राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा सम्मेलन के दूसरे सत्र में बोले जस्टिस वराले — “नैतिकता, जिम्मेदारी और तकनीक का संतुलन ही भविष्य के न्याय की पहचान बनेगा”
जयपुर, 21 फरवरी 2026 | सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस पी. बी. वराले ने देश में बढते साइबर अपराधों को लेकर अपनी चिंता जताते हुए कहा कि “साइबर सुरक्षा अब सिर्फ तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी है।”
रालसा की तीन दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेस के दूसरे तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए जस्टिस वराले ने अपने बेबाक शब्दों में कहा कि —
“साइबर अपराध हमारे समय की सबसे बड़ी चुनौती है। लेकिन यह चुनौती ही हमारे न्यायिक और सामाजिक तंत्र को नया रूप देने का अवसर भी है। हमें प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि पूर्व-निवारक (Proactive) दृष्टिकोण अपनाना होगा — तकनीकी उन्नयन, डेटा साझाकरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को हमारी प्राथमिकता बनाना होगा।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि सिर्फ कानून बनाना काफी नहीं, बल्कि तकनीक के नैतिक और जिम्मेदार उपयोग को भी समान महत्व देना होगा।
जस्टिस पी बी वराले ने कहा कि
“हर हितधारक — चाहे वह सरकार हो, न्यायपालिका, पुलिस या आम नागरिक — सभी को मिलकर डिजिटल स्पेस में भरोसा, पारदर्शिता और जिम्मेदारी की संस्कृति बनानी होगी।”
जस्टिस वराले ने आगे कहा कि यह दौर “डिजिटल जस्टिस” का है, जिसमें अदालतों और संस्थाओं को आधुनिक तकनीक से लैस करते हुए संविधानिक मूल्यों की जड़ से जुड़े रहना होगा।
उन्होंने सम्मेलन में मौजूद न्यायाधीशों, विधिक विशेषज्ञों और साइबर विशेषज्ञों की उपस्थिति की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि यह मंच “नीति निर्माण से लेकर व्यवहारिक समाधान तक” ठोस दिशा देगा।
जस्टिस वराले ने अपने संबोधन के अंत में प्रसिद्ध पंक्त्यिों को याद करते हुए कहा कि
“सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना मेरा मक़्सद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।”