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आरोपी मेरा पति, हमारा बच्चा भी है: जिस नाबालिग से रेप केस (Pocso) में उम्रकैद काट रहा आरोपी, उसी पीड़िता के बयान पर हाईकोर्ट ने सजा को किया निलंबित दी जमानत

Rajasthan High Court Suspends Life Sentence in POCSO Case After Victim Tells Court She Married the Accused and Has a Child

पीड़िता के बयान और उम्र को लेकर रिकॉर्ड में विरोधाभास पर हाईकोर्ट ने दी राहत; आजीवन कारावास की सजा पर रोक लगाते हुए जमानत पर रिहा करने का आदेश

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में POCSO एक्ट से जुड़ा एक गंभीर और बेहद संवेदनशील मामला सामने आया हैं जिसमें जिस नाबालिग युवती के साथ रेप के मामले में आरोपी को आजीवन उम्रकैद की सजा दी गयी हैं उसी पीड़िता ने कोर्ट में पेश होकर बयान दिया हैं कि आरोपी उसका पति हैं और उसके साथ उसने शादी की हैं उसका एक बच्चा भी हैं.

रेप पीड़िता के बयान और उसके माता पिता द्वारा पीड़िता के उम्र को लेकर दिए गए विरोधाभासी बयानों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा भुगत रहे आरोपी की सजा को निलंबित करते हुए जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है.

राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि मामले के रिकॉर्ड में पीड़िता की उम्र को लेकर दस्तावेजी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास दिखाई देते हैं, जिनकी अंतिम सुनवाई के दौरान विस्तृत जांच आवश्यक होगी।

जस्टिस फरजंद अली और जस्टिस ने आरोपी नरेश उर्फ नरेंद्र कुमार की ओर से दायर सजा निलंबन याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया हैं.

ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद

मामले में बालोतरा स्थित विशेष POCSO अदालत ने 16 दिसंबर 2025 को अपने फैसले में आरोपी नरेश को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(n) और POCSO एक्ट की धारा 5(L)/6 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

इसके अलावा आरोपी को आईपीसी की धारा 354D, 363 और 366A तथा POCSO एक्ट की धारा 11(iv)/12 और 16/17 के तहत भी दोषी ठहराया गया था और अलग-अलग अवधियों की सजा सुनाई गई थी।

ट्रायल कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ आरोपी ने राजस्थान हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर करते हुए सजा निलंबन की मांग की थी।

उम्र को लेकर रिकॉर्ड में विरोधाभास

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले के रिकॉर्ड का प्रारंभिक अवलोकन करते हुए पाया कि पीड़िता की उम्र को लेकर दस्तावेजों और गवाहों के बयानों में महत्वपूर्ण विरोधाभास मौजूद हैं।

स्कूल रिकॉर्ड के अनुसार एक पीड़िता की जन्मतिथि 14 मार्च 2003 और दूसरी की 1 जनवरी 2006 दर्ज है, जिससे दोनों के बीच लगभग तीन वर्ष का अंतर दिखाई देता है।

हालांकि, पीड़िता की मां ने अपने बयान में दोनों बहनों के बीच केवल डेढ़ वर्ष का अंतर बताया था।

इसके अलावा माता-पिता के बयानों में भी उम्र को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए, जिससे पीड़िता की वास्तविक उम्र को लेकर संदेह की स्थिति उत्पन्न होती दिखाई दी।

हाईकोर्ट ने कहा कि दस्तावेजी साक्ष्य और मौखिक गवाही के बीच मौजूद इन विरोधाभासों की अंतिम सुनवाई के दौरान गहराई से जांच करना आवश्यक होगा।

विवाह किया बच्चा भी हैं,आरोपी के परिवार ने दिया आश्रय,

मामले की सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया जब पीड़िता स्वयं अदालत में उपस्थित हुई।

पीड़िता ने अदालत को बताया कि उसने आरोपी नरेश से विवाह कर लिया है और दोनों से एक बच्चा भी पैदा हुआ है। वह अदालत में अपने बच्चे के साथ उपस्थित हुई थी।

पीड़िता ने यह भी कहा कि आरोपी ने उसे किसी प्रकार के दबाव या मजबूरी में नहीं रखा था। उसने अदालत को यह भी बताया कि उसे अपने माता-पिता की ओर से प्रताड़ना का सामना करना पड़ा था।

अदालत ने यह भी नोट किया कि पीड़िता वर्तमान में अपने माता-पिता से अलग रह रही है और आरोपी के परिवार ने उसे तथा उसके बच्चे को आश्रय दिया है।

अपील में गंभीर सवाल

हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद परिस्थितियां यह दर्शाती हैं कि मामले में कई ऐसे पहलू हैं जिनकी अपील की अंतिम सुनवाई के दौरान पुनः जांच की आवश्यकता है।

पीड़िता की उम्र को लेकर विरोधाभास, उसके वर्तमान बयान और मामले की अन्य परिस्थितियां यह संकेत देती हैं कि अपील में उठाए गए तर्कों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

अदालत ने यह भी कहा कि यदि अपील अंततः सफल होती है और आरोपी को बरी कर दिया जाता है, तो जेल में बिताया गया समय वापस नहीं किया जा सकता। इसलिए ऐसे मामलों में सजा निलंबन के प्रश्न पर सावधानीपूर्वक संतुलन बनाना आवश्यक होता है।

सजा निलंबित,जमानत

इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी नरेश की सजा को अपील के अंतिम निर्णय तक निलंबित करने का आदेश दिया।

हाईकोर्ट ने आरोपी को 50,000 रुपये के निजी मुचलके और 25-25 हजार रुपये की दो जमानतों पर रिहा करने का आदेश दिया हैं.

  • Case Deteils
  • RAJASTHAN HIGH COURT JODHPUR
    D.B. Criminal Misc Suspension Of Sentence Application (Appeal)
    No. 38/202
  • Naresh Alias Narendra Kumar Versus State Of Rajastha
    BENCH: JUSTICE FARJAND ALI & JUSTICE SANDEEP SHAH
    JUDGEMENT DATE 10/03/2026

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