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शिक्षक की सैलरी से रिकवरी पर हाईकोर्ट की रोक, बी.एड. इंटर्नशिप को ‘ड्यूटी’ मानने के संकेत

Rajasthan High Court Stays Salary Recovery from Teacher, Seeks Response on B.Ed Internship Being Treated as Duty

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग द्वारा एक शिक्षक के वेतन से की जा रही भारी-भरकम रिकवरी पर अंतरिम रोक लगाते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक शिक्षक के वेतन से किसी भी प्रकार की वसूली नहीं की जाएगी।

यह आदेश बूंदी जिले में कार्यरत शिक्षक बुद्धि प्रकाश मीणा की ओर से दायर याचिका पर जस्टिस नुपूर भाटी की एकलपीठ ने दिया हैं.

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ता बुद्धि प्रकाश मीणा, जो वर्तमान में बूंदी जिले के केशोरायपाटन ब्लॉक स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय, झालाजी का बराना में लेवल-1 शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं, ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से बी.एड. पाठ्यक्रम करने के लिए विभाग से पूर्व अनुमति प्राप्त की थी।

कोर्स के तहत उन्हें जनवरी से अगस्त 2025 के बीच दो चरणों में कुल 43 दिनों की अनिवार्य स्कूल इंटर्नशिप पूरी करनी थी।

शिक्षक का कहना है कि यह इंटर्नशिप शैक्षणिक पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा थी और विभागीय अनुमति के बाद ही उन्होंने इसे पूरा किया।

विवाद तब खड़ा हुआ जब शिक्षा विभाग ने 1 अगस्त 2025 को जारी एक परिपत्र का हवाला देते हुए इस इंटर्नशिप अवधि को ‘ड्यूटी’ मानने से इनकार कर दिया।

इसके आधार पर विभाग ने 10 सितंबर 2025 को आदेश जारी कर शिक्षक के वेतन से 83,184 रुपये की रिकवरी निकालने के निर्देश दिए। साथ ही अगस्त और दिसंबर 2025 का वेतन भी रोक दिया गया।

कोर्ट में क्या दलील दी गई?

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रियंक केवलिया ने कोर्ट में तर्क रखा कि विभाग का आदेश राजस्थान सेवा नियम (RSR), 1951 के नियम 7(8)(b)(i) के विपरीत है।

उक्त नियम के अनुसार, किसी भी सरकारी कर्मचारी द्वारा स्वीकृत प्रशिक्षण या निर्देशात्मक पाठ्यक्रम को ‘ड्यूटी’ माना जाता है।

अधिवक्ता ने कहा कि जब विभाग ने स्वयं बी.एड. कोर्स करने की अनुमति प्रदान की थी, तो इंटर्नशिप अवधि को ड्यूटी से बाहर मानना अनुचित और नियमों के विरुद्ध है।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि बिना सुनवाई का अवसर दिए वेतन से भारी राशि की रिकवरी करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

हाईकोर्ट का आदेश

जस्टिस नुपुर भाटी की एकल पीठ ने शिक्षा विभाग द्वारा 24 फरवरी 2026 को पारित आदेश में राज्य सरकार, निदेशक (प्रारंभिक शिक्षा), बीकानेर तथा जिला शिक्षा अधिकारी, बूंदी सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है।

कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक 10 सितंबर 2025 के ऑफिस आदेश और 1 अगस्त 2025 के पत्र के आधार पर की जा रही रिकवरी प्रभावी नहीं की जाएगी। अर्थात, फिलहाल शिक्षक के वेतन से कोई कटौती नहीं की जा सकेगी।

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