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जोधपुर की सफाई व्यवस्था बदहाल! कोर्ट कमिश्नर के 110 किलोमीटर के निरीक्षण में खुली पोल; राजस्थान हाईकोर्ट ने मामला बड़ी बेंच को भेजा

Rajasthan High Court Refers Jodhpur Cleanliness Case to Larger Bench After Commissioner Report

जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर शहर की बदहाल होती सफाई व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है।

शहर में जगह-जगह फैले कचरे और सफाई व्यवस्था की कमियों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि एक ही मुद्दे पर अलग-अलग पीठों में सुनवाई उचित नहीं है।

इसी वजह से कोर्ट ने इस मामले को पहले से लंबित जनहित याचिका के साथ जोड़ने और बड़ी बेंच के सामने सुनवाई के लिए पेश करने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि एक ही मुद्दे पर अलग-अलग पीठों में सुनवाई होने से विरोधाभासी आदेश आ सकते है। इसलिए इसे बड़ी बेंच के सामने रखा जाना जरूरी है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त कोर्ट कमिश्नर की प्रारंभिक रिपोर्ट भी पेश की गई।

रिपोर्ट में बताया गया कि करीब 110 किलोमीटर के निरीक्षण और 27 प्रमुख स्थानों के दौरे के दौरान शहर के कई हिस्सों में गंदगी, कचरे के ढेर और सफाई व्यवस्था की गंभीर कमियां सामने आईं।

रिपोर्ट में खास तौर पर पुराने शहर की सफाई व्यवस्था और कचरा संग्रहण प्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं।

जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने मामले में रजिस्ट्री को निर्देश दिए कि इस याचिका को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के सामने रखा जाए, ताकि इसे पहले से लंबित जनहित याचिका के साथ जोड़कर एक साथ सुनवाई की जा सके।

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शुल्क वसूला, लेकिन सफाई नहीं मिली

याचिका में कहा गया कि स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में रहना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। ऐसे में लोगों को साफ-सुथरा शहर और बेहतर सफाई व्यवस्था उपलब्ध कराना राज्य सरकार और नगर निगम की जिम्मेदारी है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था इस जिम्मेदारी पर खरी नहीं उतर रही है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शीतल कुंभट और अधिवक्ता अभिषेक मेहता ने कोर्ट को बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहरवासियों से नियमित रूप से कचरा संग्रहण शुल्क वसूला जा रहा है।

याचिका में कहा गया कि घरेलू उपभोक्ताओं से 80 रुपये और व्यावसायिक संस्थानों से 2,000 रुपये तक शुल्क लिया जाता है। लेकिन शुल्क वसूले जाने के बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था में विशेष सुधार दिखाई नहीं दे रहा।

कई इलाकों में कचरे के ढेर लगे हैं और घर-घर से कचरा संग्रहण से लेकर डंपिंग स्थलों तक उसके निस्तारण की व्यवस्था भी प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रही है।

ऐसी स्थिति का सीधा असर आम लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है और कई इलाकों में संक्रमण तथा बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शीतल कुंभट ने कहा कि यह जनहित याचिका किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि जोधपुर शहर के सभी नागरिकों के हित में दायर की गई है।

उन्होंने कहा कि इस याचिका का उद्देश्य नगर निगम और प्रशासन को उनकी जिम्मेदारियों का पालन सुनिश्चित कराना है, ताकि लोगों को बेहतर सफाई व्यवस्था मिल सके।

अधिवक्ता शीतल कुंभट ने यह भी कहा कि अधिवक्ता समाज स्वच्छ भारत मिशन को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने के अभियान में भी सहयोग करेगा।

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110 किलोमीटर के निरीक्षण में दिखी गंदगी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त कोर्ट कमिश्नर अधिवक्ता प्रशांत टाटिया ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट पेश की।

रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने जोधपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों में करीब 110 किलोमीटर का दौरा कर सफाई व्यवस्था का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान 27 प्रमुख स्थानों का निरीक्षण किया गया। इनमें सार्वजनिक पार्क, अस्पताल, बाजार, धार्मिक स्थल, ऐतिहासिक स्मारक और शिक्षण संस्थान शामिल थे।

रिपोर्ट में कई स्थानों पर सफाई व्यवस्था में गंभीर कमियां सामने आईं। कोर्ट के सामने पेश तस्वीरों में भी सार्वजनिक स्थानों पर कचरे के ढेर और गंदगी दिखाई गई।

रिपोर्ट में कहा गया कि शहर के कई सार्वजनिक स्थानों पर सफाई के तय मानकों का पालन नहीं हो रहा है।

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पुराने शहर में सफाई व्यवस्था बदहाल

कोर्ट कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में खास तौर पर पुराने शहर यानी वॉल सिटी क्षेत्र की सफाई व्यवस्था पर चिंता जताई।

रिपोर्ट के अनुसार संकरी गलियों के कारण कई जगह कचरा संग्रहण वाहन नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसकी वजह से लोगों को नियमित कचरा संग्रहण और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं समय पर नहीं मिल रही हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई इलाकों में कचरा समय पर नहीं उठने से गंदगी बढ़ रही है, जिससे संक्रमण और बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है।

कोर्ट कमिश्नर ने सुझाव भी दिए

कोर्ट कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में केवल सफाई व्यवस्था की कमियां ही नहीं गिनाईं, बल्कि उसे सुधारने के लिए कई सुझाव भी दिए।

रिपोर्ट में कहा गया कि लोगों की शिकायतों के तत्काल समाधान के लिए नगर निगम को प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, ताकि सफाई से जुड़ी समस्याओं का समय पर निपटारा हो सके।

रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया कि जनता की शिकायतों के समाधान के लिए कोई ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें जनप्रतिनिधि नियमित रूप से लोगों की समस्याएं सुनें।

निर्वाचित जनप्रतिनिधि तय स्थान और समय पर नियमित रूप से लोगों से मिलें और सफाई समेत नागरिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें सुनें। इससे आम लोगों को अपनी समस्याएं सीधे रखने का अवसर मिलेगा।

सरकार का जवाब

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि इसी मुद्दे पर पहले से एक जनहित याचिका डिवीजन बेंच में लंबित है, जहां शहर की सफाई व्यवस्था की निगरानी के लिए समितियां गठित की जा रही हैं।

हालांकि, कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट में सामने आई कमियों और गंदगी की तस्वीरों पर राज्य सरकार कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी।

इसके बाद हाईकोर्ट ने अलग-अलग पीठों में समानांतर सुनवाई से बचने के लिए इस याचिका को भी पहले से लंबित मामले के साथ जोड़ने का निर्देश दिया।

मामला बड़ी बेंच को भेजा

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि जोधपुर की सफाई व्यवस्था का यही मुद्दा पहले से एक जनहित याचिका में विचाराधीन है। ऐसे में एक ही विषय पर अलग-अलग पीठों में सुनवाई जारी रहने से विरोधाभासी आदेश आने की स्थिति बन सकती है।

इसी वजह से जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि इस याचिका को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाए, ताकि इसे पहले से लंबित जनहित याचिका के साथ जोड़ने पर फैसला लिया जा सके।

अब कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तय करेंगे कि दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ होगी या नहीं।

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