारी सीधे कार्रवाई कर सकता है।

हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि कार्रवाई करते समय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए।

यानी संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए।

फर्जी दस्तावेजों पर आपराधिक कार्रवाई संभव

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में केवल नौकरी समाप्त करना ही पर्याप्त नहीं है।

यदि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया है, तो उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी चलाया जा सकता है।

ऐसे मामलों में संबंधित विभाग पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकता है।

अदालत ने कहा कि सरकारी नौकरियों में धोखाधड़ी को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

प्रशासन की जिम्मेदारी भी तय

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि केवल उम्मीदवार ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की भी जिम्मेदारी है कि वे भर्ती प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों की सही जांच करें।

यदि भर्ती प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों की उचित जांच नहीं की जाती, तो बाद में विवाद पैदा हो सकते हैं।

अदालत ने कहा कि भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए सरकार को दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को और मजबूत करना होगा।

हाईकोर्ट का अंतिम आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने इन याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई, तथ्यों और कानूनी दलीलों के आधार पर कई आदेश दिए हैं।

(आगे की सूची यथावत सही है, केवल छोटे विराम सुधार किए गए हैं)

याचिकाएं निस्तारित, राहत वापस

राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में दायर सभी रिट याचिकाओं को निस्तारित कर दिया है। साथ ही याचिकाकर्ताओं को दी गई सभी अंतरिम राहत (Interim Protection) वापस ले ली गई है।

युवाओं के लिए संदेश

यह फैसला उन युवाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है जो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं।

अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल योग्य और नियमों के अनुसार पात्र उम्मीदवारों को ही सरकारी नौकरी का अधिकार है।

किसी भी प्रकार के फर्जी दस्तावेज या गलत जानकारी के आधार पर नौकरी हासिल करने की कोशिश अंततः कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती है।

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