जयपुर/सीकरं सीकर जिले के बहुचर्चित जुराठड़ा के पूर्व सरपंच सरदार राव हत्याकांड में आठ साल बाद आखिरकार न्यायिक फैसला सामने आ गया।
सीकर की विशेष एससी-एसटी कोर्ट की जज रेणुका सिंह हूड़ा ने बुधवार को विस्तृत फैसला सुनाते हुए 11 आरोपियों में से तीन को आजीवन कारावास, छह को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई, जबकि इस मामले में बहुचर्चित गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और यतेंद्र पाल को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया हैं.
इस मामले में एक आरोपी सुभाष बराल अब भी फरार है, जिसके खिलाफ प्रकरण लंबित रखा गया है।
आठ साल बाद आया फैसला, इलाके में रही चर्चा
23 अगस्त 2017 को दिनदहाड़े हुई इस सनसनीखेज हत्या ने पूरे शेखावाटी अंचल को झकझोर दिया था।
चुनावी रंजिश, आपराधिक साजिश और गैंग कनेक्शन जैसे पहलुओं ने इस मामले को लगातार सुर्खियों में बनाए रखा।
आठ वर्षों की लंबी सुनवाई, सैकड़ों तारीखों और दर्जनों गवाहों के बयान के बाद अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर बुधवार को अपना फैसला सुनाया.
आजीवन कारावास की सजा
अदालत ने इस मामले में आरोपी हरविंदर, अरुण और हरदेवाराम को पूर्व सरपंच सरदार राव की हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
अदालत ने फैसले में कहा कि इन तीनों की भूमिका साजिश रचने और हत्या को अंजाम दिलाने में निर्णायक रही।
कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए परिस्थितिजन्य साक्ष्य, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और अन्य दस्तावेजों के आधार पर अदालत ने फैसला सुनाया हैं.
छह दोषियों को 10-10 वर्ष की सजा
अदालत ने इस मामले में आरोपी सुनील, मुकेश, भानु प्रताप, नरेंद्र, कुलदीप और ओमप्रकाश को सहयोगी भूमिका में दोषी ठहराते हुए सभी को 10-10 वर्ष को कठोर कारावास की सजा सुनाई है.
अदालत ने माना कि इन आरोपियों ने मुख्य साजिशकर्ताओं और शूटरों को सहयोग प्रदान किया, जिससे अपराध को अंजाम देने में मदद मिली।
लॉरेंस बिश्नोई और यतेंद्र पाल बरी
मामले में सबसे अधिक चर्चित नाम गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का रहा।
अभियोजन का आरोप था कि मुख्य आरोपी सुभाष बराल के संपर्क में रहते हुए उसने शूटरों की व्यवस्था में मदद की।
हालांकि, अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष लॉरेंस बिश्नोई और यतेंद्र पाल के खिलाफ ऐसे ठोस और प्रत्यक्ष साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, जिनके आधार पर दोषसिद्धि की जा सके।
जिसके चलते अदालत ने दोनों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
फरार आरोपी सुभाष बराल पर मामला लंबित
इस प्रकरण में सुभाष बराल को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया था, जो कथित रूप से आनंदपाल गिरोह से जुड़ा रहा है।
वह वर्तमान में फरार है, ऐसे में अदालत ने उसके विरुद्ध प्रकरण को लंबित रखा है।
अदालत ने पुलिस और अभियोजन को निर्देश दिए गए हैं कि उसकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी रखें।
अभियोजन ने रखे 76 गवाह, 231 दस्तावेज
अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए 76 गवाहों, 231 प्रदर्श दस्तावेजों और 25 आर्टिकल्स को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया।
इनमें प्रत्यक्षदर्शी, चिकित्सकीय साक्ष्य, फॉरेंसिक रिपोर्ट, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और घटनास्थल से बरामद सामग्री शामिल रही। ब
चाव पक्ष ने भी लंबी जिरह और दलीलों के जरिए अभियोजन के साक्ष्यों पर सवाल उठाए।
हुई थी दिनदहाड़े हत्या
23 अगस्त 2017 को पूर्व सरपंच सरदार राव पलसाना कस्बे में नेकीराम की किराना दुकान पर बैठे थे।
दोपहर करीब 12:40 से 12:45 बजे के बीच एक कार दुकान के सामने आकर रुकी।
कार में सवार तीन बदमाशों को पहले से सूचना थी कि सरदार राव वहीं मौजूद हैं। दो युवक कार से उतरकर दुकान में घुसे।
एक ने रिवॉल्वर निकालकर बेहद नजदीक से सरदार राव पर गोली चलाई। इसके तुरंत बाद दूसरे आरोपी ने भी फायर किया। कुछ ही सेकेंड बाद पहला बदमाश पलटा और एक और गोली दाग दी।
करीब 10 सेकेंड में गोलियों की बौछार कर तीनों बदमाश फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल सरदार राव को अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
चुनावी रंजिश बनी हत्या की वजह
सरदार राव वर्ष 2010 से 2014 तक जुराठड़ा के सरपंच रहे थे। ग्राम पंचायत में बराल, जुराठड़ा और दुल्हेपुरा गांव शामिल थे।
वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। बाद में सरकारी शिक्षक हरदेवाराम का पुत्र संदीप सरपंच बना। सरकारी नौकरी लगने के बाद संदीप ने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे सितंबर में उपचुनाव प्रस्तावित थे।
इन उपचुनावों में सरदार राव को एक बार फिर मजबूत प्रत्याशी माना जा रहा था। इसी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और हार के डर ने कथित तौर पर साजिश को जन्म दिया। अभियोजन के अनुसार, हरदेवाराम ने अजमेर जेल में बंद सुभाष बराल से संपर्क कर हत्या की सुपारी दी।
अन्य आपराधिक मामलों का हवाला
अदालत में यह तथ्य भी सामने आया कि हरदेवाराम के खिलाफ पहले से रेप और पॉक्सो एक्ट के मामले दर्ज थे। हालांकि, वर्तमान फैसले में अदालत ने केवल सरदार राव हत्याकांड से संबंधित साक्ष्यों के आधार पर फैसला दिया हैं.