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प्रमोशन, ट्रांसफर, कॉलेजियम, फुल कोर्ट, सीनियर एडवोकेट और शनिवार कार्यदिवस: प्रदेश की न्यायपालिका के लिए अगले तीन दिन बेहद महत्वपूर्ण

Rajasthan High Court Collegium Nears Final Decision on Judges Appointment

जयपुर। राजस्थान की न्यायपालिका के लिए आने वाले तीन दिन अत्यंत निर्णायक साबित हो सकते हैं। प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर कई अहम फैसलों की संभावनाओं के बीच Rajasthan High Court की कार्यप्रणाली पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।

प्रदेश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सहित तीन वरिष्ठ न्यायाधीश आज से जयपुर पीठ में सुनवाई करेंगे।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने 28 अप्रैल के एक आदेश के जरिए जोधपुर मुख्यपीठ से दो वरिष्ठ जजों जस्टिस पी.एस. भाटी और जस्टिस वीनित माथुर को 5 से 8 मई तक जयपुर पीठ में सिटिंग के लिए नामित किया है।

हालांकि, जोधपुर और जयपुर के बीच जजों का स्थानांतरण और सिटिंग एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इस बार की स्थिति कई मायनों में अलग मानी जा रही है।

ट्रांसफर लिस्ट का काउंटडाउन

पिछले डेढ़ महीने से न्यायिक अधिकारियों की तबादला सूची लगातार टलती आ रही है। पहले राष्ट्रीय लोक अदालत और उसके बाद Chief Justice of India के राजस्थान दौरे के कारण यह प्रक्रिया स्थगित रही।

अब यह संभावना जताई जा रही है कि लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे न्यायिक अधिकारियों को राहत मिल सकती है और हाईकोर्ट की प्रशासनिक कमेटी इन तीन दिनों में तबादला सूची को अंतिम रूप देकर जारी कर सकती है।

150 से अधिक प्रमोशन की तैयारी

राजस्थान हाईकोर्ट में न्यायिक अधिकारियों के प्रमोशन लंबे समय से लंबित हैं। इस संबंध में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने हाल ही में सभी लंबित मामलों की सूची तलब की थी।

इसके बाद से हाईकोर्ट प्रशासन ने पिछले एक माह में सभी प्रमोशन फाइलों को व्यवस्थित किया है। सूत्रों के अनुसार, 150 से अधिक अधिकारियों के प्रमोशन पर निर्णय लिया जा सकता है। साथ ही, वे मामले भी विचाराधीन हो सकते हैं जो अदालतों में लंबित हैं।

कॉलेजियम की बैठक की संभावना

प्रदेश में नए जजों की नियुक्ति को लेकर भी लंबे समय से इंतजार बना हुआ है। कई अधिवक्ता न्यायाधीश बनने की दौड़ में शामिल हैं।

राजस्थान हाईकोर्ट के तीन वरिष्ठ न्यायाधीश कॉलेजियम के सदस्य होते हैं और इस सप्ताह तीनों का जयपुर में मौजूद रहना महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

संभावना है कि कॉलेजियम अधिवक्ताओं की योग्यता, अनुभव और कार्यशैली का अंतिम मूल्यांकन कर सकता है।

शनिवार कार्यदिवस पर गतिरोध

पिछले चार महीनों से हाईकोर्ट में प्रत्येक माह के दो शनिवार को कार्यदिवस घोषित किए जाने को लेकर बार और बेंच के बीच टकराव बना हुआ है।

जहां हाईकोर्ट ने फुल कोर्ट के निर्णय के आधार पर शनिवार को कार्यदिवस घोषित किया है, वहीं तीनों बार एसोसिएशनों ने इन दिनों न्यायिक बहिष्कार का ऐलान किया हुआ है।

हाल ही में सीजेआई के दौरे के दौरान भी हाईकोर्ट ने बार से अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था। अब संभावना है कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और वरिष्ठ जज इस मुद्दे पर समाधान निकालने की रणनीति बना सकते हैं।

सीनियर एडवोकेट नामांकन की कवायद

हाईकोर्ट प्रशासन ने हाल ही में प्रदेश के अधिवक्ताओं से सीनियर एडवोकेट नामित करने के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदकों की सूची भी जारी की जा चुकी है।

ऐसे में माना जा रहा है कि वरिष्ठ जजों की कमेटी अगले तीन दिनों में इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए नामों को अंतिम रूप दे सकती है।

फुल कोर्ट बैठक की संभावित तारीख

राजस्थान हाईकोर्ट की पिछली फुल कोर्ट बैठक दिसंबर के दूसरे सप्ताह में जैसलमेर में हुई थी। इसके बाद कई अनुशासनात्मक मामलों पर निर्णय लंबित हैं।

साथ ही, शनिवार कार्यदिवस का मुद्दा भी फुल कोर्ट के समक्ष रखा जाना है। ऐसे में संभावना है कि आगामी फुल कोर्ट बैठक की तारीख इन्हीं दिनों तय की जा सकती है, जो संभवतः जून या जुलाई में आयोजित होगी।

सीमित समय में बड़े फैसलों की चुनौती

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा 26 सितंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। परंपरागत रूप से वे 26 अगस्त के बाद कोई बड़ा नीतिगत निर्णय नहीं ले पाएंगे।

ऐसे में उनके पास प्रभावी फैसलों के लिए सीमित समय बचा है। यही कारण है कि आने वाले तीन दिन न्यायपालिका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, जहां ट्रांसफर, प्रमोशन, नियुक्तियां और प्रशासनिक सुधार जैसे बड़े मुद्दों पर ठोस निर्णय सामने आ सकते हैं।

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