नई दिल्ली: देशभर में ऑनलाइन और ऑफलाइन बेटिंग ऐप्स पर रोक लगाने की मांग से जुड़ी याचिकाओं पर अब सुप्रीम कोर्ट अंतिम सुनवाई करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से कहा है कि वे जल्द अपनी लिखित दलीलें और जवाब पूरे करें, ताकि मामले की अंतिम सुनवाई शुरू की जा सके।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह निर्देश दिया। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने बेटिंग ऐप्स पर रोक लगाने या किसी पक्ष के दावों पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है।
सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ यह सुनिश्चित करने को कहा है कि सुनवाई से पहले सभी जरूरी दस्तावेज और जवाब रिकॉर्ड पर आ जाएं।
इस मामले में केंद्र सरकार, गूगल इंडिया, एप्पल इंडिया, ट्राई, ड्रीम इलेवन, मोबाइल प्रीमियर लीग, ए-23 गेम्स समेत कई पक्षों को पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका है।
अब सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद मामले पर विस्तार से सुनवाई होगी।
बेटिंग ऐप्स पर विवाद क्यों?
यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और ईसाई प्रचारक के.ए. पॉल तथा सेंटर फॉर अकाउंटेबिलिटी एंड सिस्टमिक चेंज (सीएएससी) ने दायर की है।
याचिका में केंद्र सरकार को ऑनलाइन और ऑफलाइन बेटिंग समेत जुए से जुड़े प्लेटफॉर्म पर रोक लगाने या उन्हें नियंत्रित करने के लिए पूरे देश में एक समान कानून बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म खुद को सोशल गेम या ई-स्पोर्ट्स गेम के रूप में पेश करते हैं, जबकि उनके जरिए बेटिंग और जुए जैसी गतिविधियां संचालित होती हैं।
उनका आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था में ऐसे प्लेटफॉर्म पर विशेष निगरानी नहीं है।
याचिका में क्या कहा गया?
याचिका में दावा किया गया है कि बेटिंग ऐप्स का प्रचार बड़े क्रिकेटर, अभिनेता और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर करते हैं।
इससे बड़ी संख्या में बच्चे और युवा इन प्लेटफॉर्म की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आकर्षक विज्ञापनों और बड़े इनाम के दावों के कारण कई लोग आर्थिक नुकसान उठा चुके हैं।
उनका आरोप है कि कई परिवार कर्ज के जाल में फंस गए। वहीं बेटिंग की लत ने सामाजिक और आर्थिक समस्याएं बढ़ा दी हैं।
याचिका में यह भी कहा गया है कि देशभर में हजारों परिवार अनियमित बेटिंग प्लेटफॉर्म की वजह से प्रभावित हुए हैं। इसलिए केंद्र सरकार को पूरे देश के लिए स्पष्ट और एक समान कानून बनाना चाहिए।
मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप
याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि कुछ अनियमित बेटिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और काले धन के लेनदेन के लिए किया जा सकता है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ऐसी गतिविधियां धन शोधन रोकथाम कानून के प्रावधानों का उल्लंघन हो सकती हैं।
इसके अलावा याचिका में कुछ राज्यों में बेटिंग से जुड़े मामलों में आत्महत्या और भारी आर्थिक नुकसान की घटनाओं का भी जिक्र किया गया है।
हालांकि, इन सभी आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने अभी कोई निष्कर्ष नहीं निकाला है और न ही उनकी सत्यता पर कोई टिप्पणी की है।
किन-किन पक्षों से मांगा जवाब?
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही केंद्र सरकार के अलावा गूगल इंडिया, एप्पल इंडिया, भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई), ड्रीम इलेवन, मोबाइल प्रीमियर लीग, ए-23 गेम्स समेत कई पक्षों से जवाब मांग चुका है।
इन पक्षों से पूछा गया है कि याचिका में उठाए गए मुद्दों पर उनका क्या पक्ष है।
अब कोर्ट ने सभी से अपनी दलीलें जल्द पूरी करने को कहा है, ताकि अंतिम सुनवाई में सभी पक्षों की बात एक साथ सुनी जा सके।
अब होगी अंतिम सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सभी पक्षों को अपने जवाब और लिखित दलीलें पूरी करनी होंगी। इसके बाद मामले की अंतिम सुनवाई शुरू होगी।
अंतिम सुनवाई के दौरान कोर्ट यह देखेगा कि ऑनलाइन और ऑफलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म को लेकर मौजूदा कानूनी व्यवस्था पर्याप्त है या नहीं।
साथ ही यह भी विचार किया जाएगा कि पूरे देश में एक समान कानून बनाने की जरूरत है या नहीं।
सुनवाई में यह सवाल भी अहम रहेगा कि सोशल गेम, फैंटेसी गेम और बेटिंग प्लेटफॉर्म के बीच कानूनी अंतर कैसे तय किया जाए।
इसके अलावा सेलिब्रिटी और इन्फ्लुएंसर के विज्ञापनों से जुड़े मुद्दों पर भी बहस हो सकती है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इन मुद्दों पर कोई राय नहीं दी है। सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ सभी पक्षों को अपनी दलीलें पूरी करने का निर्देश दिया है।
अंतिम सुनवाई के बाद ही यह साफ होगा कि इस मामले में आगे क्या दिशा तय होती है।