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जोजरी-लूणी नदी प्रदूषण मामले कमेटी रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित, कमेटी और राजस्थान सरकार के प्रयासों की सराहना

Supreme Court Praises Rajasthan Government & Committee in Jojari River Pollution Case, Orders Reserved

नई दिल्ली, 18 मार्च 2026। पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा मानी जाने वाली जोजरी–बांडी–लूणी नदी प्रणाली में प्रदूषण और पर्यावरणीय क्षरण के गंभीर मामले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई।

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार की ओर से पेश किए गए हलफनामे (Compliance Affidavit) को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाई-लेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों की खुलकर सराहना की।

सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।

आज अदालत में क्या हुआ

सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) शिव मंगल शर्मा ने कोर्ट के समक्ष अनुपालन रिपोर्ट पेश की।

सरकार की ओर से बताया गया कि कमेटी द्वारा अपनी पहली रिपोर्ट में उठाए गए सभी प्रशासनिक और लॉजिस्टिक मुद्दों का समाधान राज्य सरकार ने कर दिया है।

सरकार ने कमेटी के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक ढांचा उपलब्ध कराते हुए एक आरएएस अधिकारी को रजिस्ट्रार-कम-नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त किया है।

इसके अलावा एक पूर्णकालिक सीनियर लीगल रिसर्चर और स्टेनोग्राफर की भी नियुक्ति की गई है, ताकि कोर्ट के निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

कोर्ट को यह भी बताया गया कि कमेटी को राज्य सरकार के विभिन्न विभागों का पूरा सहयोग मिल रहा है और उसने जोधपुर, पाली और बालोतरा सहित प्रभावित जिलों में व्यापक फील्ड निरीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन पहले ही शुरू कर दिया है।

उद्योग और केंद्र सरकार की भी सहमति

इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि उद्योगों की ओर से पेश हुए अधिवक्ता विनय कोठारी ने कमेटी की सिफारिशों पर कोई आपत्ति नहीं जताई।

वहीं पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF) की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे ने भी कमेटी की सिफारिशों का समर्थन किया।

मामला क्यों है महत्वपूर्ण

यह मामला जोजरी–बांडी–लूणी नदी प्रणाली में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण से जुड़ा है, जो मुख्यतः औद्योगिक अपशिष्ट (Industrial Effluents) और बिना उपचारित सीवेज के कारण फैल रहा है।

इस प्रदूषण ने पश्चिमी राजस्थान के कई इलाकों में गंभीर प्रभाव डाले हैं, जिनमें कृषि भूमि की उर्वरता घट गई है, भूजल प्रदूषित हो चुका है, स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान पहुंचा है और आम जनता के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट में अब तक का घटनाक्रम

16 सितंबर 2025:

सुप्रीम कोर्ट ने जोजरी नदी में प्रदूषण के मुद्दे पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया। यह कदम तब उठाया गया जब नदी के दूषित होने से बड़ी आबादी प्रभावित हो रही थी।

9 अक्टूबर 2025:

कोर्ट ने इस मामले को पाली, बालोतरा और जोधपुर में औद्योगिक प्रदूषण से जुड़े अन्य मामलों के साथ क्लब करने का आदेश दिया।

21 नवंबर 2025:

सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस संगीतम लोढ़ा की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी का गठन किया।

इस कमेटी को नदी के पुनर्जीवन के लिए ठोस कदम सुझाने और उनकी निगरानी करने की जिम्मेदारी दी गई।

10 मार्च 2026:

कमेटी ने अपनी पहली विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में पेश की।

इस रिपोर्ट पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कुछ प्रशासनिक आवश्यकताओं की ओर ध्यान दिलाया और राज्य सरकार को उन्हें पूरा करने का समय दिया।

उसी दिन कोर्ट ने AAG शिव मंगल शर्मा की सहायता की भी सराहना की और कहा कि राज्य सरकार इस मामले में सहयोगात्मक भूमिका निभा रही है, न कि इसे केवल विवाद के रूप में देख रही है।

कमेटी की रिपोर्ट में क्या सामने आया

कमेटी की पहली स्टेटस रिपोर्ट में कई गंभीर खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार—

नदी में बड़े पैमाने पर औद्योगिक अपशिष्ट छोड़ा जा रहा है।

कई स्थानों पर बिना ट्रीटमेंट के सीवेज सीधे नदी में डाला जा रहा है।

इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट्स (ETPs) और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STPs) पर्याप्त रूप से काम नहीं कर रहे हैं।

कई अवैध डिस्चार्ज पॉइंट्स सक्रिय हैं।

कमेटी ने नदी बेसिन के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों, ट्रीटमेंट प्लांट्स और प्रभावित गांवों का विस्तृत निरीक्षण किया और पर्यावरणीय क्षति का व्यापक दस्तावेज तैयार किया।

दीर्घकालिक समाधान की दिशा में कदम

कमेटी ने केवल मौजूदा स्थिति का आकलन ही नहीं किया, बल्कि दीर्घकालिक समाधान के लिए भी ठोस सुझाव दिए हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

जोजरी–बांडी–लूणी नदी प्रणाली के पुनर्जीवन के लिए वैज्ञानिक और समयबद्ध ब्लूप्रिंट तैयार करना।

प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त निगरानी तंत्र विकसित करना।

औद्योगिक इकाइयों के लिए कड़े अनुपालन मानदंड लागू करना।

जल शोधन संयंत्रों की क्षमता और कार्यक्षमता बढ़ाना।

राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इन सिफारिशों को लागू करने के लिए अपनी सहमति भी व्यक्त की है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और कमेटी के प्रयासों को जनहित में उठाया गया सकारात्मक कदम बताते हुए सराहा।

कोर्ट ने यह भी कहा कि भविष्य में भी राज्य सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से इसी प्रकार के सहयोग की अपेक्षा है।

आगे क्या होगा

सभी पक्षों की दलीलें सुनने और कमेटी की सिफारिशों पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।

ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार होगा।

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