नई दिल्ली, 19 फरवरी। सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को बड़ी राहत देते हुए रेगुलर जमानत दे दी हैं.
साथ ही लगभग ₹44.7 करोड़ के वित्तीय विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता केंद्र (Mediation Centre) को रेफर किया है.
सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने यह आदेश दिया हैं.
उदयपुर में दर्ज हैं मामला
राजस्थान के उदयपुर स्थित भूपालपुरा थाना में दर्ज एफआईआर संख्या 213/2025 से जुड़ा है।
आरोप है कि फिल्म निर्माण से संबंधित एलएलपी (LLP) संस्थाओं के माध्यम से किए गए समझौतों में लगभग ₹44.7 करोड़ की राशि को लेकर कथित अनियमितताएं हुईं।
एफआईआर में धोखाधड़ी (Cheating), जालसाजी (Forgery) और फिल्म परियोजनाओं से जुड़े धन के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई दौरान शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कोर्ट को बताया कि दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद का समाधान तलाशना चाहते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि समझौते की संभावनाओं को देखते हुए आरोपियों को अंतरिम जमानत दिए जाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
हालांकि कोर्ट ने शिकायतकर्ता के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी भट्ट को नियमित जमानत प्रदान कर दी।
आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने अदालत को बताया कि दोनों पक्ष विवाद सुलझाने के इच्छुक हैं।
उन्होंने यह भी अवगत कराया कि श्वेतांबरी भट्ट को अंतरिम जमानत मिलने के बाद शिकायतकर्ता ने ईमेल लिखकर फिल्म निर्माण से जुड़े संविदात्मक कार्य को पूरा करने की इच्छा जताई है।
राज्य सरकार का विरोध
राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने जमानत का विरोध किया।
उनका कहना था कि मामले की जांच अभी जारी है और अधिकांश गवाह मुंबई में स्थित हैं। ऐसे में आरोपियों के रिहा होने से जांच प्रभावित हो सकती है और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका बनी रहेगी।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि जब शिकायतकर्ता और आरोपी दोनों ही आपसी समझौते की इच्छा जता रहे हैं, तो उन्हें समाधान तलाशने का अवसर दिया जाना चाहिए।
जांच पर नहीं लगर कोई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमित जमानत दिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि जांच पर रोक लगा दी गई है।
जांच एजेंसी को कानून के अनुसार अपनी कार्रवाई जारी रखने की पूरी अनुमति दी गई है। जमानत आदेश से अभियोजन की प्रक्रिया बाधित नहीं होगी।
मामला अब मध्यस्थता केंद्र में
सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता केंद्र को भेज दिया है, जहां दोनों पक्ष आपसी सहमति से समाधान निकालने का प्रयास करेंगे।
यदि मध्यस्थता सफल होती है तो विवाद का शांतिपूर्ण निपटारा संभव हो सकता है, अन्यथा आपराधिक जांच अपनी प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी।