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राजस्थान में घर खरीद रहें लोगो के लिए RERA का बड़ा फैसला:-क्षेत्रफल या तकनीकी दलीलों के आधार पर RERA कानून से बच नहीं सकते बिल्डर्स, 8 अपार्टमेंट्स वाले प्रोजेक्ट का रेरा में पंजीकरण जरूरी

Rajasthan RERA Cracks Down on Unregistered Housing Projects, Orders RWA Formation

बिना पंजीकरण बनी ‘विनायक रेजिडेंसी’ प्रोजेक्ट के प्रमोटर को नोटिस, फ्लैट खरीदारों की एसोसिएशन का गठन करने का आदेश

जयपुर। राजस्थान में अपना घर या फ्लैट खरीद करने वालों के लिए राजस्थान RERA से बड़ी खबर है

राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA), जयपुर ने रियल एस्टेट सेक्टर में उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाला आदेश पारित किया है।

अब राजस्थान में कोई भी बिल्डर जिसने अपार्टमेंट्स की तय सीमा यानी 8 फ्लैट से ज्यादा बना रखे हैं, तो उसे हर हाल में RERA के तहत न केवल पंजीकरण कराना अनिवार्य है, बल्कि फ्लैट खरीदारों की एसोसिएशन का गठन करने के साथ उन्हें अन्य सुविधाएं देना भी जरूरी हो गया है

इस आदेश से फ्लैट खरीदारों और उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। रेरा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सेल डीड निष्पादित हो जाने के बाद भी प्रमोटर की जिम्मेदारियां खत्म नहीं होतीं। परियोजना की गुणवत्ता, सुविधाएं और सामुदायिक ढांचा सुनिश्चित करना प्रमोटर का कानूनी दायित्व है।

राजस्थान रेरा ने आम उपभोक्ताओं के पक्ष से जुड़ा यह महत्वपूर्ण फैसला विनायक रेजिडेंसी के प्रमोटर DANARAM & BHANWAR LAL और AADHAR PRIME REAL HOMES के खिलाफ दायर शिकायत पर दिया है

इस मामले में रेरा ने प्रोजेक्ट के पंजीकरण, बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता, सुरक्षा व्यवस्था और फ्लैट मालिकों के संगठन (RWA/एसोसिएशन) के गठन जैसे अहम मुद्दों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA), जयपुर के सदस्य सुधीर कुमार शर्मा ने यह आदेश श्रीराम बियाणी व अन्य की शिकायत पर दिया है

ये है मामला

शिकायतकर्ता श्रीराम बियाणी सहित अन्य की ओर से अधिवक्ता टविंकल ललवानी ने रेरा के समक्ष शिकायत दर्ज कराई कि जयपुर स्थित ‘विनायक रेजिडेंसी’ परियोजना बिना रेरा पंजीकरण के विकसित की गई।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार उन्होंने फ्लैट क्रय कर लिया और रजिस्टर्ड सेल डीड भी निष्पादित हो चुकी, लेकिन परियोजना से जुड़ी कई आवश्यक सुविधाएं आज तक उपलब्ध नहीं कराई गईं। साथ ही, सुरक्षा व्यवस्था, पानी की गुणवत्ता, सीसीटीवी, गार्ड्स की तैनाती और कॉमन एरिया के रखरखाव जैसे बुनियादी मुद्दों पर भी गंभीर खामियां सामने आईं।

Twinkle Lalwani

नहीं कराया पंजीकरण

शिकायत में यह भी कहा गया कि प्रमोटर ने परियोजना का रेरा में पंजीकरण नहीं कराया, जबकि परियोजना में एक से अधिक मंजिलें और कुल 10 आवासीय इकाइयां विकसित की गईं।

शिकायतकर्ताओं का तर्क था कि रेरा अधिनियम, 2016 की धारा 3 के तहत ऐसी परियोजना का पंजीकरण अनिवार्य है, जिसमें तय सीमा से अधिक यूनिट हो। इसके बावजूद प्रमोटर ने कानून का पालन नहीं किया और फ्लैट्स की बिक्री कर दी।

अधिवक्ता टविंकल ललवानी ने रेरा के इस मामले में धारा 3(2) को लेकर कहा कि इस धारा के तहत किसी भी प्रोजेक्ट को रेरा पंजीकरण से छूट तभी मिल सकती है, जब दोनों शर्तें एक साथ पूरी हों, जिसमें परियोजना का क्षेत्रफल 500 वर्ग मीटर से कम या उसके बराबर हो, और परियोजना में प्रस्तावित अपार्टमेंट्स की संख्या 8 या उससे कम हो।

प्रमोटर का पक्ष

प्रमोटर की ओर से यह दलील दी गई कि परियोजना का कुल क्षेत्रफल 500 वर्ग मीटर से कम है, इसलिए यह रेरा पंजीकरण से छूट के दायरे में आती है।

साथ ही यह भी कहा गया कि परियोजना के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) से भवन मानचित्र स्वीकृत है और निर्माण कार्य स्वीकृत मानकों के अनुसार पूरा किया गया।

प्रमोटर ने यह भी दावा किया कि परियोजना का कंप्लीशन सर्टिफिकेट प्राप्त कर लिया गया था और शिकायतकर्ताओं को विधिवत कब्जा सौंप दिया गया।

रेरा की कानूनी व्याख्या

रेरा अथॉरिटी ने इस मामले में धारा 3(2) की विस्तृत व्याख्या करते हुए अपने आदेश में स्पष्ट किया कि किसी भी प्रोजेक्ट को रेरा पंजीकरण से छूट तभी मिल सकती है, जब दोनों शर्तें एक साथ पूरी हों—

परियोजना का क्षेत्रफल 500 वर्ग मीटर से कम या उसके बराबर हो, और
परियोजना में प्रस्तावित अपार्टमेंट्स की संख्या 8 या उससे कम हो।

प्राधिकरण ने कहा कि विनायक रेजिडेंसी प्रोजेक्ट के दस्तावेजों और साइट प्लान का अध्ययन करने के बाद पाया कि ‘विनायक रेजिडेंसी’ में कुल 10 आवासीय फ्लैट विकसित किए गए हैं।

ऐसे में भले ही क्षेत्रफल 500 वर्ग मीटर से कम हो, लेकिन अपार्टमेंट्स की संख्या अधिक होने के कारण यह परियोजना रेरा पंजीकरण से मुक्त नहीं हो सकती।

सुविधाओं और सुरक्षा पर सवाल

रेरा ने अपने आदेश में यह भी माना कि शिकायतकर्ताओं द्वारा उठाए गए कई मुद्दे सेल डीड की शर्तों और प्रमोटर की जिम्मेदारियों से सीधे जुड़े हैं।

रेरा ने कहा कि पानी की खराब गुणवत्ता, सुरक्षा गार्ड्स की अनुपस्थिति, सीसीटीवी कैमरों का न होना, खुले परिसर में बाहरी लोगों की आवाजाही और कॉमन एरिया के रखरखाव में लापरवाही—ये सभी बातें परियोजना की गुणवत्ता और निवासियों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं।

एसोसिएशन गठन के आदेश

रेरा ने विनायक रेजिडेंसी के प्रमोटर को आदेश दिए हैं कि वह अधिनियम की धारा 11(4)(e) के तहत फ्लैट खरीदारों की एसोसिएशन/आरडब्ल्यूए का गठन सुनिश्चित करे।

आदेश में स्पष्ट किया गया कि आदेश की तिथि से 45 दिनों के भीतर एसोसिएशन का पंजीकरण कराया जाए, ताकि परियोजना के रखरखाव, सुरक्षा और सामुदायिक सुविधाओं का संचालन सुचारु रूप से हो सके।

कारण बताओ नोटिस और संभावित जुर्माना

रेरा ने प्रमोटर को धारा 59 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं।

नोटिस में प्रमोटर से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि बिना पंजीकरण परियोजना विकसित करने पर परियोजना की अनुमानित लागत का 10 प्रतिशत तक का दंड क्यों न लगाया जाए।

रियल एस्टेट सेक्टर के लिए संदेश

यह फैसला रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि क्षेत्रफल या तकनीकी दलीलों के आधार पर रेरा कानून से बचने की कोशिश अब स्वीकार्य नहीं होगी।

प्राधिकरण ने साफ कर दिया है कि यदि अपार्टमेंट्स की संख्या तय सीमा से अधिक है, तो पंजीकरण अनिवार्य होगा। साथ ही, सुविधाओं और सुरक्षा से जुड़े दायित्वों की अनदेखी को भी गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

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