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अडानी की JAL अधिग्रहण पर सुप्रीम कोर्ट का दखल से इनकार, NCLAT को जल्द सुनवाई के निर्देश

Supreme Court Declines to Halt Adani’s JAL Acquisition, Asks NCLAT to Expedite Hearing

₹14,535 करोड़ के रेजोल्यूशन प्लान पर रोक नहीं; 10 अप्रैल को NCLAT में होगी अहम सुनवाई, अनिल अग्रवाल की वेदांता को सुप्रीम कोर्ट से झटका

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड द्वारा जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के अधिग्रहण से जुड़े मामले में दखल देने से इनकार कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया, जिसमें अडानी के ₹14,535 करोड़ के रेजोल्यूशन प्लान के क्रियान्वयन पर रोक लगाने से इनकार किया गया था।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए NCLAT को निर्देश दिया है कि वह इस अपील पर जल्द से जल्द सुनवाई करे।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि वेदांता लिमिटेड द्वारा दायर अपील पहले से ही 10 अप्रैल को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

क्या है पूरा मामला?

जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) एक संकटग्रस्त कंपनी है, जिसके खिलाफ दिवाला और शोधन अक्षमता प्रक्रिया (Insolvency Resolution Process) चल रही है।

इस प्रक्रिया के तहत अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने ₹14,535 करोड़ का रेजोल्यूशन प्लान पेश किया था, जिसे स्वीकृति मिल चुकी है।

वहीं, वेदांता लिमिटेड ने इस प्रक्रिया और अडानी के प्लान को चुनौती देते हुए NCLAT में अपील दायर की थी और प्लान के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग की थी।

NCLAT ने इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद वेदांता सुप्रीम कोर्ट पहुंची।

सुप्रीम कोर्ट का रुख

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि चूंकि मामला पहले ही NCLAT में अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है, ऐसे में इस स्तर पर हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा।

अदालत ने कहा कि अपीलेट ट्रिब्यूनल ही इस विवाद का उचित मंच है, जहां सभी पक्ष अपनी दलीलें रख सकते हैं।

कोर्ट ने NCLAT को निर्देश दिया कि वह 10 अप्रैल को निर्धारित सुनवाई को प्राथमिकता देते हुए मामले का जल्द निपटारा करे।

मॉनिटरिंग कमेटी पर लगी सीमाएं

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम राहत देते हुए कहा कि JAL की निगरानी कर रही मॉनिटरिंग कमेटी बिना ट्रिब्यूनल की अनुमति के कोई बड़ा नीतिगत फैसला नहीं लेगी।

इस आदेश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतिम निर्णय आने तक कंपनी की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव न हो और सभी पक्षों के हित सुरक्षित रहें।

सभी पक्षों को NCLAT में रखने होंगे तर्क

सुप्रीम कोर्ट ने वेदांता लिमिटेड, अडानी एंटरप्राइजेज और अन्य संबंधित पक्षों को निर्देश दिया कि वे अपने सभी दावे और आपत्तियां NCLAT के समक्ष ही रखें।

अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय अपीलेट ट्रिब्यूनल ही करेगा।

सुनवाई के दौरान कौन-कौन रहे मौजूद?

इस मामले की सुनवाई के दौरान कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पैरवी की.

वेदांता लिमिटेड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और वी. वी. गिरि ने पक्ष रखा
JAL के लेनदारों की समिति (Committee of Creditors) की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वरिष्ठ अधिवक्ता निरंजन रेड्डी और अधिवक्ता बिस्वजीत दुबे उपस्थित रहे

अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और रितिन राय ने पैरवी की

10 अप्रैल की सुनवाई होगी निर्णायक

अब इस पूरे मामले की नजर 10 अप्रैल को होने वाली NCLAT की सुनवाई पर टिकी है।

यह सुनवाई जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के रेजोल्यूशन प्रोसेस की दिशा तय कर सकती है।

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