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Big Breaking : जयपुर में अवैध रूप से बंधक बनाए गए 18 लोगों का सफल रेस्क्यू, 8 माह से लेकर 3 साल से कैद थे महिला पुरूष, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की बड़ी कार्रवाई

RSLSA’s Swift Action Leads to Rescue of 11 Women and 7 Men from Illegal Confinement in Jaipur

मानवाधिकार दिवस के निरीक्षण से खुला अवैध कैदखाने का राज, RSLSA की त्वरित कार्रवाई, ‘मेरी पहल’ एनजीओ परिसर पर देर शाम छापा

जयपुर। राजधानी जयपुर में एक एनजीओं मेरी पहल संस्था के परिसर में अवैध रूप से कैद करके रखे जा रहे 18 महिला-पुरूषों को बुधवार देर रात एक रेस्कयु आपरेशन के जरिए मुक्त कराया गया.

10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस के दिन एक निरीक्षण के दौरान मिली जानकारी को पुख्ता करने के बाद मामले की विस्तृत जानकारी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को दी गयी.

साथ ही प्राधिकरण के सदस्य सचिव हरिओम अत्री ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए सभी स्रोतो से जानकारी एकत्रित कर निदेशक नीरज भारद्वाज के नेतृत्व में टीम का गठन किया.

सदस्य सचिव द्वारा गठित कि गयी टीम ने दो दर्जन पुलिसकर्मियों की टीम के साथ बुधवार शाम करीब 7 बजे झोटवाड़ा स्थित मेरी पहल संस्था नामक एनजीओं के परिसर पर छापा मारा.

अचानक हुई इस कार्यवाही के दौरान संस्था के परिसर में 11 महिलाए और 7 पुरूष को अवैध रूप से कैद में रखने का खुलासा हुआ.

8 माह से लेकर 3 साल तक कैद

दर्जनों सीसीटीवी की किलेबंदी में कैद इन महिला-पुरुषों में बिहार और यूपी के कुछ ऐसे लोग भी मिले हैं, जिन्हें 8 माह से लेकर 3 साल तक कैद रखा जा रहा था।

भरतपुर के बालकृष्ण को रेलवे स्टेशन से जनवरी 2023 में उठाया गया था, तब से ही वह इसी संस्था के परिसर में कैद था।

बालकृष्ण से इस संस्था में कैद सभी लोगों के लिए खाना बनाने का काम करवाया जा रहा था, जिसके लिए न तो उसे किसी तरह का श्रम दिया जा रहा था और न ही वह किसी भी रिकॉर्ड में दर्ज था। इसके चलते उसके परिजनों तक भी कोई जानकारी नहीं पहुँच पाई थी।

35 माह से उत्तर प्रदेश के दिलीप भी इस संस्था के परिसर में कैद पाए गए हैं। इसके साथ ही धौलपुर के राजेश, गंगापुर सिटी से इंद्र, यूपी के महाराजगंज के रंजन, शंकरलाल और बिहार के सासाराम से बाबूलाल को भी शहर के अलग-अलग स्थानों से उठाया गया और उन्हें यहाँ 8 माह से लेकर 3 साल तक कैद में रखा जा रहा था।

अवैध तरीके से शहर के रेलवे स्टेशन से उठाए गए लोगों को इस संस्था में न तो सही तरीके से भोजन दिया जा रहा था और न ही उन लोगों को अपने परिजनों से संपर्क करने दिया जा रहा था।

लव मैरिज करने की सज़ा

बंधक बनाए गए लोगों में न केवल बुजुर्ग शामिल हैं, बल्कि दो ऐसी युवतियाँ भी शामिल थीं, जो लव मैरिज कर चुकी थीं और उनके परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने उन्हें इस एनजीओ में भेज दिया।

इन बंधकों में चौमू की एक डॉक्टर की पढ़ाई पूर्ण कर चुकी युवती भी शामिल है, जिसने लव मैरिज की थी, लेकिन परिजनों की ओर से दर्ज शिकायत के आधार पर पुलिस ने उसे दस्तयाब किया था।

परिजनों के साथ जाने से इंकार करने पर पुलिस ने नारी निकेतन भेजने की बजाय युवती को ‘मेरी पहल’ संस्था में भेज दिया।

इसी तरह की दो अन्य युवतियों को भी झोटवाड़ा और चौमू पुलिस थानाधिकारियों के पत्रों के आधार पर यहाँ रखा जा रहा था।

रेस्क्यू किए गए लोगों ने चौमू थाना पुलिस और झोटवाड़ा थाना पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

रेलवे स्टेशन और रेलवे लाइन से उठाए लोग

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम को कई चौंकाने वाली जानकारियाँ सामने आईं।

रेस्क्यू किए गए लोगों में से तीन पुरुषों को तब पकड़कर यहाँ लाया गया, जब वे रेलवे लाइन के किनारे चल रहे थे।

स्किल डेवलपमेंट के नाम पर एनजीओ में ढोलक बजाना सिखाया जा रहा था।

रेस्क्यू किए गए कुछ लोग मानसिक रूप से अत्यंत सरल और कमजोर पाए गए, जिनकी मानसिक क्षमता कम थी, लेकिन संस्था द्वारा उनके लिए किसी प्रकार की समुचित चिकित्सा या मनोवैज्ञानिक देखभाल की व्यवस्था नहीं की गई थी।

रेस्क्यू की गई महिलाओं में से एक युवती डी. फार्मा/बी. फार्मा शिक्षित पाई गई, जो न तो भिक्षुक है और न ही उसे किसी स्किल ट्रेनिंग की जरूरत थी।

तीन घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन, देर रात तक कार्रवाई

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव हरिओम अत्री के मॉनिटरिंग में विशेष निरीक्षण टीम की यह कार्रवाई करीब तीन घंटे से भी अधिक समय तक चली।

RSLSA के डायरेक्टर नीरज भारद्वाज के नेतृत्व में जयपुर महानगर प्रथम और द्वितीय के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के सचिव पल्लवी शर्मा, पवन जीनवाल, उप सचिव अनुभूति मिश्रा एवं कोमल मोतियार की 5 सदस्यीय टीम शाम करीब 7 बजे झोटवाड़ा पुलिस थाना पहुँची।

जयपुर पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर एसीपी हनुमान मीणा करीब दो दर्जन पुलिसकर्मियों के बल के साथ विशेष टीम के साथ रवाना हुए।

इसके पश्चात RSLSA का संयुक्त दल पुलिस बल के साथ ‘मेरी पहल’ संस्था के परिसर पर पहुँचा, जहाँ शाम करीब 7.15 बजे शुरू हुई कार्रवाई देर रात 10.30 बजे तक जारी रही।

इस दौरान टीम ने रेस्क्यू किए गए सभी लोगों को पुलिस वैन के जरिए सुरक्षित स्थानों पर भेजा, जहाँ उनका चिकित्सकीय परीक्षण कराने के पश्चात उन्हें दो महिला काउंसलर द्वारा काउंसलिंग दी जाएगी।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव द्वारा संस्था के सभी रजिस्टर अपने कब्जे में लेकर जांच की गई, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं।

रजिस्टर में दर्ज कुछ नाम मौके पर मौजूद नहीं थे, जबकि मौके पर उपस्थित कुछ महिलाओं के नाम रजिस्टर में दर्ज ही नहीं थे।

20 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी

रालसा की टीम के निरीक्षण के दौरान एनजीओ के परिसर में गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं।

रालसा के जांच दल के समक्ष यह तथ्य आया कि तथाकथित एनजीओ/संस्था के परिसर में संचालक द्वारा स्वयं को भिक्षुक पुनर्वास केंद्र संचालित करने वाला बताया गया, जबकि वहाँ किसी भी प्रकार का कौशल विकास या पुनर्वास कार्य वास्तविक रूप से नहीं किया जा रहा था।

कार्रवाई के दौरान एनजीओ परिसर में दो बंदर भी पिंजरों में कैद पाए गए, जिस पर टीम ने स्थानीय वन विभाग को सूचना दी।

एनजीओ परिसर को सीसीटीवी की कड़ी निगरानी में रखा जा रहा था। एनजीओ परिसर के मुख्य द्वार पर ही 6 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए पाए गए।

एनजीओ परिसर के मुख्य द्वार और पीछे की ओर कुल 20 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगे पाए गए।

रेस्क्यू किए गए लोगों के अनुसार ये कैमरे परिसर के आसपास हो रही गतिविधियों पर नजर रखने के लिए लगाए गए थे।

नारी निकेतन भेजी गई महिलाएँ, काउंसलिंग शुरू

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने रेस्क्यू किए गए सभी लोगों को तत्काल पुलिस वैन के जरिए सुरक्षित स्थलों पर भेजा।

रेस्क्यू की गई महिलाओं और युवतियों को देर रात ही नारी निकेतन/बालिका गृह में स्थानांतरित किया गया। साथ ही दो महिला चिकित्सकों को उनकी जांच के लिए नियुक्त किया गया।

इसके साथ ही काउंसलिंग के लिए दो महिला काउंसलरों की नियुक्ति की गई।

पुरुषों के नाम, पहचान और बयान दर्ज कर उन्हें मुक्त करने की कार्रवाई शुरू की गई।

दो महिला चिकित्सकों द्वारा उनका चिकित्सीय परीक्षण कराया गया।

एफआईआर की कार्रवाई

संपूर्ण कार्यवाही के दौरान जयपुर महानगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट 2 (CJM) नवीन किलानिया मौके पर मौजूद रहे।

शुरुआती जांच में सामने आए बयानों और निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर संस्था और व्यक्तियों के विरुद्ध FIR दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

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