नई दिल्ली, 7 नवंबर 2025
प्रदेश की जोजड़ी, लूणी और बांदी नदियों में बढ़ते प्रदूषण को लेकर Supreme Court ने सख्त नाराज़गी जताई है।
शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने राजस्थान सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा को आदेश दिया कि वे राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों से स्पष्ट निर्देश लें कि क्या वे 2022 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेश के खिलाफ दायर अपीलों को वापस लेना चाहते हैं या नहीं।
पूरी जानकारी है
Supreme Court ने राज्य सरकार को एक सप्ताह का समय देते हुए कहा कि वह जोजड़ी, लूणी और बांदी नदियों में प्रदूषण की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
Supreme Court ने कहा, “हमें तीनों नदियों में प्रदूषण की गंभीरता की पूरी जानकारी है, और हम इस पर सख्त आदेश जारी करेंगे।”
स्वप्रेरणा से लिए गए प्रसंज्ञान पर दायर जनहित याचिका में Supreme Court ने इन नदियों में बढ़ते प्रदूषण पर गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि लाखों लोगों का जीवन खतरे में है।
Supreme Court जनहित याचिका के साथ ही RIICO, बालोतरा नगर परिषद, पाली नगर परिषद और जोधपुर नगर निगम द्वारा NGT के 25 फरवरी 2022 के आदेश के खिलाफ दायर अपीलों पर भी सुनवाई कर रहा है।
दंड उचित था
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने बताया कि NGT ने RIICO, बालोतरा, पाली और जोधपुर की संस्थाओं पर ₹2-2 करोड़ का जुर्माना लगाया है।
जिस पर Supreme Court ने कहा, “वह दंड उचित था, और हम इस पर भी विचार करेंगे।”
Supreme Court ने स्पष्ट किया कि राज्य को अब निर्णायक रुख अपनाना होगा, क्योंकि औद्योगिक और घरेलू अपशिष्ट से नदियों में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। कोर्ट ने कहा कि यदि अपीलों का कोई औचित्य नहीं है, तो सरकार को उन्हें वापस लेने पर विचार करना चाहिए।