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सुप्रीम कोर्ट ने जोजरी नदी प्रदूषण पर लिया स्वतः संज्ञान, सैकड़ों गांवों पर संकट

नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की जोजरी नदी में औद्योगिक कचरे के सीधे बहाव पर स्वत: संज्ञान लेते हुए गहरी चिंता जताई-

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कपड़ा और टाइल उद्योगों से निकलने वाला अनुपचारित गंदा पानी नदी को इस कदर दूषित कर चुका है कि सैकड़ों गांवों का जीवन संकट में पड़ गया है। इंसानों और मवेशियों दोनों के लिए यह पानी अब पीने योग्य नहीं रहा।

बेंच की सख्त टिप्पणी

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि जोजरी नदी में गिर रहा औद्योगिक अपशिष्ट ग्रामीणों और पशुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है.

अदालत ने टिप्पणी की-“हम इस मामले का स्वत: संज्ञान ले रहे हैं, क्योंकि यह केवल एक नदी का सवाल नहीं, बल्कि सैकड़ों गांवों के जीवन और उनके पीने के पानी के अधिकार का सवाल है।”

पर्यावरण, स्वास्थ्य और आजीविका पर असर

नदी का दूषित जल पीने से ग्रामीणों में पेट संबंधी बीमारियां और त्वचा रोग फैल रहे हैं-

मवेशी बीमार हो रहे हैं, जिससे खेती और पशुपालन पर आधारित स्थानीय अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है. यह हालात ग्रामीण जीवन को हर स्तर पर चोट पहुँचा रहे हैं।

कोर्ट ने माना कि प्रदूषण का असर सिर्फ इंसानों और पशुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरा पारिस्थितिकी तंत्र इसकी चपेट में है.

दूषित पानी खेतों की सिंचाई तक जा रहा है और भूजल को भी नुकसान पहुंचा रहा है। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी का संकट और गंभीर हो जाएगा।

मुख्य न्यायाधीश के पास जाएगी फाइल

मामले की गंभीरता को देखते हुए बेंच ने निर्देश दिया कि यह मुद्दा मुख्य न्यायाधीश (CJI) के समक्ष रखा जाए ताकि आगे की कार्रवाई तय की जा सके.

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि नागरिकों का स्वच्छ जल और स्वस्थ पर्यावरण का मौलिक अधिकार हर हाल में सुरक्षित रहना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट का यह स्वत: संज्ञान न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए एक संदेश है-विकास जरूरी है, लेकिन प्रकृति और स्वास्थ्य की कीमत पर नहीं।

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