नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के सदस्य बाबूलाल कटारा को पूर्व में दी गई अंतरिम जमानत को रद्द कर दिया है।
राजस्थान सरकार द्वारा बाबूलाल कटारा को मिली अंतरिम जमानत के विरोध में दी गयी दलीलों पर सहमति जताते हुए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया हैं.
राजस्थान के बहुचर्चित पेपरलीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 9 फरवरी 2026 को बाबूलाल कटारा को अंतरिम जमानत दी थी.
सुप्रीम कोर्ट ने अस्थायी अंतरिम जमानत दी थी जिसके खिलाफ में राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इसका कड़ा विरोध किया.
सरकार ने पेश किया रिकॉर्ड
अंतरिम जमानत के खिलाफ राजस्थान सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस.डी. संजय, एएसजी के साथ पैनल अधिवक्ता अनीशा रस्तोगी और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने राज्य सरकार की ओर से विस्तृत काउंटर एफिडेविट (जवाबी हलफनामा) दाखिल किया और अतिरिक्त तथ्यों व दस्तावेजों को कोर्ट के समक्ष रखा, तो अदालत ने पूरे मामले की पुनः गहनता से समीक्षा की।
राज्य सरकार की ओर से पेश किए गए काउंटर एफिडेविट में कई गंभीर बिंदुओं को उठाया गया।
सरकार ने आरोप लगाया गया कि बाबूलाल कटारा ने अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई थी।
राज्य के अनुसार, उनके खिलाफ करीब 5 आपराधिक मामले लंबित हैं, जिनमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मामला भी शामिल है। इन मामलों की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए राज्य ने यह तर्क दिया कि ऐसे व्यक्ति को अंतरिम जमानत जैसी राहत देना न्याय के हित में नहीं है।
राज्य सरकार ने यह भी कहा कि बाबूलाल कटारा एक संवैधानिक संस्था—राजस्थान लोक सेवा आयोग—के सदस्य हैं। ऐसे पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आरोप न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बल्कि व्यापक सार्वजनिक हित पर भी असर डालते हैं। इसलिए, इस मामले को सामान्य आपराधिक मामलों की तरह नहीं देखा जा सकता।
सरकार की दलीलों से सहमत हुआ सुप्रीम कोर्ट
सरकार ने अपने जवाब में कहा कि मामले की गहन जांच के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ (custodial interrogation) आवश्यक हो सकती है। अगर आरोपी को अंतरिम जमानत पर छोड़ा जाता है, तो इससे जांच प्रभावित हो सकती है और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ या गवाहों पर दबाव डालने की आशंका भी बनी रहती है।
राज्य सरकार ने अपने तर्कों में यह भी स्पष्ट किया कि अंतरिम जमानत कोई सामान्य अधिकार नहीं, बल्कि एक अपवादात्मक (exceptional) राहत है, जिसे केवल विशेष परिस्थितियों में ही दिया जाता है।
जब मामले में गंभीर और प्रतिकूल सामग्री सामने आ जाए, तो ऐसी राहत को जारी रखना न्यायिक सिद्धांतों के विपरीत होता है।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने और राज्य द्वारा दाखिल काउंटर एफिडेविट सहित रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बाबूलाल कटारा को दी गई अंतरिम जमानत को रद्द कर दिया हैं.