जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने एसआई और प्लाटून कमांडर भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा पास करने के बाद फिजिकल से पहले चोटिल हुए अभ्यर्थियों को राहत दी है।
हाईकोर्ट ने ऐसे अभ्यर्थियों को सितंबर में दोबारा शारीरिक दक्षता परीक्षा देने का मौका दिया है। हालांकि, इसके लिए हर याचिकाकर्ता को 10 हजार रुपए हर्जाना जमा करना होगा।
लिखित परीक्षा पास करने के बाद ये अभ्यर्थी फिजिकल की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान चोट लगने की वजह से उनके सामने भर्ती की आगे की प्रक्रिया से बाहर होने का संकट खड़ा हो गया था।
अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद चोट की वजह से तय तारीख पर फिजिकल नहीं दे पाने वाले अभ्यर्थी सितंबर में फिर परीक्षा दे सकेंगे।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि उन्हें शारीरिक मानकों में कोई छूट नहीं मिलेगी।
उन्हें भर्ती में तय नियमों के मुताबिक ही फिजिकल परीक्षा पास करनी होगी।
यानी कोर्ट ने सिर्फ चोट की वजह से छूटी परीक्षा में शामिल होने का एक और मौका दिया है। फिजिकल के नियम और मानक पहले की तरह ही रहेंगे।
जस्टिस समीर जैन की पीठ ने यज्ञ शुक्ला और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
हाईकोर्ट ने बीमारी, शारीरिक चोट, गर्भावस्था और भारी बारिश जैसी वास्तविक और अनचाही परिस्थितियों के कारण परीक्षा से वंचित रहे अभ्यर्थियों के लिए सितंबर 2026 में दोबारा शारीरिक दक्षता परीक्षा कराने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राहत केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को मिलेगी, जो निर्धारित तारीख पर वास्तविक और उचित कारणों से परीक्षा में उपस्थित नहीं हो सके।
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फिजिकल से पहले पैर में लगी थी चोट
मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि वे SI और प्लाटून कमांडर भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा में सफल होकर शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए चयनित हुए थे।
एक याचिकाकर्ता की दक्षता परीक्षा 7 अगस्त को भरतपुर में निर्धारित थी। लेकिन परीक्षा से कुछ दिन पहले ही 2 अगस्त को प्रैक्टिस के दौरान उसके दाहिने टखने में चोट लग गई।
चोट इतनी गंभीर थी कि डॉक्टरों ने उसे करीब एक महीने तक बेड रेस्ट की सलाह दी।
इसके कारण वह निर्धारित समय पर शारीरिक दक्षता परीक्षा देने की स्थिति में नहीं था।
इसके बावजूद वह मेडिकल दस्तावेज और पैर पर प्लास्टर के साथ तय दिन फिजिकल परीक्षा बोर्ड के सामने पहुंचा और अपनी परेशानी बताई।
उसने चोट ठीक होने के बाद दोबारा दक्षता परीक्षा देने का मौका मांगा, लेकिन उसकी मांग नहीं मानी गई।
इसके बाद उसने हाईकोर्ट का रुख किया।
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याचिका में क्या मांग की गई?
याचिका में अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा ने एक याचिकाकर्ता की चोट और उससे जुड़ी परेशानी के बारे में कोर्ट को जानकारी दी थी।
तो वहीं इसके बाद सुनवाई के दौरान अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने उनकी मुख्य मांग कोर्ट के सामने रखी।
अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने साफ कहा कि अभ्यर्थी भर्ती के शारीरिक मानकों में किसी तरह की छूट नहीं मांग रहे हैं।
वे तय नियमों के मुताबिक ही दक्षता परीक्षा देने के लिए तैयार हैं।
उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि चोट से ठीक होने के बाद उन्हें शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल होने का एक और मौका दिया जाए।
उनका कहना था कि अभ्यर्थी परीक्षा से बचना नहीं चाहते थे, बल्कि चोट की वजह से तय तारीख पर परीक्षा देना संभव नहीं हो पाया।
इसलिए चोट ठीक होने के बाद उन्हें दोबारा दक्षता परीक्षा में शामिल होने का मौका दिया जाए।
RPSC ने क्यों किया विरोध?
अभ्यर्थियों की मांग का आरपीएससी की ओर से विरोध किया गया।
राहत का विरोध करते हुए आरपीएससी की ओर से अधिवक्ता एमएफ बेग ने कहा कि चोट के आधार पर दोबारा परीक्षा का मौका देना सही नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि अगर एक अभ्यर्थी को इस तरह अतिरिक्त मौका दिया गया तो आगे दूसरे अभ्यर्थी भी अलग-अलग कारण बताकर ऐसी मांग कर सकते हैं।
आरपीएससी के मुताबिक, इससे दक्षता परीक्षा की तय तारीख आगे बढ़ती रहेगी और पूरी भर्ती प्रक्रिया भी लंबी हो सकती है।
आयोग का कहना था कि भर्ती को तय समय में पूरा करने के लिए परीक्षा की समय-सीमा को बार-बार बढ़ाना ठीक नहीं होगा।
कोर्ट ने सितंबर में फिर परीक्षा का दिया मौका
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सभी याचिकाकर्ता अभ्यर्थियों को राहत दी।
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि याचिकाकर्ताओं पर जानबूझकर परीक्षा से अनुपस्थित रहने का कोई आरोप नहीं है।
इसके अलावा, उन्हें शारीरिक दक्षता परीक्षा में जानबूझकर अनुपस्थित रहने से कोई लाभ मिलने वाला भी नहीं था।
इसलिए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की शारीरिक दक्षता परीक्षा सितंबर में दोबारा कराने के निर्देश दिए।
हालांकि, इसके लिए हर याचिकाकर्ता को 10 हजार रुपए हर्जाना जमा करना होगा। हर्जाना जमा करने के बाद ही उन्हें दोबारा परीक्षा में शामिल होने का मौका मिलेगा।
यानी चोट की वजह से तय तारीख पर फिजिकल नहीं दे पाने वाले अभ्यर्थी अब सितंबर में परीक्षा दे सकेंगे। लेकिन उन्हें भर्ती के तय शारीरिक मानकों में कोई छूट नहीं मिलेगी।
उन्हें दोबारा परीक्षा में शामिल होकर वही मानक पूरे करने होंगे, जो भर्ती के लिए पहले से तय हैं।
सिर्फ परीक्षा का मौका, मानकों में छूट नहीं
इस मामले में यह बात स्पष्ट है कि हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों की चोट को देखते हुए उन्हें शारीरिक मानकों से छूट नहीं दी है।
यानी सितंबर में जब दोबारा दक्षता परीक्षा होगी तो अभ्यर्थियों को वही शारीरिक मापदंड पूरे करने होंगे, जो एसआई और प्लाटून कमांडर भर्ती-2025 के लिए तय किए गए हैं।
इस आदेश से उन अभ्यर्थियों को राहत मिली है, जो लिखित परीक्षा पास करने के बाद फिजिकल की तैयारी कर रहे थे, लेकिन चोट लगने की वजह से तय तारीख पर परीक्षा नहीं दे सके।
हाईकोर्ट के सामने अभ्यर्थियों की ओर से साफ कहा गया था कि वे शारीरिक मानकों में किसी तरह की छूट नहीं चाहते। उन्हें भर्ती के तय नियमों के मुताबिक ही दक्षता परीक्षा देनी होगी।
यानी हाईकोर्ट ने उन्हें सिर्फ दोबारा परीक्षा देने का मौका दिया है।
फिजिकल के नियम और शारीरिक मानक पहले की तरह ही रहेंगे। इसके लिए उन्हें 10 हजार रुपए हर्जाना भी जमा करना होगा।
अब सितंबर में होने वाली दक्षता परीक्षा में ये अभ्यर्थी अपनी शारीरिक क्षमता साबित कर सकेंगे।