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Transformative Tuesdays : मंगलवार को 1400 जज प्रदेश के 4 लाख बच्चों को देंगे साइबर सुरक्षा से लेकर अधिकारों की जानकारी-राजस्थान में शिक्षा का नया अध्याय

Rajasthan Launches ‘Transformative Tuesdays’: 1,400 Judges to Teach Cyber Safety & Legal Awareness to 4 Lakh Students

जयपुर। राजस्थान की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में मंगलवार को एक ऐतिहासिक और अनोखा बदलाव होने जा रहा है।

मंगलवार को प्रदेशभर में 1400 स्कूलों में सिर्फ शिक्षक ही नहीं, बल्कि न्यायिक अधिकारी यानी जज भी बच्चों को पढ़ाते नजर आएंगे।

अब राजस्थान के स्कूलों में सिर्फ किताबों की पढ़ाई नहीं, बल्कि कानून की समझ भी दी जाएगी… जज खुद क्लास में पहुंचकर बच्चों को साइबर अपराध से बचाव और अधिकारों की जानकारी देंगे…

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RALSA) ने एम्पावरिंग राजस्थान यूथ ए लीगल लिटरेसी इनीशिएटिव-2026 योजना के तहत स्टूडेंट्स में विधिक जागरूकता लाने के प्रयास के तहत एक बड़ा अभियान शुरू किया है, जिसका नाम “Transformative Tuesdays: Navigating Life Legally” रखा गया है।

इस अभियान की शुरुआत अप्रैल माह के पहले मंगलवार यानी कल 7 अप्रैल से पूरे प्रदेश में एक साथ होने जा रही है।

1400 जज, 1400 स्कूल, एक दिन में 4 लाख स्टूडेंट्स तक पहुंच

इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत प्रदेशभर के 1400 न्यायिक अधिकारी (सिविल जज से लेकर जिला जज तक) 1400 चयनित स्कूलों में जाकर कक्षा 8 से 12वीं तक के विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा का पाठ पढ़ाएंगे।

जिसमें साइबर बुलिंग, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन फ्रॉड, सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग आदि विषयों पर जागरूक किया जाएगा।

खास बात यह है कि एक ही दिन में 4 लाख से ज्यादा छात्रों को जागरूक किया जाएगा।

पहला विषय: साइबर सुरक्षा – “Click करने से पहले सोचो”

अभियान की शुरुआत बेहद महत्वपूर्ण विषय साइबर सुरक्षा से की जा रही है। जज बच्चों को इन खतरों से बचने के तरीके बताएंगे— साइबर बुलिंग, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन फ्रॉड, सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग की जानकारी देंगे।

इस दौरान “Think Before You Click” थीम पर विशेष जागरूकता दी जाएगी।

हर मंगलवार नया विषय, सालभर चलेगा अभियान

अभियान को सोमवार को राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव डॉ. हरिओम अत्री ने एक प्रेसवार्ता में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि यह सिर्फ एक दिन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि पूरे साल चलने वाला अभियान है।

हर मंगलवार को अलग-अलग विषयों पर सत्र होंगे, जिसमें संवैधानिक अधिकार, विधिक सहायता, बाल अधिकार, महिला अधिकार, दैनिक जीवन के कानून और जिम्मेदार नागरिकता शामिल होंगे।

लक्ष्य: 52 हजार से ज्यादा स्कूलों तक पहुंचना

सदस्य सचिव ने बताया कि इस अभियान के जरिए प्रदेशभर के करीब 52,000 स्कूलों के बच्चों तक जागरूकता पहुंचाई जाएगी।

इस अभियान की सबसे अनोखी पहल है “कोर्ट वाली दीदी शिकायत पेटी”।

जज जब स्कूल जाएंगे, तो यह पेटी भी साथ लेकर जाएंगे। छात्र इसमें अपनी समस्या, शिकायत या सवाल लिखकर डाल सकेंगे। पहचान गुप्त रहेगी। बाद में विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम उस पर कार्रवाई करेगी।

यानी अब छात्रों की समस्याएं सीधे न्याय व्यवस्था तक पहुंचेंगी।

सालभर अलग-अलग विषयों पर सैशन

यह अभियान पूरे एक साल तक चलेगा, जिसमें हर मंगलवार छात्रों को अलग-अलग कानूनी विषयों पर जागरूक किया जाएगा। इसकी शुरुआत साइबर सुरक्षा से होगी, इसके बाद संवैधानिक अधिकार, बाल एवं महिला अधिकार, विधिक सहायता और जिम्मेदार नागरिकता जैसे विषयों पर जानकारी दी जाएगी।

इस पहल का उद्देश्य छात्रों को कानूनी रूप से जागरूक बनाना और उनमें जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है, जिसके तहत 52 हजार से अधिक स्कूलों तक पहुंच बनाई जाएगी।

अभियान में “कोर्ट वाली दीदी” शिकायत पेटी भी रखी जाएगी, जिसमें छात्र अपनी समस्याएं लिखकर डाल सकेंगे। इन शिकायतों पर विधिक सेवा प्राधिकरण कार्रवाई कर समाधान करने का प्रयास करेगा।

हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का समर्थन

इस अभियान की शुरुआत राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा की पहल पर हुई है, जबकि इसका औपचारिक शुभारंभ 20 फरवरी को जयपुर में आयोजित राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति सूर्यकांत द्वारा किया गया था।

क्या है इस पहल का बड़ा उद्देश्य?

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव हरिओम अत्री के अनुसार यह अभियान सिर्फ जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों को कानूनी रूप से जागरूक बनाना, उनमें अधिकार और कर्तव्य की समझ विकसित करना और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाना है।

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