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अमरूदों का बाग-जनपथ में रैली-मेले-समारोह पर रोक बरकरार: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से किया इनकार

Supreme Court Refuses to Interfere with Rajasthan High Court Directions on Amrudon Ka Bagh and Janpath Event & Traffic Regulation

जयपुर के संवेदनशील संस्थागत क्षेत्र में ट्रैफिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों के नियमन पर बड़ा फैसला; राज्य सरकार को 8 सप्ताह में वैधानिक आदेश जारी करने की छूट

नई दिल्ली / जयपुर। जयपुर के अमरूदों का बाग, अंबेडकर सर्किल और जनपथ क्षेत्र में सार्वजनिक कार्यक्रमों और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि इन क्षेत्रों में सार्वजनिक कार्यक्रमों और यातायात के नियमन से संबंधित हाईकोर्ट के आदेश फिलहाल प्रभावी रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे ने प्रशासक जस्टिस (सेवानिवृत्त) सुदर्शन कुमार मिश्रा और एसएमएस इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन की ओर से दायर याचिकाओं का निस्तारण करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया।

राज्य सरकार को दी छूट

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने पक्ष रखा।

सरकार का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने राज्य सरकार को यह छूट दी कि वह जयपुर के संबंधित क्षेत्र में ट्रैफिक को नियंत्रित करने या आवश्यक प्रतिबंध लगाने के लिए कानून के तहत नया वैधानिक आदेश आठ सप्ताह के भीतर जारी कर सकती है।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य सरकार कोई नया आदेश जारी करती है तो वह कानून के अनुसार न्यायिक समीक्षा के अधीन रहेगा।

ट्रैफिक जाम और अव्यवस्था से शुरू हुआ मामला

यह पूरा मामला राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा 5 सितंबर 2018 को शुरू की गई स्वतः संज्ञान कार्यवाही से जुड़ा है।

उस समय अमरूदों का बाग में आयोजित एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम के कारण पूरे इलाके में भीषण ट्रैफिक जाम लग गया था।

इस जाम के कारण वकीलों, मुकदमेबाजों और यहां तक कि न्यायाधीशों को भी समय पर हाईकोर्ट पहुंचने में गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ा था।

इतना ही नहीं, आसपास स्थित अस्पतालों तक एंबुलेंस के पहुंचने में भी बाधा उत्पन्न हुई थी, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई थी।

इन हालात को देखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की और सार्वजनिक कार्यक्रमों तथा ट्रैफिक नियंत्रण को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिए थे।

हाईकोर्ट ने दिए थे सख्त निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि अमरूदों का बाग और उसके आसपास के क्षेत्रों में कार्यालय समय के दौरान किसी भी प्रकार की सभा, रैली, प्रदर्शनी या बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों की अनुमति नहीं दी जाएगी।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि अंबेडकर सर्किल और आसपास के महत्वपूर्ण संस्थागत क्षेत्रों को जोड़ने वाली सड़कों पर ट्रैफिक को किसी भी स्थिति में रोका या डायवर्ट नहीं किया जाएगा।

हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि इस क्षेत्र में स्थित अदालतों, अस्पतालों और सरकारी कार्यालयों के सुचारू संचालन के लिए ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

क्षेत्र पहले से ही साइलेंस जोन

मामले की आगे की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि अमरूदों का बाग और आसपास का क्षेत्र पहले से ही नॉइज पॉल्यूशन (रेगुलेशन एंड कंट्रोल) रूल्स, 2000 के तहत साइलेंस जोन घोषित है।

अदालत ने कहा था कि ऐसे क्षेत्रों में शोर-शराबे वाले कार्यक्रम आयोजित करना न केवल कानून के विरुद्ध है बल्कि इससे आसपास स्थित अस्पतालों, अदालतों और सरकारी कार्यालयों के कामकाज पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

राज्य सरकार ने आदेश लागू किया

हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद जयपुर पुलिस आयुक्त ने 8 सितंबर 2018 को आदेश जारी किया था, जिसमें अमरूदों का बाग और अंबेडकर सर्किल के आसपास कार्यदिवसों के दौरान किसी भी प्रकार की सभा, रैली, कार्यक्रम या प्रदर्शनी आयोजित करने पर रोक लगा दी गई थी।

इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया गया कि इस क्षेत्र की मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक निर्बाध रूप से चलता रहे और किसी भी कार्यक्रम के कारण यातायात बाधित न हो।

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश सार्वजनिक हित में हैं और संबंधित क्षेत्रों को पहले ही साइलेंस जोन और नो-वेंडिंग जोन घोषित किया जा चुका है।

हाईकोर्ट का अंतिम फैसला

राजस्थान हाईकोर्ट ने 8 मार्च 2019 को अपने अंतिम फैसले में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि 8 सितंबर 2018 के आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

अदालत ने यह भी कहा था कि जिन क्षेत्रों को साइलेंस जोन घोषित किया गया है, विशेषकर अस्पतालों, अदालतों और सरकारी कार्यालयों के आसपास, वहां कार्यक्रमों के आयोजन को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाएं निस्तारित की

राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए प्रशासक जस्टिस (सेवानिवृत्त) सुदर्शन कुमार मिश्रा और एसएमएस इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने दोनों याचिकाओं को निस्तारित करते हुए साफ कर दिया कि वह राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देशों में हस्तक्षेप करने के लिए इच्छुक नहीं है।

इस फैसले के साथ ही जयपुर के जनपथ, अंबेडकर सर्किल और अमरूदों का बाग के आसपास स्थित संवेदनशील संस्थागत क्षेत्र में ट्रैफिक और सार्वजनिक आयोजनों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा तय किया गया नियामक ढांचा फिलहाल बरकरार रहेगा।

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