नई दिल्ली। उन्नाव बलात्कार मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ी राहत देने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।
सोमवार को मामले की विशेष सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन विशेष पीठ ने स्पष्ट किया कि सेंगर को फिलहाल सज़ा निलंबन के आधार पर रिहा नहीं किया जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने विशेष सुनवाई के दौरान कहा कि सामान्य परिस्थितियों में सुप्रीम कोर्ट बिना आरोपी को सुने, निचली अदालत या हाई कोर्ट द्वारा दी गई ज़मानत पर रोक नहीं लगाता। लेकिन इस मामले में परिस्थितियां अलग और गंभीर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुलदीप सिंह सेंगर को केवल बलात्कार के मामले में ही नहीं, बल्कि भारतीय दंड संहिता की धारा 304-II के तहत भी सज़ा सुनाई गई है, जो महिला के पिता की गैर-इरादतन हत्या से जुड़ा हुआ है।
हाईकोर्ट का आदेश और विरोध
इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 दिसंबर को कुलदीप सिंह सेंगर की सज़ा निलंबित करते हुए उन्हें ज़मानत दे दी थी। हाई कोर्ट की बेंच ने 15 लाख रुपये के निजी मुचलके और उतनी ही राशि के तीन ज़मानतदारों की शर्त पर रिहाई का आदेश दिया था।
साथ ही यह शर्त भी रखी गई थी कि ज़मानत अवधि के दौरान सेंगर, सर्वाइवर से पांच किलोमीटर के दायरे में नहीं आएंगे और दिल्ली में ही रहेंगे।
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के सामने आते ही व्यापक विरोध शुरू हो गया।
रेप सर्वाइवर, उनकी मां, महिला अधिकार कार्यकर्ता योगिता भयाना सहित कई सामाजिक संगठनों और विपक्षी नेताओं इस फैसले के खिलाफ खुलकर बयानबाजी कर प्रदर्शन भी किया.
दूसरी तरफ सोशलमीडिया पर भी सरकार और कोर्ट के फैसले को लेकर खुलकर नाराजगी सामने आई.
दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के कुछ ही घंटों बाद सर्वाइवर ने अपनी मां और समर्थकों के साथ इंडिया गेट पर प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सेंगर को ज़मानत दी गई है, ताकि उनकी पत्नी को चुनावी लाभ मिल सके।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि मामले की प्रकृति, अपराध की गंभीरता और उससे जुड़े तथ्यों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। अदालत ने साफ किया कि यह आदेश केवल अंतरिम है और मामले में आगे विस्तृत सुनवाई की जाएगी।
उन्नाव मामला और तारीखें
उन्नाव बलात्कार मामला देश के सबसे संवेदनशील और चर्चित मामलों में से एक रहा है। साल 2019 में ट्रायल कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को नाबालिग लड़की के बलात्कार का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी और 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि एक जनप्रतिनिधि होने के बावजूद सेंगर ने जनता के विश्वास को तोड़ा और उनके कृत्य किसी भी तरह की नरमी के योग्य नहीं हैं।