जयपुर। राजस्थान में नगर निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव से पहले नागौर में SP का पद खाली होने और निकाय चुनाव से ठीक पहले ASP को SP का अतिरिक्त चार्ज दिए जाने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है।
नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को पुलिस अधीक्षक बनाए जाने की व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
RLP ने नागौर में SP की नियमित नियुक्ति नहीं होने और ASP को अतिरिक्त कार्यभार दिए जाने को लेकर एख जनहित याचिका दायर की है।
याचिका में 19 अगस्त 2026 को ASP को नागौर SP का अतिरिक्त चार्ज देने वाले आदेश को रद्द करने और खाली पद पर नियमित SP की नियुक्ति की मांग की गई है।
RLP ने राज्य में निकाय चुनाव निष्पक्ष, निर्भीक और पारदर्शी तरीके से कराने के साथ पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की भी मांग की है।
मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि चुनाव का कार्यक्रम घोषित हो चुका है और ऐसे समय में जिले की पुलिस व्यवस्था से जुड़ा यह मामला अब हाईकोर्ट के सामने है।
SP के ट्रांसफर बाद से खाली है पद
नागौर के तत्कालीन SP रोशन मीणा के तबादले के बाद जिले में SP का पद खाली हो गया था।
इसी बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निकाय चुनावों का कार्यक्रम घोषित कर दिया।
चुनाव की तैयारियों के बीच SP के पद पर नियमित नियुक्ति नहीं होने को लेकर सवाल उठाया गया है।
RLP की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि चुनाव के दौरान जिले की पुलिस व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है।
ऐसे में पुलिस विभाग के प्रमुख पद पर नियमित अधिकारी की नियुक्ति होनी चाहिए।
ASP को SP का अतिरिक्त चार्ज देने पर आपत्ति
नगर निकाय चुनावों के कार्यक्रमों की घोषणा के बाद कार्मिक विभाग ने 19 अगस्त 2026 को नागौर में नियमित SP नियुक्त करने के बजाय अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को SP का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया था।
याचिका में कार्मिक विभाग के इसी आदेश को चुनौती दी गई है।
RLP का कहना है कि नगर निकाय चुनाव की घोषणा हो चुकी है और जिले में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए जिले में नियमित SP की नियुक्ति होनी चाहिए। ऐसे चुनावी समय में ASP को SP का अतिरिक्त चार्ज देना उचित नहीं है।
इसी वजह से पार्टी ने 19 अगस्त के आदेश को रद्द करने और नियमित SP की नियुक्ति की मांग की है।
याचिका में निकाय चुनाव के दौरान पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता बनाए रखने की भी मांग की गई है।
मामला किसी अधिकारी की व्यक्तिगत नियुक्ति तक सीमित नहीं है। याचिका में चुनाव के दौरान पुलिस प्रशासन की निष्पक्ष भूमिका से जुड़ा सवाल भी उठाया गया है।
हाईकोर्ट में RLP की मांग
RLP के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के अधिकृत प्रतिनिधि और RLP नेता अनिल बारुपाल की ओर से यह हाईकोर्ट में ये जनहित याचिका पेश की गई है।
याचिका में नागौर के खाली SP पद को तत्काल नियमित नियुक्ति से भरने की मांग की गई है।
इसके साथ ही ASP को SP का अतिरिक्त कार्यभार देने वाले 19 अगस्त के आदेश को रद्द करने की मांग की गई है।
याचिका में नगर निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कराने की मांग की गई है।
इसके साथ ही हाईकोर्ट से चुनाव के दौरान सभी दलों और उम्मीदवारों के लिए समान और निष्पक्ष माहौल सुनिश्चित करने को लेकर भी निर्देश देने की मांग की गई है।
चुनाव से पहले पुलिस व्यवस्था का सवाल
नागौर में नगर निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव होने हैं। ऐसे में जिले की कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी अहम होगी।
RLP ने इसी को आधार बनाकर ASP को SP का अतिरिक्त चार्ज देने के फैसले पर सवाल उठाया है।
पार्टी का कहना है कि चुनाव के दौरान पुलिस प्रशासन का निष्पक्ष रहना जरूरी है।
इसी वजह से नियमित SP की नियुक्ति और मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया गया है।
राजनीतिक दबाव की आशंका का भी जिक्र
याचिका में चुनाव के दौरान पुलिस प्रशासन पर राजनीतिक दबाव पड़ने की आशंका भी जताई गई है।
RLP ने कहा है कि पुलिस कार्रवाई किसी एक दल के कार्यकर्ताओं या समर्थकों के खिलाफ नहीं होनी चाहिए।
याचिका में चुनाव के दौरान सभी पक्षों के लिए पुलिस की कार्रवाई एक जैसी रखने की मांग की गई है।
RLP ने हाईकोर्ट से ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, जिसमें सभी उम्मीदवारों और दलों के साथ समान व्यवहार हो।
हाईकोर्ट में अब मामले की सुनवाई
फिलहाल यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट की प्रधान पीठ, जोधपुर के सामने है।
याचिका में ASP को नागौर SP का अतिरिक्त चार्ज देने के आदेश को चुनौती दी गई है। साथ ही नियमित SP की नियुक्ति की मांग की गई है।
RLP ने चुनाव के दौरान पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए भी हाईकोर्ट से निर्देश देने की मांग की है।
फिलहाल हाईकोर्ट ने मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है।
अब मामले में हाईकोर्ट की आगे की कार्यवाही के बाद ही साफ होगा कि याचिका पर क्या आदेश दिया जाता है।