टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

राजस्थान में पंचायत चुनाव में देरी मामले में सुप्रीम कोर्ट का दखल से इनकार, SLP खारिज; कहा-उचित मंच पर जाएं याचिकाकर्ता

Supreme Court Rejects Bail in ₹2 Crore Digital Arrest Scam Case; Accused Linked to Similar Gujarat Fraud

15 अप्रैल तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के मुद्दे पर दायर याचिका पर सुनवाई से इंकार; सुप्रीम कोर्ट ने दी हाईकोर्ट या सक्षम मंच जाने की स्वतंत्रता

नई दिल्ली, 12 मार्च 2026। राजस्थान में पंचायत चुनाव प्रक्रिया में कथित देरी को लेकर दायर याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने अहम रुख अपनाते हुए हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया।

सु्प्रीम कोर्ट ने इस मामले में दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज करते हुए कहा कि इस चरण पर अदालत इस मामले में दखल देने के लिए इच्छुक नहीं है।

हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी कि यदि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े निर्देशों के उल्लंघन को लेकर कोई शिकायत है तो वह कानून के अनुसार उचित मंच के समक्ष जा सकता है।

बिहारी लाल रणवा की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने यह आदेश दिया हैं.

चुनाव में देरी का आरोप, सुप्रीम कोर्ट से मांगा हस्तक्षेप

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंकुर रस्तोगी ने दलील दी कि राजस्थान राज्य सरकार पंचायत चुनाव प्रक्रिया को जानबूझकर विलंबित कर रही है। उन्होंने अदालत को बताया कि इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष यह आश्वासन दिया गया था कि पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया 15 अप्रैल 2026 तक संपन्न कर ली जाएगी।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि चुनाव प्रक्रिया में अनावश्यक देरी लोकतांत्रिक व्यवस्था और स्थानीय स्वशासन के सिद्धांतों के खिलाफ है। इसलिए शीर्ष अदालत को हस्तक्षेप करते हुए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि राज्य सरकार निर्धारित समयसीमा के भीतर पंचायत चुनाव संपन्न कराए।

राज्य सरकार ने रखा अपना पक्ष

वहीं राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने अदालत के समक्ष राज्य का पक्ष रखा।

उन्होंने बताया कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं जारी हैं तथा राज्य सरकार अदालत के आदेशों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप ही कार्य कर रही है।

राज्य की ओर से यह भी कहा गया कि चुनाव कराने से संबंधित प्रक्रियाएं कई प्रशासनिक चरणों से गुजरती हैं और इन्हें पूरा करने में कुछ समय लगना स्वाभाविक है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा—इस चरण पर दखल नहीं

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस समय अदालत इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए इच्छुक नहीं है। अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता को यह शिकायत है कि 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने संबंधी उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है, तो वह संबंधित उच्च न्यायालय या किसी अन्य सक्षम मंच के समक्ष उचित कानूनी उपाय अपना सकता है।

पीठ ने यह भी संकेत दिया कि इस तरह के मामलों में पहले उचित मंच के समक्ष राहत मांगी जानी चाहिए और सीधे सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग करना हमेशा आवश्यक नहीं होता।

सबसे अधिक लोकप्रिय